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माह के लघुकथाकार
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डॉ. जे. आर. सोनी |
बारिश
सुनील क्रोध में आकर
कार्यक्रम में जोर-जोर से बोलने लगा । उसने सबका ध्यान अपनी ओर
खींच लिया और उसके चारों ओर लोग इकट्ठा गो गये । वह संयोजक से
बोलने लगा कि बड़े साहित्यकार बनते हो, मेरे पिताजी वर्षों से
लिख रहे हैं, वरिष्ठ हैं, उन्हें अध्यक्ष बनाने के बजाय
उपाध्यक्ष बना दिये । आप लोगों ने अच्छा नहीं किया । मैं
पिताजी को पद से इस्तीफा देने के लिए कहूंगा, इस तरह
और.........। बहुत देर से रामअधीर सुन रहा था फिर उसेने सुनील
से कहा-तुम्हारे पिताजी बहुत दिन से जरूर लिख रहे हैं परंतु एक
भी कविता, कहानी आज तक किसी भी समाचारपत्र या पत्रिकाओं में नहीं छपी है । सुनील का मुँह छोटा हो गया । रामअधीर ने कहा
बेटा यदि सिफारिश कर अध्यक्ष बना भी दे तो क्या फायदा, ये तो
कलयुग में ही होगा
?
अमचूर
अमचूर
नाम से मुंह में पानी आ जाता है । आम के खट्टे मीठे स्वाद
जिसमें हल्दी, मिर्च, नमक रहता है। दीनानाथ शुक्ला हायर
सेकेण्ड्री स्कूल में प्राचार्य थे । विद्यालय में मस्त
आराम परस्त जीवन जीते थे । कोई पढाई लिखाई से मतलब नहीं रखते थे
। बिलासपुर से अपने लूना में आना जाना करते थे। जब अंगरेज़ी का
विषय पढ़ाते थे तो शुक्ला जी का मुंह अमचूर आये व्यक्ति के
समान चपर-चपर करते थें,
ये देखकर सभी छात्रों को हंसी आती थी कि
सर आज अमचूर खाकर आये हैं । दूसरे दिन शुक्ला जी जब कक्षा में
पढ़ाने आये तो शरारती छात्रों ने बोर्ड में अमचूर लिख दिये था,
सभी छात्र ही-ही कर हंसने लगे । शुक्ला जी बहुत नाराज हुए और
सभी छात्रों के डेस्क में खड़ाकर तथा सबको एक–एक
छड़ी जमा दिये और गुस्से में भनभनाते हुए प्राचार्य-कक्ष में
चले गये । ये किस्से स्टाफ रूम में भी प्राचार्य विरोधी शिक्षक
गण बड़े चटकारे लेकर कहने लगे । अमचूर शब्द का उपयोग सभी
शिक्षक और छात्रगण करने लगे । यहाँ तक जिस मार्ग से शुक्ला जी
आते थे वहाँ के सड़कों पर छात्रों ने चाक से अमचूर लिख दिया ।
प्राचार्य महोदय ने परेशान होकर अपना तबादला अमचूर नामक गाँव
में ही करा लिया ।
मच्छरदानी
राहुल प्रातः 5 बजे अपने पिताजी
के साथ घुमने के लिये जवाहर उद्यान जाता था। मार्ग में तेलीबांधा तालाब पड़ता
था। रोजाना देखते थे कि तालाब किनारे पानी में मच्छरदानी कैसे
टांगकर रखे हैं यह देखर राहुल को बड़ा अटपटा लगता था इसलिये
उसने उत्सुकतावश प्रश्न किया कि पिताजी हम लोग घर में मच्छरदानी
लगाकर सोते है । परंतु पानी में मच्छरदानी लगाकर कैसे सोते हैं
और कौन सोते हैं ?
राहुल के पिताजी ने मजाक में कहा कि बेटे तालाब की मछलियाँ भी
रात में मच्छरदानी लगाकर सोती हैं, ये देख लो । राहुल हँसने
लगा हा-हा, क्या मछलियाँ भी मच्छरदानी लगाकर सोती हैं
?
