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उद्देश्य
संस्था का मूल मंत्र - रचनात्मक संस्कारों
का अनुसमर्थन है । सबसे पहले मुख्यतः समाज में जागरुकता,
शिक्षा, साक्षरता, वैज्ञानिक चेतना में गुणात्मक अभिवृद्दि के
लिए में साहित्यकारों की भूमिका को लेकर संस्था का गठन किया
गया था । व्यापक विचार-विमर्श के पश्चात संस्था के उद्देश्य तय
किया गया जो इस प्रकार हैः-
रचनात्मक साहित्य और विविध विधाओं का
प्रोत्साहन ।
रचनाकारों का मूल्याँकन, सम्मान एवं उन्हें प्रतिष्ठा की रक्षा
करना ।
जीवन-मूल्यों की निरंतरता बनाये रखने वाले साहित्य का विकास ।
लोक भाषाओं का संरक्षण एवं संवर्धन ।
साहित्य को शिक्षा, सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता के लिए
कारगर बनाना ।
नये प्रतिभाओं का मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन ।
विभिन्न विभूतियों के कृतित्व को समाज में स्थापित करना ।
राष्ट्रीय सरोकारों और मूल्यों का अनुसमर्थन ।
सामाजिक कुरीतियों के विरूद्ध रचनात्मक संघर्ष ।
संस्कृति के सभी घटकों को विकास के लिए सतत् प्रयास ।
आयातीत एवं आरोपित मूल्यों के प्रति जनता को आगाह करने के
उपायों पर कार्य ।

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