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विभूतियाँ
छायावाद के प्रवर्तक
पद्मश्री मुकुटधर पांडेय
हिंदी में छायावादी काव्य आंदोलन के प्रणेता । पद्मश्री,
डी.लिट. तथा साहित्यवाचस्पति की उपाधियों से सम्मानित ।
कृतियाँ –
पूजा फूल (कविता-1916), लच्छमा (अनुदित उपन्यास-1917), हृदय
दान (कहानी-1918), परिश्रम (निबंध-1917), शैलबाला (अनुदित
उपन्यास-1916), मामा (अनुदित उपन्यास-1924), छायावाद और अन्य
निबंध (आलेख-1981), स्मृति पूँज (संस्मरण-1983), मेघदूत का
छत्तीसगढ़ी अनुवाद, छायावाद और अन्य श्रेष्ठ निबंध, विश्वबोध
(काव्य संकलन)
हिंदी के प्रथम कहानीकार पं. माधवराव सप्रे
हिंदी की पहली कहानी- एक टोकरी भर मिट्टी- के रचयिता ।
छत्तीसगढ़ के प्रथम पत्रकार । बिलासपुर के पेंड्रा नामक छोटी
सी जगह में 1900 से ‘छत्तीसगढ़
मित्र’
नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन, संपादन । नागपुर से
‘हिंदी-ग्रंथमाला’
मासिक पत्रिका तथा ‘हिंद
केसरी’
नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन कर देश में राष्ट्रीय जागरण का
महत्वपूर्ण कार्य । जबलपुर तथा खंडवा से राष्ट्रीय
‘कर्मवीर’
के प्रकाशन में केंद्रीय भूमिका । रायपुर में प्रथम महिला
पाठशाला- जानकी देवी महिला पाठशाला की संस्थापक । माखनलाल
चतुर्वेदी, सेठ गोविंददास, पं.द्वारका प्रसाद मिश्र, प.
रविशंकर शुक्ल, पं. सुंदरलाल शर्मा, लल्ली प्रसाद पांडे, पं.
लक्ष्मीधर वाजपेयी आदि राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार, साहित्यकार
एवं राजनेताओं के प्रेरणास्त्रोत । सुप्रसिद्ध संत समर्थ
रामदास स्वामी के मराठी दासबोध तथा महाभारत-मीमांसा, दत्त
भार्गव संवाद, श्रीराम चरित्र, एकनाथ चरित्र आत्मविद्या आदि का
हिंदी अनुवाद । हिंदी को समृद्ध करने वाले 200 से अधिक निबंधों
का राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशन । 1924 में अखिल भारतीय हिंदी
साहित्य सम्मेलन, देहरादून अधिवेशन का सभापतित्व । 23 अप्रैल
1926 को रायपुर में आकस्मिक निधन ।
संगीत सम्राट महाराज चक्रधर सिंह
विश्व विख्यात संगीतज्ञ, हिंदी सेवी । रायगढ़ घराना (कत्थक की
अभिनव शैली)का सारा श्रेय महाराज को जाता है । हिदी के महान
सेवक एवं रचनाकार । 1924 में रायगढ़ रिसासत के राजा बने । 1934
में प्रतिभा प्रदर्शन से प्रभावित होकर तत्कालीन वायसराय
द्वारा ‘संगीत-सम्राट’
की उपाधि से सम्मानित । प्रसिद्ध कृतियाँ- संगीत - नर्तन
सर्वस्वम, ताल तोय निधि, राग रत्न मंजूषा, मूरज चरण पुष्पाकर ।
साहित्य- अलकापुरी, माया चक्र, रम्य रास, बैरागढिया राजकुमार,
राग रत्न मंजूषा, काव्य-कानन, प्रेम के तीर, मृगनयनी । उर्दू-
जोशे फरहद, निगाहे फरहद ।
उन्होंने दुर्लभ बोलों की रचना की थी, जिसमें बुलबुल परन, कड़क
बिजली, गनपरन, एक्कड़, मुक्ताहार, गीतांगी, कचनार, सूर्यतनय,
श्रृंगावली आदि प्रमख हैं ।
महराज चक्रधर सिंह ने पं. विष्णु दिगम्बर पलुस्कर जैसे
महान संगीतज्ञ को 1001 रूपये देकर सम्मान बढ़ाया था । वे
महावीर प्रसाद द्विवेदी जी को भी प्रतिमाह एक निश्चित राशि
जीवन पर्यंत आर्थिक सहयोग के रूप में भेजते रहे जो उनकी
संस्कृतिप्रियता का अनुपम उदाहरण है । तत्कालीन महत्वपूर्ण
साहित्यकारों को भी उन्होंने लगातार प्रोत्साहन दिया जिनमें
माखन लाल चतुर्वेदी, पदुमलाल पुन्नलाल बख्शी, डॉ. रामकुमार
वर्मा, लोचन प्रसाद पांडेय, मुकुटधर पांडेय, प्रभृति
साहित्यकार लगातार रायगढ़ दरबार की शोभा बढ़ाते रहे ।
महाराज की स्मृति में रायगढ़ में विश्वप्रसिद्ध चक्रधर
समारोह का प्रतिवर्ष आयोजन होता है। जन्म- भाद्र कृष्ण पक्ष
चतुर्थी, संवत 1612 । निधन 7 अक्टूबर 1947 को मात्र 45 वर्ष
में ।
पद्मभूषण पं. झावर मल्ल शर्मा
प्रख्यात पुरातत्वविद एवं साहित्यकार पं.लोचन प्रसाद पांडेय
के सखा, प्रख्यात पत्रकार, साहित्यकार । 1907 से ज्ञानोदय का
