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कविता |
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वैयक्तिकता कोपले फूटना चाहती है वैयक्तिक्ता की अखबार किताबें मर्चे व समीक्षाएँ खबरे अभिप्राय की वर्षा अकेले आदमी को अकेले न होने का अहसास दिलाते है सब के सब
कैनवास या काँच के चुक्ड़ो पर अकिंत दृश्य। चमकवे चेहरे भावनाओं । सवेदनाओं के उच्चतम शिखर तकक किसी को रोकने का विशेषाधिकान नहीं हैं आदमी को आदमी होने के विशिष्ट अधिकार से वचिंत नहीं है
वृद्धिजीवियों की अपलब्धियो से ज्यादा मौलिक है भीड़ से हटकर । आदमी का आदमी होने का अहसास
233/ई.,रिसाली सेक्टर भिलाई नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़.)
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