संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com

अपनी बातकविताछंदललित निबंधकहानीलघुकथाव्यंग्यसंस्मरण कथोपकथन भाषांतरसंस्कारपुस्तकायन

बचपनहलचलसृजनधर्मीलेखकों सेसंपादक बनेंचतुर्दिकशेष-विशेषपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

हलचल

भारत से

लघुकथा पर राष्ट्रीय विमर्श रायपुर में

राष्ट्रीय पुरस्कारों हेतु रचनाकारों से प्रविष्टियाँ आमंत्रित

भाषा विकास का सशक्त माध्यम- संस्कृति मंत्री

जर्मनी से

हिंदी की मिठास अब जर्मनी में गूंजेंगी 

 
 

भाषा विकास का सशक्त माध्यम- संस्कृति मंत्री

 

        रायपुर । छत्तीसगढ़। महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी में  अपने वक्तव्य में संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवान ने कहा कि चीन और जापान का विकास वहाँ की भाषा के कारण हुआ है । आज हिंदी विश्व की भाषा वन सकती है। इसके लिए देश में राष्ठ्रियता की भावना को जागृत करने के लिए हिंदी भाषा का विकास आवश्यक है । इस कार्यक्रम में राजधानी सहित बिलासपुर, दुर्ग राजनांदगांव जिले के भी गणमान्य साहित्यकार, पत्रकार उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृति विभाग के अधिकारियों द्वारा आमंत्रित अतिथियों एवं वक्ताओं को पुष्पगुच्छ से सम्मानित किया गया । संगोष्ठी को मुख्यतः तीन विषयों पर केंद्रित किया गया था । कार्यक्रम की शुरुआत विश्व परिवेश पर हिंदी, जिसके वक्ता सद्-भवना दर्पण के सम्पादक गिरीश पंकज ने अपने विदेश प्रवास के अनुभवों के आधार पर बताया कि विश्व में आज हिंदी भाषा की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है और हिंदी भाषा ने विश्व में आज अपना द्वितीय स्थान भी बना लिया है। इसी विषय को नया स्वरुप प्रदान करते हुए सृजनगाथा डॉट कॉम के संपादक श्री जयप्रकाश मानस द्वारा 'अंतरजाल पर हिंदी का दुनिया' विषय पर अपना ज्ञानवर्द्धक शोधपूर्ण आलेख ा वाचन किया । उन्होंने अंगरेज़ी के बिना भी अंतरजाल पर हिंदी कम्प्यूटिंग और हिंदी लेखन खासकर छत्तीसगढ़ में हो रहे कार्यों पर व्यापक विमर्श किया ।

 

         दूसरा विषय शासकीय कामकाज की भाषा हिंदी पर वरिष्ठ साहित्यकार व पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा द्वारा 50 वर्म प्रशासनिक हिंदी पुस्तक के संदर्भ का वर्ण करते हुए वर्तमान में प्रशासनिक कोश की आवश्यकता पर बल दिया । जिसका निर्माण किया जाना आवश्यक है, साथ ही उन्होंने मध्यप्रदेश और राजस्थान के संस्कृति विभाग से प्रकाशित होने वाले हिंदी साहित्यिक पत्रिका की तरह छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग से भी एक हिंदी की साहित्यिक पंत्रिका का प्रकाशन किए जाने का सुझाव दिया ।

 

        इसी विषय को आगे बढ़ाते हुए सचिव, स्कूल शिक्षा सी.के खेतान ने अपने वक्तव्य में कहा कि राज्य शासन द्वारा कम्प्यूटर की खरीदी से संबंधित निविदा शर्तें भी होना चाहिए कि आपूर्तिकर्त्ता कम्प्यूटर प्रदान करने के साथ ही हिंदी का साफ्टवेयर भी प्रदाय करे । इस तरह निविदा शर्त रखने वाला छत्तीसगढ़ राज्य देश का पहला राज्य होगा । इससे हिंदी में कार्य करने की नई सुविधाएं उपल्ब्ध हो सकेंगी ।

 

        तीसरा विषय समाचार की बदलती भाषा पर छत्तीसगढ़ हिंदी ग्रथ अकादमी के संचालक व वरिष्ठ पत्रकार श्री नैय्यर ने कहा कि पत्रकारिता में बाजार की भाषा बोली जाती है जैसे-ऑल इंडिया र्डियो अर्थात आकाशवाणी में ऐसी ही भाषा को आज अपनाया गया है। हिंदी साहित्य पर बोलते हुए उन्होने कहा कि जैसे बोले वैसा लिखे का अनुपालन न कर पाने के कारण ही हिंदी साहित्य आज नहीं बिक पा रहा है और उसके पाठक भी काम होते जा रहे हैं, इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि साहित्यकार वो नहीं लिखता जो बोला जाता है। गोष्ठी का समापन डॉ. तपेश गुप्ता के आभार प्रदर्शन के साथ किया गया । कार्यक्रम का संचालन संस्कृति विभाग के प्रकाशन अधिकारी श्री राम पटवा ने किया ।

 

 

हलचल

चींटी से अच्छा कोई उपदेश नहीं देता और वह मौन रहती है - फ्रैंकलिन

आपकी प्रतिक्रिया   

अपनी बातकविताछंदललित निबंधकहानीलघुकथाव्यंग्यसंस्मरण कथोपकथन भाषांतरसंस्कारपुस्तकायन

बचपनहलचलसृजनधर्मीलेखकों सेसंपादक बनेंचतुर्दिकशेष-विशेषपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः गिरीश पंकज,संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा चित्रकारः मृत्युंजय मिश्रा

तकनीकः प्रशांत रथ

Google
WWW http://www.srijangatha.com