कोलकाता से संपादन । 1909 में साप्ताहिक भारत का मुंबई से
संपादन । 1910 में नागपुर से मारवाड़ी का संपादन । 1914 में 14
अगस्त को कोलकाता से दैनिक कलकत्ता समाचार का संपादन, फिंरगी
हूकुमत ने 2000 रूपयों की ज़मानत माँगी । नहीं देने पर 18 जून
1919 से समाचार पत्र का प्रकाशन स्थगित । 1921, 15 फरवरी से
कलकत्ता समाचार का पुनः प्रकाशन । 12 फरवरी 1925 में दिल्ली से
दैनिक हिंदू संसार का संपादन, प्रकाशन । मानहानि का मुकदमा एवं
सजा । 1958 में खेतड़ी में रामकृष्ण मिशन की स्थापना । रचित
ग्रंथ –
भारतीय गोधन, हिदीं गीता रहस्य सार, अरविंद चरित, सीकर का
इतिहास, खेतड़ी नरेश और विवेकानंद, केसरी सिंह समर, आदर्श
नरेश, खेतड़ी का इतिहास, आत्मविज्ञान शिक्षा, तिलकगाथा, गाँधी
स्वराज, राजस्थान और नेहरू परिवार । संपादन- कारावास की कहानी,
माधव मिश्र निबंधमाला, बालमुकुंद गुप्त स्मारक ग्रंथ,
बालमुकुंद गुप्त निबंधावली, गुलेरी गरिमा ग्रंथ, माधव मिश्र
कवितावली, राधाकृष्ण रचनावली, श्याम पचीसी । सम्मान
–
महाराजा मेवाड़ फाउंडेशन का महाराणा कुंभ पुरस्कार-1973, अखिल
भारतीय हिंदी सम्मेलन द्वारा साहित्य वाचस्पति की उपाधि,
राजस्थान साहित्य अकादमी का साहित्यकार सम्मान -1976, मनीषी की
उपाधि - 1982, राजस्थान मंच दिल्ली के तत्वाधान में
उपराष्ट्रपति श्री बी ड़ी जत्ती द्वारा अभिनंदन ग्रंथ जयपुर
में समर्पित । महामहिम राष्ट्रपति द्वारा पद्मभूषण से अलंकृत
–
1982 । निधन –
4 जनवरी 1983
महाकवि गोपाल मिश्र
हिंदी साहित्य के इतिहास में छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक महत्वपूर्ण
रीतिकालीन कवि । छत्तीसगढ़ के आदि कवि । कृतियाँ
–
भक्ति चिंतामणि, जेमिनी अश्वमेध, सुदामा चरित, खूब तमाशा, आदि
।
राम काव्य के मर्मज्ञ डॉ. बल्देव प्रसाद मिश्र
विलक्षण प्रतिभा के धनी । प्रख्यात साहित्यकार, समीक्षक,
शिक्षाशास्त्री, प्रशासक, अधिवक्ता, प्रवचनकार एवं समाजसेवी ।
रायगढ़ राजा महाराज चक्रधर सिंह के दीवान । 1953 से 1959 तक
भारत सेवक समाज के प्रदेश संयोजक । हिंदी साहित्य सम्मेलन की 3
बार अध्यक्षता । साप्ताहिक जनतंत्र का प्रकाशन । कृतियाँ
–
श्रृंगार शतक, वैराग्य शतक, श्याम शतक (सभी ब्रज भाषा में),
अनुवाद –
अमरूक शतक(संस्कृत), हृदयबोध(मराठी),
समीक्षा –
तुलसी दर्शन । निबंध संग्रह
–
मानस में रामकथा, भारतीय संस्कृति में गोस्वामी जी का योगदान,
मानस माधुरी । जन्म- 12 सितम्बर 1898।
प्रखर
लोककलाविद् दाउ रामचंद्र देशमुख
छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य एवं लोकमंच के मर्मज्ञ । प्रख्यात कलाकार
। देहाती कला विकास मंच एवं चंदैनी गोंदा के संस्थापक । प्रमुख
मंचित नाटक –
काली माटी, बंगाल का अकाल, सरग अउ नरक, राय साहब मि. भोंदू खान
साहब नालायक अली खाँ, मिस मैरी का डांस । हबीर तनबीर ने देशमुख
जी के कलाकारों को लेकर ही सबसे पहले दिल्ली, कोलकाता, आगरा
आदि शहरों में अपना नाटक किया ।
राज्यनिर्माण के अग्रदूत हरि ठाकुर
छत्तीसगढ के प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, इतिहासकार
एवं साहित्यकार । छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के प्रमुख
सूत्रधार । 1942 के आंदोलन से लेकर 1955 के गोवा मुक्ति
स्वतंत्रता संग्राम तक सक्रिय । भूदान आंदोलन में भागीदारिता ।
1954 नागपुर भूदान की पत्रिका साम्ययोग का संपादन । 1960 में
छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता । 1965-65
संज्ञा मासिक पत्रिका का संपादन । 1967-68 साप्ताहिक
राष्ट्रबंधु का संपादन । संयोजक, छत्तीसगढ़ रारज्य निर्माण
संयोजन समिति । 1995 में सृजन-सम्मान संस्था की स्थापना गठन और
2001 तक अध्यक्ष रहे । कृतियाँ
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काव्य
01. लोहे का नगर
02. नये विश्वास के बादल
03. जय छत्तीसगढ़
04. पौरूषः नये संदर्भ
05. मुक्ति गीत
06.
