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हाइकु |
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गरीबीः 20 हाइकु
1 मैले कुचैले वस्त्र पहने हुए मिली गरीबी 2 चुप्पी सी साधे खोया सोया सा मिला था फुटपाथ 3 शरीर पर छाले थे गरीबी के बहुत सारे 4 दुखों की बस्ती आँसू की नगरी में बसा गरीब 5 परिश्रम ही सदा से गरीब का जीवन साथी 6 बहुत रंग पानी के, गरीब का भूख है रंग 7 चारों तरफ अन्न नहीं खेतों में है भुखमरी 8 जीना बेहाल सूखे पड़े हैं ताल पड़ा अकाल 9 ना जला चूल्हा धूप है नदारद गीली लकड़ी 10 गरीब बच्चा रोटी के चक्कर में कुचला गया 11 फटी रजाई ये मत पूछो कैसे सर्दी बिताई 12 सर्द हवा में ठिठुरता बदन काँपते होंठ 13 बरसात में फटी छतरी तानें लौट रहे हैं 14 वो था अंजान क्यूं छिना बचपन था परेशान 15 शोषण वहाँ मजदूर हैं बच्चे फूल से जहाँ 16 छोड़ो ना तुम यूँ आस का दामन होगा सबेरा 17 गया विदेश होगी कोई उसकी मजबूरी ही 18 हवा जो आई परदेशी लौट आ संदेशा लाई 19 छूटा जो देश देख विदेशी रंग बदले ढ़ंग 20 देश बेगाना लूटती पुलिस भी कैसा ज़माना
Kampala, Uganda
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