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संस्था की नियमित
गतिविधियाँ
गोष्ठी
समीक्षा गोष्टी
किताब चर्चा
रचना-पाठ
व्याख्यान
संगोष्ठी
प्रतियोगिता
प्रशिक्षण-कार्यशाला,
वार्षिक साहित्य महोत्सव
पुरस्कार एवं सम्मान
प्रकाशन सहयोग एवं मार्गदर्शन
शिक्षा में साहित्य के हस्तक्षेप बढाने के लिए विभिन्न आयोजन
जरूरतमंद साहित्यकारों को सहयोग
अन्य सभी सांस्कृतिक गतिविधियाँ

गतिविधियों का संक्षिप्त विवरण
संगोष्ठी कार्यशाला
–
जनमत की दिशाबद्धता के लिए अपनी गतिविधियों के अंतर्गत संस्था
द्वारा सामाजिक, शैक्षिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर
अभिकेन्द्रित संगोष्ठियों/कार्यशालाओं
का आयोजन किया जाता है, अब तक अग्रांकित विषयों पर आयोजन
संपन्न हो चुका है –
1.
साहित्यकारों की भूमिका
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निरक्षरता निर्मूलन
2.
छत्तीसगढ़ की अस्मिता
3.
छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता
–
एक मूल्यांकन
4.
लघुकथा की अंतर्वस्तु
5.
बालश्रम की समस्या –
एक चिंतन
6.
नवसाक्षरोपयोगी साहित्य
–
विषय, शिल्प एवं भाषा
7.
अंधश्रद्धा निर्मूलन की संभावना
8.
आखिर क्यों नहीं पढ़ते किताबें
9.
विज्ञान चेतना में कला माध्यमों की भूमिका
10.
कबीर का रचना संसार
11.
नई सदी में बाल साहित्य की चुनौतियां
12.
छत्तीसगढ़ी भाषा और पाठ्यक्रम
13.
सामाजिक संप्रेषणीयता
–
हिंदी का सामर्थ्य
14.
छत्तीसगढ़ में हिंदी रंगमंच
–
विकास यात्रा
15.
व्यंग्य का गढ़ –
छत्तीसगढ़
16.
पढ़ने की आदत
17.
प्रेमचंद की याद
रचना पाठ
–
अपने समय के प्रमुख कवियों/रचनाकारों
के रचना पाठ एवं उन पर विमर्श कार्यक्रम के अंतर्गत रामेश्वर
शुक्ल अंचल (जबलपुर), राजेश्वर गुरू (रायपुर), डॉ. श्यामसुंदर
त्रिपाठी (भोपाल), रमेश दत्त दुबे (सागर), डॉ. बालेन्दु शेखर
तिवारी (राँची), शंकर पुण्तांबेकर (जलगांव), राजकमल नायक(भोपाल), विश्वरंजन (राँची), कस्तूरी दिनेश (रायगढ़), संतोष
रंजन (भोपाल), एवं एस.एस. मुकुल (मुंबई) श्री कस्तुरी दिनेश
(मुंबई), श्री अष्टभुजा शुक्ल (बस्ती)पर केंद्रित आयोजन संपन्न हुए हैं।
समीक्षा
–
संस्था की कृतियों सहित अन्य प्रमुख रचनाकारों की कृतियों पर
समय-समय पर समीक्षा गोष्ठियों का आयोजन विभिन्न इकाइयों के
द्वारा सार्थक ढंग से किया गया है। कृतियाँ हैं
–
1. छत्तीसगढ़ के इतिहास पुरुष
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हरि ठाकुर। 2. मारबो पेर रोवन नइ दन
–
समरथ गंवइहां। 3. नवें दशक की लघुकथाएं
–
संपादक डॉ. राजेन्द्र सोनी। 4. सदभावना दर्पण
–
संपादक गिरीश पंकज। 5. ऋतुओं की धूप
–
ठाकुर जीवन सिंह। 6. युगाक्षर
–
शिव कुमार पांडेय। 7. झांझ करताल बाजे
–
रामलाल निषाद ‘राजश्री’।
