
तेजेन्द्र
शर्मा
हम ब्रिटेन में बसे हिंदी के वरिष्ठ
कहानीकार और हिंदी सेवी श्री तेजेन्द्र शर्मा का विशेष आभार मानना
चाहते हैं जिन्होंने तेज़ भागती ज़िंदगी के कुछ ख़ास लमहों को
सृजनगाथा के नाम किया और ब्रिटेन के विभिन्न शहरों में बसे हिंदी
के सक्रिय रचनाकारों को संपर्क किया । उनसे इस प्रवासी कविता
विशेषांक के लिए रचनाएँ जुटायीं
।
तेजेन्द्र शर्मा का विस्तृत परिचय जानने के लिए
क्लिक कीजिए यहाँ-
परिचय

टेम्स का पानी
टेम्स का पानी,
नहीं है स्वर्ग का द्वार
यहाँ लगा है,
एक विचित्र माया बाज़ार!
पानी है मटियाया,
गोरे हैं लोगों के तन
माया के मकड़जाल में,
नहीं दिखाई देता मन!
टेम्स कहाँ से आती है,
कहाँ चली जाती है
ऐसे प्रश्न हमारे मन में नहीं जगा पाती है !
टेम्स बस है ! टेम्स अपनी जगह बरक़रार है !
कहने को उसके आसपास कला और संस्कृति का संसार है !
टेम्स कभी खाड़ी है तो कभी सागर है
उसके प्रति लोगों के मन में,
न श्रध्दा है न आदर है!
बाज़ार संस्कृति में नदियाँ,
नदियाँ ही रह जाती हैं
बनती हैं व्यापार का माध्यम,
माँ नहीं बन पाती हैं !
टेम्स दशकों,
शताब्दियों तक करती है गंगा पर राज
फिर सिक़ुड़ जाती है,
ढूँढती रह जाती है अपना ताज!
टेम्स दौलत है,
प्रेम है गंगा;
टेम्स ऐश्वर्य है भावना है गंगा
टेम्स जीवन का प्रमाद है,
मोक्ष की कामना है गंगा
जी लगाने के कई साधन हैं टेम्स नदी के आसपास
गंगा मैय्या में जी लगाता है,
हमारा अपना विश्वास!
पत्तों ने ली अंगड़ाई है....
पत्तों ने ली अंगड़ाई है
क्या पतझड़ आया है?
इक रंगोली बिखराई है
क्या पतझड आया है?
रंगों की जैसे नई छटा
है छाई सभी दरख़तों पर
पश्चिम में जैसे आज पिया
चलती पुरवाई है
क्या पतझड़ आया है ?
पत्तों ने कैसे फूलों को
दे डाली एक चुनौती है
सुंदरता के इस आलम में
इक मस्ती छाई है
क्या
पतझड़ आया है
?
कुदरत ने देखो पत्तों को
है एक नया परिधान दिया
दुल्हन जैसे करके श्रृंगांर
सकुची शरमाई है
क्या
पतझड़ आया है
?
पत्तों ने बेलों ने देखो
इक इंद्रधनुष है रच डाला
वर्षा के इंद्रधनुष को जैसे
लज्जा आई है
क्या
पतझड़ आया है
?
नारंगी,
बैंगनी, लाला सुर्ख़
कत्थई,
श्वेत भी दिखते हैं
था बासी पड़ ग़या रंग हरा
मुक्ति दिलवाई है
क्या
पतझड़ आया है
?
कोई वर्षा का गुणगान करे
कोई गीत वसंत के गाता है
मेरे बदरंग से जीवन में
छाई तरूणाई है
क्या
पतझड़ आया है
?
पुतला ग़लतियों का... ...
ग़लतियाँ किये जाता हूँ मैं
हर वक्त
ग़लतियाँ ही ग़लतियाँ
कोई सहता है,
कोई होता है परेशान
फिर भी मुझ पर करता है अहसान
क्योंकि मैं बाज़ नहीं आता
और किये जाता हूँ ग़लतियाँ ।
ग़लतियाँ करना फ़ितरत है मेरी
आम तौर पर
माफ़ी मांगने में हो जाती है देरी
अभी पहली से निजात नहीं पाता
कि कर बैठता हूँ एक और
क्योंकि इन्सान नहीं हूँ मैं
मैं हूँ एक पुतला
ग़लतियों का।
कुछ को रहती है ताक
पकड़ने को ग़लती मेरी
फंसती है मछली जब
हो जाते हैं बेचैन
करने को मेरा दामन चाक
कहते हैं मुझे नकारा
मैं देखता रह जाता हूँ बेचारा
क्योंकि करता हूँ मैं ग़लतियाँ।
कुछ वो भी हैं,
जो हैं मेरे अपने
जिनके संग मैने देखे हैं सपने
अपेक्षाओं पर उनकी
कभी न उतरा खरा
रहा हमेशा ही डरा डरा
उनकी दहश्त सदा डराती है
और मुझसे ग़लतियाँ करवाती है।
आजकल शेरी ब्लेयर को….
आजकल शेरी ब्लेयर को
अच्छी नींद आती है
खूब आराम होता है,
क्योंकि;
टोनी ब्लेयर के सपनों मे तो
सद्दाम होता है ।
अब उसे सौत का कोई डर नहीं
नहीं किसी गर्ल फ्रेन्ड का लफडा है
उसके पति का सारा समय
जॉर्ज बुश के साथ तमाम होता है
क्योंकि टोनी ब्लेयर के सपनों में तो सद्दाम
होता हैं ।
कभी कभी शेरी ब्लेयर होती है हैरान
उसका पति तो प्रधानमन्त्री था
ब्रिटेन का
फिर अमरीका के विदेश मन्त्री जैसा
क्यों काम होता है
क्योंकि टोनी ब्लेयर के सपनों में तो सद्दाम
होता हैं ।
टोनी ब्लेयर बात-बात में
' झाड़ी
'
में क्यों घुस जाता है
बुश को मिलने का बहाना ढूँढ
अटलांटिक पार कर जाता है
सुबह शाम बस उसको ही
सलाम होता है
क्योंकि टोनी ब्लेयर के सपनों में तो सद्दाम
होता हैं ।
हिरोशिमा में बम्ब बरसाने वाला
भी सद्दाम था
विएटनाम में मुँह की खाने वाला
भी सद्दाम था
तानाशाहों को शह देने वाला
भी सद्दाम था
झूठ बोलने वालों का
बस यही अंजाम होता है
क्योंकि टोनी ब्लेयर के सपनों में तो सद्दाम
होता हैं ।
भ्रष्टाचार, बेरोजगारी
और महंगाई से क्या डरना
इनकी मार से तो
आम जनता को ही है मरना
राजनेता को गरीब की समस्याओं से
भला क्या काम होता है
क्योंकि टोनी ब्लेयर के सपनों में तो सद्दाम
होता है ।
टोनी ब्लेयर उठो
ब्रिटेन की अस्मिता को पहचानो
अपने देश के इतिहास को जानो
यहाँ सूर्य कभी अस्त नहीं होता था
क्या सूर्यास्त का अर्थ गहरी अंधेरी शाम होता
है?
क्योंकि टोनी ब्लेयर के सपनों में तो सद्दाम
होता हैं ।
