सृजन-गाथा

रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

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अंक-4,सितम्बर, 2006   

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हलचल

भारत से......

प्रेमचंद विश्व साहित्य परिदृश्य के महानायक

साहित्यकारों ने वर्षों पहले छत्तीसगढ़ को वैश्विक पहचान दी 

डॉ.जे.आर. सोनी साहित्य भास्कर सम्मान से सम्मानित

पं. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल की स्मृतियों की गंध सदियों तक रहेगी

अमेरिका से....

अनूप भार्गव और कृष्णकुमार को प्रवासी भारतीय सम्मान

 

 

 

साहित्यकारों ने वर्षों पहले छत्तीसगढ़ को वैश्विक पहचान दी

रायपुर,भारत । छ.ग. के अनेक मूर्धन्य साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से वर्षों पहले छत्तीसगढ़ में वैश्विक-परिदृश्य की नींव रख दी थी । माधवराव सप्रे, रामदयाल तिवारी, पं.मुकुटधर पांडेय, गजानन माधव मुक्तिबोध, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, आदि साहित्यकारों ने छत्तीसगढ़ को वैश्विक पहचान दी थी । उक्त विचार देश के सुप्रसिद्ध लेखक, समालोचक डा.गंगाप्रसाद बरसैंया ने व्यक्त किये ।

 

छ.ग. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के द्वारा आयोजित विचार-गोष्ठी में प्रारंभ में वरिष्ठ साहित्यकार श्री गुप्त का शाल एवं श्रीफल से अभिनंदन किया गया । उक्त अवसर पर राज्य की प्रमुख साहित्यक संगठन, सृजन-सम्मान की ओर से प्रकाशित पुस्तकों का एक सैट देकर श्री गुप्त का सम्मान किया गया । उन्होंने छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों के राष्ट्रीय प्रदेशविषय पर अपना रोचक एवं विस्तृत व्याख्यान दिया । भारतेंदु युग में छत्तीसगढ़ साहित्य के क्षेत्र में अतिसमृद्ध रहा है । जब देश में हिंदी में तार-सप्तक निकल रहा था तब छत्तीसगढ़ में नये-स्वर का प्रकाशन हो रहा था । डा. बल्देव प्रसाद मिश्र  हिंदी में डी.लिट् करने वाले प्रथम अध्येता थे । छत्तीसगढ़ के रचनाकारों में निष्ठा और ईमानदारी गहराई तक भरी हुई है । गद्य और पद्य दोनों में छत्तीसगढ़ की रचना-परंपरा ने राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचाई है । यहाँ की रचनाएँ सभी दृष्टि से राष्ट्रीय स्तर की रचनाओं से श्रेष्ठ रहीं, किन्तु प्रकाशन के अभाव में इसका प्रचार नहीं हुआ । अब राज्य के प्रकाशन को राज्य की सीमाओं को तोड़कर देश के कोने-कोने तक पहुँचाना होगा ।

 

विशिष्ट अतिथि भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी के. एल. डे. ने अहिंदीभाषी हिंदी प्रेमियों के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि जितनी सेवा अहिंदीभाषियों ने की है कदाचित् हिंदीभाषियों ने नहीं । उन्होंने मशीनीकरण के युग में हिंदी के प्रति रुचि बरकरार रखने के उपायों पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम के अध्य़क्ष वरिष्ठ कहानीकार बच्चू जांजगिरी ने कहा कि राज्य ने प्रत्येक युग में सभी विधाओं में साहित्य का राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व किया है । उन्होंने अनेक समकालीन रचनाकारों के अतुलनीय योगदान का स्मरण किया ।

 

       व्याख्यान में राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के कार्यकारी अध्य़क्ष गिरीश पंकज, डा. मन्नूलाल यदु, विनोदशंकर शुक्ल, डा. चित्तरंजन कर, जयप्रकाश मानस, राम पटवा, डा. रामकुमार बेहार डा. जे.आर. सोनी, के.पी. सक्सेना, माधुरी कर, तपेश जैन, पी. अशोक शर्मा, लाल रामकुमार सिहं, आदेश ठाकुर आदि साहित्यकार प्रमुख रूप से उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन डा. सुधीर शर्मा ने किया ।

 

 

डॉ.जे.आर. सोनी साहित्य भास्कर सम्मान से सम्मानित

 

        रायपुर। साहित्य संगम तिरोड़ी, जिला बालाघाट मध्यप्रदेश के राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मेलन के मुख्य अत़िथि डॉ.जे.आर. सोनी, अध्यक्षता श्री पी. करैया, विशिष्ट अतिथि श्री आर.के. सूर्यवंशी थे। संस्था के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान साहित्य भास्कर सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.जे.आर. सोनी को शाल, श्रीफल स्मृतिचिन्ह, प्रशंसा पत्र देकर मेगनीज और इंडिया लिमि. तिरोड़ी के खान प्रमुख श्री पी. करैया ने सम्मानित किया । साहित्य संगम के सचिव श्री दिनेश देहाती,प्रसिद्ध कवि श्री रमेश विश्वहार एवं देश के प्रख्यात कवि, साहित्यकार, लेखक हजारों के संख्या में उपस्थित थे।

 

 

संसार में राग नहीं होने से संसार में आवागमन नहीं होता- गौतम बुद्ध

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  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः गिरीश पंकज,संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, आदेश ठाकुर चित्रकारः मृत्युंजय मिश्रा

तकनीकः प्रशांत रथ