8. सतरंगी कलियाँ –
शंभूलाल शर्मा ‘वसंत’।
सुरुज पोटारिस अंधियार
–
डॉ. बिराही लाल साहू। 10. अभिशप्त उत्कल
–
गुरुदेव कश्यप। 12. छत्तीसगढ़ परिक्रमा
–
संपादक अर्चना पाठक। 13. आना चंदा हौले हौले
–
देवेन्द्र शर्मा ‘पुष्प’।
14. मूर्खानंद –
हेमंत चावड़ा। 15. चोर ले ज्यादा मोटरा उतअइल
–
डॉ. राजेन्द्र सोनी। 16. हम ठेठ देहात के
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श्री प्रफुल्ल पटनायक। 17. जुड़ने और टूटने के बीच
–
संतोष रंजन। 18. हँसी एक नाव सी (हरि ठाकुर के गीत)
–
चेतन भारती। 19. सपने जिनके ताबीर नहीं होते
–
शम्स तनवीर आदि अन्य 20 कृतियाँ ।
प्रथम अ.भा. साहित्य महोत्सव
–
प्रथम छत्तीसगढ़ स्तरीय साहित्य महोत्सव का आयोजन 26 अप्रैल,
2000 को पुरातात्विक स्थली उषाकोठी/करमागढ़
जिला रायगढ़ में संपन्न हुआ, जिसमें पूरे राज्य के 100 से अधिक
साहित्यकार सम्मिलित हुए। मुख्य अतिथि थे म.प्र. संस्कृत
अकादमी के पूर्व सचिव श्री भास्कराचार्य त्रिपाठी (भोपाल)। इस
आयोजन में सृजन-सम्मान की 5 कृतियों का विमोचन हुआ।
‘नई
सदी में बाल साहित्य की चुनौतियों’
पर आयोजित संगोष्ठी में गंभीर विमर्श हुआ।
महोत्सव में राष्ट्रीय स्तर पर बाल साहित्यकार श्री वसंत की
कविता पर व्यापक चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त अपने क्षेत्र में
विशेष योगदाने हेतु लखन लाल गुप्ता (रायपुर), नरेन्द्र
श्रीवास्तव (जांजगीर), नंदकिशोर तिवारी (बिलासपुर), डॉ. बिहारी
लाल साहू (रायगढ़), शांति यदु (रायपुर), चंपा मावले (खरसिया),
अमरेश्वर दुबे (अंबिकापुर), डॉ. अरुण शर्मा (जांजगीर), इंदरमन
साहू (दुर्ग), चि. अमित सोनी (रायपुर) एवं हेमंत चावड़ा
(रायगढ़) को सृजनश्री सम्मान प्रदान किया गया। उक्त अवसर पर
आयोजित कवि गोष्ठी में छत्तीसगढ़ के 50 रचनाकारों ने अपनी
रचनाओं का पाठ किया। आयोजन में जिंदल स्टील एवं पॉवर प्लांट के
कार्यकारी निदेशक श्री जे.डी. सुहैल का सहयोग एवं अध्यक्षता
उल्लेखनीय है।
द्वितीय अ.भा. साहित्य महोत्सव
–
20-21 जनवरी 2002 को रायगढ़ जिला के तमनार विकासखंड मुख्यालय
में द्वितीय अ.भा. साहित्य महोत्सव का आयोजन किया गया। इस
महत्वपूर्ण आयोजन में हंसी एक नाव सी, हरि ठाकुर के पत्र, चोर
ले ज्यादा मोटर उतिइल, जुड़ने और टूटने के बीच, मेरा मन, हम
ठेठ देहात के, जुगरी, पार्थ प्रतिज्ञा, अज्ञेय से अज्ञात तक,
जीवन सूत्र, तटबंध, कड़वे घूँट, जीवन की रणभूमि में, मिलकर दीप
जलाएं, बालबोध (मासिक) आदि बीस से अधिक कृतियों का विमोचन
संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे छत्तीसगढ़ विधानसभा
के अध्यक्ष पंडित राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल। यह आयोजन हरि ठाकुर