धान के कटोरा
07.
बानी हे अनमोल
08. छत्तीसगढ़ी गीत अउ कविता
09. गीतों के शिलालेख
10. शहीद वीर नारायण सिंह
11.
हँसी एक नाव सी (गीत संकलन)
इतिहास, शोध, जीवनी
01. त्यागमूर्ति ठा. प्यारे लाल सिंह
02. छत्तीसगढ़ के रत्न
03. उत्तर कोसल बनाम दक्षिण कोसल
05. छत्तीसगढ़ के इतिहास पुरूष
06. छत्तीसगढ़ गाथा
07. जल, जंगल और ज़मीन के संघर्ष की शुरूआत
08. छत्तीसगढ़ राज्य का प्रांरभिक इतिहास
09. कोसल की भाषा कोसली
10. छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक विकास
सम्मान –
छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन । श्री चक्रधर कला केंद्र
रायगढ़, महात्मा गाँधी जन्म शताब्दी समारोह, मध्यप्रदेश,
रविशंकर विश्वविद्यालय, रामचंद्र देशमुख सम्मान, भिलाई, महंत
नरेंद्रदास स्मृति सम्मान, भोपाल, छत्तीसगढ़ी साहित्य सम्मेलन
द्वारा नागरिक अभिनंदन, रायपुर, महाकोशल अलंकरण आदि सैकड़ो
सम्मान एवं पुरस्कार । अनेक विश्वविद्यालयों एवं स्कूली शिक्षा
के पाठ्यक्रमों में रचनाओं का समादरण । जन्म
–
16 अगस्त 1927 एवं देहप्रयाण
–
3 दिसम्बर 2001
लोकनायक
बिसाहूदास मंहत
छत्तीसगढ़ के लोकनायक, समाजसेवी, प्रसिद्ध राजनेता एवं
कबीरवादी विचारधारा के प्रोत्साहनकर्ता । 1952 से 1977 तक 6
बार विधायक रहे । मध्यप्रदेश में लोक निर्माण विभाग, जेल
विभाग, श्रम, आदिम जाति, कल्याण विभाग एवं उद्योग मंत्री रहे ।
77 से 78 तक मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के निष्ठावान अध्यक्ष
भी रहे । जन्म –
1 अप्रैल 1924 तथा मृत्यु
–
23 जुलाई 1978 ।
बालसाहित्य के प्रहरी
नारायण लाल परमार
कवि, गीतकार, उपन्यासकार तथा विख्यात बाल साहित्यकार । चर्चित
कृतियाँ उपन्यास- छलना, प्यार की लाज, पूजामयी । कविता संग्रह
–
कांवर भर धूप, रोशनी की घोषणा, खोखले शब्दों के खिलाफ, सब कुछ
निष्पंद है, कस्तरी यादें, विस्मय के वृंदावन । कहानी
संग्रह-नर्तकी । बालसाहित्य
–
पंद्रह अगस्त, गद्दार कौन, छत्तीसगढ की लोककथाएं, चलो गीत
गायें, चरित्र बोध की कहानियां, बचपन की बाँसुरी, चार मित्र ।
छत्तीसगढी लेखन- सुरूज नई मरे, मतवार अउ दूसर एकांकी, सोन के
माली (द प्लेट ऑफ गोल्ड का अनुवाद) । गुजराती परिवार में 1
जनवरी 1927 को जन्म ।
प्रखर पुरातत्वविद् प्रो. शंकर प्रसाद तिवारी
जाने माने छायाकार, पुरातत्ववेत्ता । विश्वप्रसिद्ध बस्तर की
कुटुमसर गुफाओं की प्रथम खोज । देश-विदेश में अनेक शोध पत्रों
का वाचन एवं प्रशंसा । नेशनल जियोग्राफी मैग्जीन, अमेरिका में
विशेष सम्मान । न्यूमसिमैटिक सोसायटी ऑफ इंडिया, प्रागैतिहासिक
इतिहास लेखन समिति भारत के आजीवन सदस्य रहे । जन्म
–
18 जुलाई 1928, मुंगेली, बिलासपुर ।
मुस्तफ़ा हुसैन ‘मुश्फ़िक’
गुलाम रज़ा हैदरी
मावजी चावड़ा
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