राहुल ने फिर पूछा,-पिताजी क्यों लगाते है मच्छरदानी । पिताजी
ने बताया कि बेटा मछली के बच्चे बेचने वालों ने मच्छरदानी
लगाये हैं । छोटी-छोटी मछलियों से लाखों का व्यापार करते हैं ।
इसी मच्छरदानी में पालकर रखते हैं । मछली पालन करने वालने कृषक
इसे खरीदकर गाँव के तावाब, पोखर में डाल देते हैं । मछलियों के
बड़ी होने पर जाल से निकालकर लाखों रुपये का लाभ कमाते हैं ।
राहुल आज भी मच्छरदानी देखकर हँसता
कम दुखी ज्यादा होता है ।
अंतिम इच्छा
प्रेम प्रकाश
शर्मा जी प्रथम श्रेणी अधिकारी ग्वालियर के मोती महल में पदस्थ
थे । सेवानिवृत्ति
के लिये चार वर्ष बाकी थे। दो वर्ष सरकार के मर्सी पर बढ़ गया
था । शर्मा जी अपने काम ईमानदारी, लगन, मेहनत से समय-पूर्व कर
दिया करते थे। टेबल में कोई कागज नहीं रखते थे।
जैसे चपरासी रामदीन टेबल में नस्तियों को रखता दस मिनट में
वे सभी
फाइलों का निराकरण कर देता था। शर्मा जी बत्तीस साल सेवा कर
चुके थे। शेष
सेवा को अच्छे ढंग से बीत जाये यही प्रार्थना ईश्वर से करते ।
शर्मा जी को
मधुमेह हो गया था। समय के अनुसार भोजन नाश्ता करते थे ।
खाना खाने से पूर्व नियमित रूप से गोलियाँ का सेवन
करते थे ।
प्रेम प्रकाश की पत्नी सुमित्रा बहुत सेवा करती थी। बड़ी भली
महिला थी। बच्चों की विवाह कर मातृ-पितृ ऋण से मुक्त हो गये थे
। शर्मा जी को बीमारी ने उम्र से पहले वृद्ध बना दिये थे।
प्रातः सुबह उठकर पाँच मील पैदल चलते थे। इसलिये राजरोग अटेक
नहीं कर पाते थे। सुमित्र प्रतिदिन टेबलेट खाने के लिये ध्यान
रखती थी।
एक दिन शर्मा जी के राजरोग में
थोड़ी सी वृद्धि हो गई । आफिस वे 6 बजे हांफते हुये आये।
सुमित्रा ने देखकर, कहाँ क्या हो गया । जल्दी से
फ्रीज से
एक बोतल ठंडा पानी निकालकर गिलास में दो
। वे एक सांस में
पानी पी गये। शर्मा जी की पत्नी सुमित्रा से कहा कि मैं ज्यादा
दिन नहीं जी पाऊंगा । मेरा शरीर खोखला हो गया है। मेरी अंतिम
इच्छा है बच्चों को ठीक से रखना, मेरा पेंशन लगभग साढ़े पाँच
हजार रुपये माह बार एवं जमा राशि बीमा,जी.पी.एफ. ग्रेज्युटी
राशि लगभग सात लाख रुपये मिल जायेंगे । तुम्हारा गुजारा चल
जाएगा । सुमित्रा बोली कि तुम तो अपनी अंतिम इच्छा को बता
दिये । मेरी अंतिम इच्छा है कि मैं आपसे पहले मरूं और मेरी
मृत्यु हो तो मेरी लाश को अपने कंधे में लादकर मुक्ति धाम में
क्रिया कर्म अपने हाथों से कर देना। मैं बहुत सुख भोग चुकी हूँ
। मुझे जीवन में सब कुछ मिल चुका है। भारतीय नारी की अंतिम
इच्छा होती है कि पति के हाथों में दाह संस्कार हो । यही मोक्ष
मार्ग है । शर्मा जी सुमित्र के गले से लगा लिया । आँखों से
आंसू बहने लगे ।
जैसे वे कह रही हों- वाह भारतीय नारी तेरी जय हो तुम धन्य हो, महान
हो ।
बंटवारा
जब कभी घर आंगन का बंटवारा होता
है तो दो भाइयों के दिलों का बंटवारा हो जाता है। धन संपत्ति
माता-पिता ,भूमि,पेड़-पौधों,घर-द्वार, खलिहान,आंगन के दो
टुकड़े बीच में बने चूल्हे के दो टुकड़े हो जाते हैं । उस दिन
नये चूल्हा बनाना पड़ता है इसलिये घर में भोजन नही बन पाता
दिनभर भूखे पूरे परिवार को रहना पड़ता है
। राम एवं श्याम को
ऐसा ही भुगतना पड़ा । मान, सम्मान का बंटवारा होने से राम को बहुत
मानसिक पीड़ा हुई।
तिरपन साल पहले
पाकिस्तान भारत से अलग होकर नया देश बना था। राम के पिता
भीष्मशाह ने दुख बहुत सहा था । अब भोपाल को अपना निवास बना लिये
था। परन्तु भाई बंटवारा नका
गम था कि जाता ही नहीं था मन से । श्यामशाह ने
राजनीतिक पहुँच का फायदा उठाकर रामशाह का तबादला नये छत्तीसगढ़
राज्य के बंटवारे में करा दिया। रामशाह खुशी-शुशी तबादले में
छत्तीसगढ़ चला गया। रामशाह को पिता जी के बताये भारत पाकिस्तान
के बंटवारे की याद हो आयी । गाँव के जमींदार बड़े रोबदार
परिवार थे। यहाँ शरणार्थी बन गये थे। सरकार के रहमों करम पर जी
रहे थे। पिताजी ने बड़े परिश्रम करके का धंधा शुरू किया
था ।
बड़े सफल रहे। हम भाई बहनों को पढ़ाया लिखाया, शादी विवाह किया
और नौकरी पर लगाया । आज फिर राज्य के बंटवारे में हम दो
भाई मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में बंट गये हैं । चूल्हे के दो
टुकड़े होने से बच गये ।

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