के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर केंद्रित रहा, जिसमें स्वतंत्रता
आंदोलन, सर्वोदय एवं राज्य निर्माण, साहित्य इतिहास, भाषा
चेतना, पत्रकारिता, आदि केक्षेत्र में विमर्श हुआ, जिसमें
पंडित मोतीलाल त्रिपाठी, पूर्णचन्द गुप्ता, जागेश्वर प्रसाद,
रामकुमार अग्रवाल, अशोक झा, डॉ. बलदेव, स्व. विश्वेद्र ठाकुर,
डॉ. रमेंन्द्र मिश्र, डॉ. बिहारीलाल साहू, सुभाष मिश्र, गिरीश
पंकज, डॉ. शोभाकांत झा, डॉ. चितरंजन कर, रामेश्वर वैष्णव, श्री
विजय देव आदि ने सार्थक हस्तभेप रेखांकित किया। कार्यक्रम के
विशिष्ट अतिथि श्री रमेश दत्त दुबे (सागर) एवं लैलूंगा
विधानसभा के विधायक प्रेम सिंह सिदार थे। यह आयोजन स्थानीय
इकाई एवं आदर्श ग्राम भारतीय शिक्षण एवं शोध संस्थान के संयोजन
में संपन्न हुआ। जिसमें संस्था द्वारा विभिन्न अलंकरणों से
वरिष्ठ रचनाकारों को सम्मानित किया गया तथा संस्था के 7 अखिल
भारतीय पुरस्कार प्रदान किए गए।
तृतीय अ.भा. साहित्य महोत्सव
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15-16 फरवरी 2003 को छत्तीसगढ़ की राजधानी में तृतीय अखिल
भारतीय साहित्य महोत्सव संपन्न हुआ। इस महोत्सव में राज्यपाल
महामहिम दिनेश नंदन सहाय, विधानसभा अध्यक्ष पंडित राजेन्द्र
प्रसाद शुक्ल, मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी, शिक्षा मंत्री श्री
सत्यनारायण शर्मा, नेता प्रतिपक्ष नंदकुमार साय तथा वरिष्ठ
साहित्यकार एवं ज्ञानपीठ के निदेशक श्री प्रभाकर श्रोत्रिय
(दिल्ली), ब्लिट्ज के पूर्व संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री
नंदकिशोर नौटियाल (मुंबई), कुलपति रविशंकर विश्वविद्यालय प्रो.
बी.पी. चन्द्रा, कुलपति घासीदास विश्वविद्यालय श्री पुष्पेश
पंत, वरिष्ठ शिक्षाविद् श्री रमेश दुबे (भोपाल) तथा संपादक
अक्षरा श्री विजय देव (भोपाल) की उपस्थिति में अखिल भारतीय
वार्षिक सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों
में प्रमुख रचनाधर्मी हैं
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गोपाल मिश्र सम्मान (कविता) डॉ. प्रभंजन शास्त्री, पद्मभूषण
पं. झाबरमल्ल शर्मा सम्मान (पत्रकारिता) श्री रमेश नैयर,
पद्मश्री मुकुटधर पांडेय सम्मान (लघु पत्रिका) श्री भरत मिश्र
प्राची, संपादक कंचनलता (राजस्थान), श्री चक्रधर महाराज सम्मान
(ललित निबंध) डॉ. श्रीराम परिहार (खंडवा), डॉ. बल्देव प्रसाद
मिश्र सम्मान (कहानी) श्री शिवशंकर पटनायक, श्री हरि ठाकुर
सम्मान (समग्र) श्री गुरुदेव कश्यप चौबे, धुन्नीलाल दुबे
सम्मान (पत्रकार) श्री राजनारायण मिश्र, डॉ. कन्हैयालाल सम्मान
(पर्यावरण) श्री एस.एस. प्रधान, मावजी चावड़ा सम्मान (बाल
साहित्य) श्री रमेशदत्त दुबे (सागर), मुस्तफा हुसैन
‘मुश्फिक’
