सृजन-गाथा

रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

E-mail-srijangatha@gmail.com   

 

 

 

अंक-4, सितम्बर, 2006      

अपनी बातकविताछंदललित निबंधकहानीलघुकथाव्यंग्यसंस्मरण कथोपकथन भाषांतर संस्कार पुस्तकायन

बचपनहलचलसृजनधर्मीलेखकों सेसंपादक बनेंचतुर्दिकशेष-विशेषपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

बचप

सीताराम गुप्त के शिशुगीत

प्रेरक प्रसंग/ वाणी का महत्व/ प्रगति

बाल कविता- वर्षा का आनंद उठायें, नाना जी के आँगन में

 

 

सीताराम गुप्त के शिशुगीत

 

 

सड़क और पत्ता

 उड़ बोला पीपल का पात,

चाहूँ तो पहुँचूँ गुजरात ।

कहने को तू सड़क बड़ी

पर बरसों से यहीं पड़ी ।

बोली सड़क- न शेखी मार

मैं तो जाती कोस हजार ।

 

 

 

आज खिलादो केक

 टल्लू बात टाल देते थे,

यह आदत थी खोटी

मम्मी बोली- टल्लू बेटी,

आज टाल दो रोटी ।

टल्लू बोले- ठीक बात है,

मगर शर्त है एक ।

रोटी चाहे कल दे देना,

आज खिलादो केक ।

 

 

 

कोयल और कौवा

कौवा कोयल के घर पहुँचा,

मुझे सीखा दो गाना ।

जिससे बात-बात पर दुनिया

मुझे न मारे ताना ।

कोयल बोली- करो न चिंता ,

दुनिया से क्या डरना ।

दुनिया अपना काम करेगी,

हमको अपना करना ।

 

 

 

मुखर मेंढ़की

मुखर मेंढ़की चतुर बड़ी,

शहर घूमने निकल पड़ी ।

केले पर जो पाँव पड़ा,

बीच सड़क में फिसल पड़ी ।

 

 

।। बाल कवियों से।।

 आप अपनी बाल कविताएँ, कहानियाँ, प्रेरक प्रसंग, ज्ञानवर्धक आलेख हमें निःसंकोच भेज सकते हैं ।

हमारा पता हैः

संपादक, बचपन, सृजनगाथा, एफ-3, छ.ग.माशिम, आवासीय कालोनी, रायपुर, 492001

E-mail - Srijangatha@gmail.com

 
 

विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई विद्यालय नहीं - महात्मा गाँधी

आपकी प्रतिक्रिया

अपनी बातकविताछंदललित निबंधकहानीलघुकथाव्यंग्यसंस्मरण कथोपकथन भाषांतर संस्कार पुस्तकायन

बचपनहलचलसृजनधर्मीलेखकों सेसंपादक बनेंचतुर्दिकशेष-विशेषपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः गिरीश पंकज,संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, आदेश ठाकुर चित्रकारः मृत्युंजय मिश्रा

तकनीकः प्रशांत रथ