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तेजेन्द्र शर्मा के नेपाली कहानी संग्रह पासपोर्ट का रङहरू का विमोचन


     (वीरेन्द्र कुंवर की रिपोर्ट)

 

लंदन । ब्रिटेन ।। लंदन स्थित नेपाली साहित्य विकास परिषद, यू.के.  ने हाल ही में पश्चिम लंदन के एक्टन क्षेत्र में स्थित क्वीन्सलैंड कालेज के सभागार में नेपाली के महाकवि  लक्ष्मी प्रसाद देवकोटा की 98वीं जन्म जयन्ती बहुत उत्साह-पूर्वक मनाई। आयोजन के दौरान यू.के. के प्रख्यात हिन्दी कथाकार एवं कथा यू.के. के महासचिव तेजेन्द्र शर्मा के कहानी संग्रह पासपोर्ट का रङहरू का विमोचन भी किया गया। पुस्तक का विमोचन करते हुए प्रमुख अतिथि यति संस्था के केन्द्रीय अध्यक्ष चिरंजीवी ढकाल ने कहा,विलियम शेक्सपीयर की जन्मस्थली में हिन्दी के प्रखर ब्रिटिश कहानीकार तेजेन्द्र शर्मा के नेपाली में अनूदित कथा संग्रह पासपोर्ट का रङहरू का विमोचन करके हम अपने महाकवि देवकोटा को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।  हमारे लिये यह एक राष्ट्र-महत्व का अवसर है।

 

        कार्यक्रम की शुरूआत में महाकवि देवकोटा के चित्र पर माल्यार्पण कर प्रमुख व्यक्तियों द्वारा पुष्प अर्पित किये गये। नेपाली साहित्य विकास परिषद, यू.के. के संस्थापक एवं महासचिव श्री सुरेश जंग शाह ने तेजेन्द्र शर्मा की कहानियों का परिचय देते हुए कहा इन कहानियों का अनुवाद टिहरी, नेपाल के श्री कुमुद अधिकारी ने किया है। तेजेन्द्र शर्मा की कहानियों में ग़ज़ब की पठनीयता है। यह कहानियाँ आम आदमी की ज़िन्दगी से जुड़ी हैं और हमें अपनी स्वयं की कहानियां लगती हैं। कहानियाँ ब्रिटेन एवं भारत दोनों देशों के जीवन को चित्रित करती हैं। कार्यक्रम का संचालन स्वयं श्री सुरेश जंग शाह ने ही किया।

 

        तेजेन्द्र शर्मा ने नेपाली साहित्य विकास परिषद, यू.के. एवं श्री सुरेश जंग शाह को अपनी पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम आयोजित करने के लिये धन्यवाद दिया। तेजेन्द्र शर्मा ने आगे कहा, यहां लंदन में हिन्दी कहानियों के नेपाली अनुवाद का विमोचन दो पड़ोसी देशों के सम्बन्धों में प्रगाड़ता का प्रतीक है। मैं जब ब्रिटेन में बसे दक्षिण एशियाई मूल के लेखकों के लेखन पर निगाह डालता हूँ, तो पाता हूँ कि वे नॉस्टेलजिया के शिकार हैं। वे अपने आसपास के माहौल के प्रति निर्लिप्त से दिखाई देते हैं। हमें अपने आसपास के माहौल को समझना होगा, उसे महसूस करना होगा, और अभिव्यक्ति देनी होगी। तभी हमारे मूल देश के पाठक एवं आलोचक हमारे साहित्य का सही मूल्याँकन कर पायेंगे, और हम वृहत ब्रिटिश साहित्य का हिस्सा बन पायेंगे।

        संस्था के सह-अध्यक्ष श्री होम परिवाग ने तेजेन्द्र शर्मा को बधाई देते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि इस प्रकार के अन्य प्रोजेक्ट भी हमें करने होंगे। अधिक से अधिक पुस्तकों का आपस में अनुवाद आवश्यक है ताकि दोनो भाषाओं के पाठकों का एक दूसरे के साहित्य से परिचय हो सके।

 

        महाकवि को श्रद्धांजलि के रूप में एक कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया जिसमें रूमा वसन्त रायक्षेत्री, वीरेन्द्र कुंवर, कोमल प्रसाद, श्रेष्ठ मल्ल, ईश्वर प्रसाद मान्नधर, प्रेरणा थापा, चांदनी ढखल, होम परिवाग एवं सुरेश जंग शाह ने करतल ध्वनियों के बीच अपनी कविता एवं गीत पाठ किया। संस्था के पूर्व-अध्यक्ष डा. राघव प्रसाद, एवं सुरेश जंग शाह ने नेपाल की राजनीतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्थितियों पर भी चर्चा की।

 

 

 

 

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