सम्मान (ग़ज़ल) श्री राजसागरी (जबलपुर), मनभावती देवी सम्मान
(महिला लेखन) डॉ. इलीना सेन। उक्त दो दिवसीय अनुष्ठान में
प्रदेश एवं देश के 300 से अधिक रचनाकारों ने अपना सार्थक
हस्तक्षेप रेखांकित किया। समारोह में समकालीन चुनौतियाँ तथा
शैक्षणिक एवं ‘भविष्य
में शिक्षा तथा भाषाई अस्मिता’
विषय पर गंभीर विमर्श हुए। साहित्योत्सव में सृजन-गाथा, माटी
के आसपास (राजेन्द्र गुप्ता), हिल मिल करसब करत हैं झिलमिल
(स्वराज्य करुण), होना ही चाहिए आंगन, चलो चलें अब झील पार
(जयप्रकाश मानस) इतिहास पद्धति एवं इतिहास लेखन (डॉ. रामकुमार
बेहार, डॉ. ऋषिराज पांडेय) एकेडमिक चैनल (प्रशांत नीरज) आदि
कृतियों का विमोचन संपन्न हुआ। सर्वभाषा कविता पाठ में हिंदी,
उर्दू, ब्रज, बुंदेली, अवधी, छत्तीसगढ़ी, मराठी आदि भाषा के
रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट कविताओं का पाठ किया। इस
महत्वपूर्ण आयोजन में छत्तीसगढ़ से प्रकाशित होने वाली
लघुपत्रिकाओं की प्रदर्शनी भी विशेष चर्चित रही।
दास स्मृति समारोह
संस्कृत के कवि एवं अनुवादक चिरंजीव दास स्मृति दिवस का आत्मीय
आयोजन किया गया।
हिंदी गौरव सम्मान
14 सितंबर 2003 को प्रदेश स्तरीय हिंदी दिवस समारोह का आयोजन
संस्था द्वारा किया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ के 7 वरिष्ठ
रचनाकारों सर्वश्री विनोद कुमार शुक्ल, श्री श्यामलाल
चतुर्वेदी, डॉ. पालेश्वर शर्मा, डॉ. रमेशचन्द्र मेहरोत्रा,
श्री बबन मिश्र, डॉ. सरोज मिश्र, डॉ. विमल कुमार पाठक तथा
हिंदी भाषा के कवि श्री पहिलाज राय मुसाफिर को उनके उल्लेखनीय
योगदान के लिए ‘हिंदी
गौरव’
सम्मान से अलंकृत किया गया। उक्त अवसर पर छ.ग. के शताधिक
रचनाकारों ने ‘सामाजिक
संप्रेषणीयता –
हिंदी का सामर्थ्य’
विषय पर आयोजित संगोष्ठी में गहन विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम
के मुख्य अतिथि थे श्री राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल, अध्यक्ष,
छत्तीसगढ़ विधानसभा, अध्यक्षता छत्तीसगढ़ शासन के शिक्षामंत्री
व सृजन सम्मान के प्रांतीय अध्यक्ष श्री सत्यनारायण शर्मा ने
की।
इस अवसर पर राजेश्री महंत रामसुंदर दास (अध्यक्ष, छ.ग. संस्कृत
बोर्ड), डॉ. देवीप्रसाद वर्मा (अध्यक्ष छ.ग. हिंदी परिषद),
श्री हसन खान (अध्यक्ष, छ.ग. मदरसा बोर्ड), श्री बालचन्द्र
कछवाहा (अध्यक्ष, पं. सुंदरलाल शर्मा शोध पीठ), डॉ. बल्देव,
डॉ. राजेन्द्र सोनी, श्री संतोष रंजन सहित बड़ी संख्या में
छ.ग. हिंदी, संस्कृत एवं छत्तीसगढ़ी भाषा के विद्वान रचनाकार
उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन जयप्रकाश मानस
द्वारा किया गया था। (क्रमशः जारी है..)

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