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इंग्लैंड की राज परम्परा और साम्राज्ञी एलिजाबेथ

प्रकाशन :मंगलवार, 1 जून 2010
लावण्या दीपक शाह

तिहास साक्षी है - जब सन 1953, 2जून  का  दिन,  इंग्लैंड केलिए बहुत बड़े बदलाव को लेकर उपस्थित हुआ था और उस ऐतिहासिक  दिन, एलिजाबेथ  को  इंग्लैंड  की महारानी घोषित कर दिया गया था

 उसके पहले सन 1947में भारत आज़ाद गणतंत्र  बनकर अपना स्वराज्यप्राप्त कर चुका था और महात्मा गांधी की नाथूराम गोडसे द्वारा  दारुण ह्त्या कर देने के पश्चात भारत में, पुन: स्थिति सामान्य होने लगी थी ।

अपनी बात कहूँ तो,  भारत से बाहरपश्चिमी गोलार्ध की यात्रा के लिए  सबसे पहली बार मैंने  सन 1974 में स्वीटज़रलैंड की  स्वीस एअर विमान सेवा  से यात्रा करते हुए यूरोपीयभूमि परझ्यूरीच  शहर मेंअपना पहला क़दम रखा था ।  

 पारदर्शक शीशे के पार,  बाहर बर्फ़ से  आच्छादित आल्प्स पर्वत श्रेणी देखकर मन में अपार आनंदहुआ । बाहर से आती शीत हड्डियों तक छू ले,ऐसी सर्द और तेज़ हवाओं केझोंकों के आगे एक क्षण के लिए रेशमी साड़ी में ढँके तन ने बेबस और असहज सा  महसूस किया था और मन को दुविधा में डालदिया था  । 

ऐसी भयानक शीत लहरी  से, मेरा  सामना, युवा जीवन में  पहली बार ही हुआ था । बंबई में जन्मे और पाले बढ़े व्यक्ति केलिए बर्फ़ से भरी जान लेवा शीत स्वप्न की तरह होती थी,जिसे इससे पहले हिन्दी फ़िल्मों में ही देखना संभव था । ठण्ड से काँपते हुए 

हम  विमान की ओर उलटे पैर भागे और भीतर अपनी सीट पर बैठने केबाद ही कुछ  राहत महसूस की थी । प्लेन जिनेवा गया जो ड़ोमेस्टिक  यानी  एक राज्य के से दूसरे राज्य तक की  भीतरी उड़ान थी ।

यात्रा का अगला पड़ाव आया ग्रेट ब्रिटेन। लन्दन शहर  काहीथ्रो एअरपोर्ट सामने था ।ख़्याल आया - अब हम महारानी एलिजाबेथ कीनगरी में अपने क़दम रख रहे हैं ।   

 लन्दन  शहर हरा-भरा है । ये एक अतिविशाल और समृध्ध नगरी है जहाँ एतिहासिक, सांस्कृतिक व कला के साथ साथकई तरह के उद्योग और व्यापारिक कंपनियों की  बड़ी-बड़ी इमारतें हैं । 

 एक सैलानी के लिए  लन्दनशहर का प्रथम दर्शनकाफ़ी रोमांचकारी अनुभव दे जाता  है और उस अनुभव पर आप कई अध्याय लिख सकते हैं ।  ब्रिट्रिश किंग्डम, इंग्लैंड वेल्स और स्कोत्लैंड की मिलीजुली संयुक्त भूमि का हिस्साहै,  जिसे 11वीं सदी के बादराज परिवार के द्वारा शासित किया जाता है । अब  साथ साथ पार्लियामेंट भी जनता के ऊपर है और प्रधानमंत्री भी हैंपर राज परिवार का दबदबा और शानो शौक़त आज भी क़ायम है । वहीं सेचली एक व्यापारी सत्ता ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में प्रवेश किया था औरमुग़ल सल्तनत के बाद भारतीय भूमि पर अपना वर्चस्व स्थापित किया था । भारत औरग्रेट ब्रिटेन इतिहास के पन्नों पर इस प्रकार एक साथ जुड़ गये थे । 

महारानीविक्टोरिया ने  अँगरेज़ों द्वारा चलायी जा रही सरकार -   ईस्ट  इंडिया कंपनी से भारत की बागडोर अपने हाथों में लेकर भारत की साम्राज्ञी बनने का ऐलान किया । तारीख थी - 1जनवरी 1877। ट्रावन्कोर के महाराज नेमहारानी के लिए भव्य हाथी दांत से बना हुआ सिंहासन भेंट किया था ।



उसी पर महारानी  विक्टोरिया विराजमान हुईं थीं ।

भारत की महारानी विक्टोरिया नेअपने सेवक अब्दुल क़रीम से हिन्दुस्तानी सीखने का प्रयास भी किया था ।

 प्रस्तुत हैं महारानी के संग्रह से प्राप्त कुछ दुर्लभचित्र 

अब्दुल करीम 

 ग्रेट ब्रिटेन की महारानी ऐलिज़ाबेथ का विवाह राजकुमार फीलीप्स के संग सन1947में हुआ था तब महात्मा गांधी नेअपने हाथों से बुनी  हुई खादी के  तागों से गुँथी एक  शॉलभेंट स्वरूप उपहार में भेजी थी देखियेचित्र ........


