मनोज भावुक को भारतीय भाषा परिषद सम्मान
कोलकाता । भारत ।।
ब्रिटेन में प्रवासी और
भोजपुरी के युवा कवि मनोज भावुक
को उनके भोजपुरी ग़ज़ल संग्रह (तस्वीर ज़िंदगी के) के लिए
भारतीय भाषा परिषद सम्मान से नवाज़ा
है । सम्मान की श्रृंखला में यह पहली बार है जब किसी
भोजपुरी साहित्य
को यह सम्मान मिला है । उन्हें सम्मान प्रदान किया ठुमरी
साम्राज्ञी गिरिजा देवी और सिने जगत के नामी
फ़िल्मकार और गीतकार गुलज़ार ने । मनोज भावुक की रचनाओं के
बारे में टिप्पणी करते हुए भारतीय भाषा परिषद के
मंत्री डॉ. कुसुम खेमानी ने कहा,
"मनोज
भावुक सुदूर युगांडा और अब लंदन में रहते
हुए भोजपुरी में लिख रहे हैं । उनकी कविताएँ पौधे की तरह
लोक जीवन की धरती पर पनपीं
हैं और अपना जीवन रस वहीं से प्राप्त कर रही हैं ।
युवा कवि
सामाजिक सरोकारों को भोजपुरी के ठेठ मुहावरों में मुखरित
करते हैं । उन्होंने कहा कि
भारतीय भाषा परिषद मनोज भावुक को सम्मानित करते हुए
गौरवान्वित है ।" इस अवसर पर युवा कवि मनोज भावुक ने भी
सभा को अपने संबोधन में कहा,
"दरअसल
यह भोजपुरी भाषा और साहित्य
का सम्मान है. साथ ही यह उन करोड़ों भोजपुरी भाषियों का भी
सम्मान है, जो देश-विदेश
में रहते हुए भी भोजपुरी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते
हैं ।"
इस भावुक क्षण में ब्रिटेन के प्रवासी कवि मनोज अपने
बाबूजी श्री रामदेव सिंह,
माँ श्रीमती सुनैना देवी और
गुरु आचार्य पांडेय कपिल और कविवर जगन्नाथ समेत कई वरिष्ठ
साहित्यकारो को भी याद
किये बिना नहीं रह सके ।