और अब का चित्र 

ग्रेट ब्रिटेन की महारानीऐलिज़ाबेथ  के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें ।

उनका पूरानाम था ऐलिज़ाबेथ ऐलेक्ज़ान्ड्रा मेरी । जन्म 21 अप्रेल,1926। जन्मस्थली- 17ब्रुटोन स्ट्रीट, मे फेर,  लंदन यु.क़े.( युनाइटेडकिंगडम)। पिता- प्रिंस आल्बर्ट जो बाद मेंजोर्ज 4बनकर महाराज पद पर आसीन हुए । माता- एलिजाबेथबोज़लियोन(डचेस ओफ योर्क - बाद में राजामाता बनीं)।

घर में प्यार का नाम था"लिलीबट "। उनके महल में हीइतिहासके शिक्षक सी. एह. के मार्टेन से शिक्षा जो  इटन कोलेज  के प्रवक्ता थे । धार्मिकशिक्षा आर्चबीशप ओफ केन्टरबरी से । बड़ेताऊराजाऐडवर्ड अष्टम ने जब एक  सामान्यअमरीकी नागरिक  एक विधवा,  वोलीस  सिम्प्सन सेप्रेमविवाह कर लिया तब एडवर्ड अष्टम  को इंग्लैण्ड का  राजपाट छोडना पड़ा था । तब ऐलिज़ाबेथ के पिता सत्तारुढ हुए, 13वर्ष की उम्र में । द्वीतीय विश्व युद्धके समय  बी.बी.सी. रेडियो कार्यक्रम ‘1घँटा बच्चों का’में अन्य बच्चों को अपने  प्रसारित कार्यक्रम सेएलिजाबेथ  ने  हिम्मत बँधाई थी । बर्कशायर, वींडज़र महल में,  युद्ध के दौरान निवास किया था, जहाँभावी पति राजमुमार फीलिप से  उनकी मुलाक़ात हुई । जोउसके बादनौसेना सेवा में चले गये और राजकुमारी उन्हें पत्र लिखतीं रहीं । उन्हें राजकुमार से जोप्रेम हो गया था । 1945में, नंबर  230873  का सैनिक क्रमांक  उन्हें  मिला था । 1947  मे पिता के साथ दक्षिण अफ्रीका, केप टाउन शहर की यात्रा की औरदेश भक्ति से रेडियो प्रसारण किया । 20नवम्बर, 1947में ड्यूक ओफ ऐडीनबरा, जिनका पूरा नाम है, कुँवरफीलिप ( डेनमार्क व ग्रीस के  )। इस राजकुंवर  से भव्य विवाहसमारोह में नाता स्थापित हुआ । 1948में प्रथम संतान, पुत्र चार्ल्स का जन्म । 1950में कुमारी ऐन का जन्म,1960में कुमार ऐन्ड्रु जन्मे,1964में कुमार ऐडवर्ड चौथी और अंतिम सँतानका जन्म हुआ । 1951तक ‘माल्टा’में भी रहीं जहाँ फीलिप सेनामें कार्यरत थे । 6फरवरी,1952को आफ्रीका के केन्या शहर पहुँचे, जहाँके ट्रीटोप होटेल ‘ठीका’ में (नैरोबी शहर से 2घंटे की दूरी पर)ठहरे थे । वहाँउन्हें बतला गया कि उनके पिता  की ( नींद में) रात्रि को  मृत्यु हो गईहै सो, जो राजकुमारी पेडों पर बसे होटल पर चढीं थीं वे रानी बनकर उतरीं । भव्य समारोह 2जून, 1952को वेस्ट मीनीस्टर ऐबीमें सम्पन्न हुआ जब वे धार्मिक रीति-रिवाज से ब्रिटेन की महारानी के पद परआसीन हुईं 

 

विश्व का सबसे बड़ा हीरा ‘कुलियन’जो  530केरेट वजन का  है महारानी एलिजाबेथ के स्केप्टर में लगा  हुआ है  और भारत से इंग्लैंड पहुँचा दिया गया कोहिनूर हीरा विश्व का सबसे विशाल हीरा हैजिसे एलिजाबेथ की माता ने अपने मुकुट में जड्वाकर पहना था ।  

कोहिनूर की चमक दमक आजभी ही बक़रार है। 2010 आ पहुँचा है और इंग्लैंड के राज सिंहासन पर एलिजाबेथ आज भी शान से विराजमान हैं परंतु आज उनका परिवार कई बदलावों से गुज़र चुका है और ना सिर्फ़ इंग्लैंड में बल्कि संसार भर में अब कई नयी प्रमुख व्यक्तियों के नाम मशहूर हो चुके हैं जैसे बिल गेट्स ! संसार के सबसे धनिक ! 

संसार का समय चक्र अपने नये दौर से गुज़र रहा है...........

फिर मिलेंगें ........जय हिंद ।


 
         
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