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एक शब्द |
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एक शब्द |
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तोड़ना डॉ. गंगाप्रसाद बरसैया सामान्यतः तोड़ने का अर्थ किसी चीज़ के एक से अधिक टुकड़े करना से होता है पर यह सिद्धान्त हर जगह लागू नहीं होता । जब इसका संबंध किसी के दिल से होता है और दिल तोड़ दिया जाता है तो वहाँ निराशा की भावना प्रमुख हो जाती है - ऐसा कहकर आपने हमारा दिल तोड़ दिया। इसी का निकटवर्ती शब्द मन तोड़ना भी है। लेकिन जब कोई किसी परम्परा को तोड़ता है तो उसे मर्यादा तोड़ना या लीक तोड़ना कहा जाता है। ‘लीक तोड़ तीनउ चलैं, शायर, सिंह,सपूत।’ फल-फूल तोड़ना तो मामूली बात है, पर दीवाल तोड़ने के विशेष अर्थ हैं । दीवाल तोड़ना यानी अलगाव समाप्त करना । दीवारें आदमी की, देश की धर्म की, जाति की किसी की भी हो सकती है। पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के बीच की दीवाल तोड़कर लोगों ने जोरों का उत्सव मनाया। दीवार तोड़ना और मेड़ तोड़ना एक ही बात नहीं है। व्यापार बदल करके उसने परिवार की लीक तोड़ दी। यह मेड़ कई प्रकार की हो सकती है। घर की, परिवार की, खेत की, परम्परा की लेकिन हड्डी-पसली की बात ही दूसरी है। बुखार शरीर तोड़ता है, दुश्मन हड्डी तोड़ता है और मित्र या रिश्तेदार संबंध तोड़ता है। यहाँ हर तोड़ने का आशय अलग है। दुश्मन के शरीर तोड़ने और बुखार के शरीर तोड़ने की न एक सी भावना है, न एक सी पीड़ा। संबंध कोई वस्तु नहीं है जिसे टुकड़ों में बाँट दिया जाय। संबंध में भावना अधिक है, आत्मीयता और निकटता है।
धनुष तोड़ना भी एक मुहावरा है। जब से राम ने जनक का धनुष तोड़ा तब से किसी काम के होने या समस्या का समाधान होने पर इसका प्रयोग किया जाता है। किसी विवाद पर समझौता होने पर लोग कहते हैं - चलो, धनुष टूटा। झंझट खतम हुई। यह धनुष तो बड़े भैया ही तोड़ सकते हैं अर्थात् हर समस्या का समाधान हर कोई नहीं कर सकता। कोई योग्य व्यक्ति ही निपटा सकता है। यहाँ समस्या के समाप्त होने या काम होने की भावना है।
कुछ लोग संकल्प तोड़ते हैं, प्रतिज्ञा तोड़ते हैं और कुछ लोग कलम तोड़ते हैं। संकल्प या प्रतिज्ञा का मतलब है कोई निश्चय करना। संकल्प है कि बेटी का विवाह होने पर ही बेटे का विवाह करेंगे, पर ऐसी परिस्थिति बनी कि उसे तोड़ना पड़ा। अर्थात जो सोचा था वह पूरा न हो पाया। कलम तोड़ने में ऐसा नहीं होता। किसी को फाँसी की सजा सुनाने वाला न्यायाधीश फैसला लिखने के बाद उस कलम को तोड़ देता है जिससे फैसला लिखा गया है। भावना यह है कि यह कलम हिंसक हैं, उसे रखना ठीक नहीं । यह शुभ नहीं है। यद्यपि इसमें कलम को कोई दोष नहीं है। फैसला करना और लिखना तो न्यायाधीश का काम है। लेकिन जब कोई कवि या लेखक कोई बहुत अच्छी रचना लिखता है तो उसको शाबाशी देते हुए कहते हैं - वाह बंधु ! क्या रचना लिखी है। एकदम कलम तोड़ दी । यहाँ कलम तोड़ना सुखद और सराहनीय है। दोनों के प्रयोग में ज़मीन-आसमान का अंतर है।
आसमान से तारे तोड़ना अर्थात असंभव कार्य करना । शेर के दाँत तोड़ना भी इसी का सहोदर है लेकिन किसी का तोड़ ढूंढना एकदम अलग बात है, जिसे.काट करना भी. कहते हैं। उसकी यह चाल दुश्मन की जबर्दस्त तोड़ बनेगी । महाभारत में तो कितने ही चक्रब्यूह तोड़े गये। लोग अपने जीवन में भी समस्याओं के चक्रव्यूह तोड़ते रहते हैं । लेकिन किसी के हाथ-पाँव तोड़ना अच्छी बात नहीं कही जा सकती। रिकार्ड तोड़ने पर तो गिनीज़ बुक में नाम लिखा जाता है। उससे लोग गौरवान्वित होते हैं, परन्तु कमर तोड़ने पर तो घर ही बैठकर रह जाते हैं। इस साल के सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी। मंहगाई ने कमर तोड़ दी आदि का प्रयोग प्रायः किया जाता है। मंहगाई द्वारा कमर तोड़ने का अर्थ अभिधात्मक नही, व्यंगात्मक है। अर्थात परेशानी में डाल दिया । कई काम रूक गये । आजकल पूरा देश तोड़-फोड़ से परेशान है। यह तोड़-फोड़ व्यक्ति के जीवन में हो या समाज में या देश में बहुत दुखद होती है। बच्चों की तोड़-फोड़ में बालक्रीड़ा का भाव है, पर गुंडों हिंसकों की तोड़फोड़ में विनाश होता है। सभी को परेशानी होती है। कुछ लोग पत्थर से अपना सिर तोड़कर मूर्खता का प्रदर्शन करते हैं। पत्थर से टकराना कोई बुद्धिमानी नहीं है। कुछ लोग वायदा तोड़ने को बड़ा सरल मानते हैं जबकि यह अच्छा नहीं माना जाता। जो वायदा किया जाये उसे निभाना ही चाहिए अन्यथा सामने वाले को परेशानी होगी। यह एक प्रकार का धोखा है। कई लोग शादी-विवाह में सहयोग का वायदा करके ऐन मौके पर गायब हो जाते है। या मना कर देते हैं। कुछ लोग शादी तोड़ देते हैं।
प्रेम का धागा बड़ा बारीक होता है, कई बार दिखाई नहीं देता, पर यदि उसे तोड़ दिया जाये तो प्रेमियों को बड़ी पीड़ा होती है। इसीलिये कहा गया है कि प्रेम का धागा तोड़ना नहीं चाहिये, बल्कि यथासंभव और मजबूत करना चाहिए। क्योंकि किसी कारण यदि प्रेम का धागा तोड़ दिया गया तो मन में खरोंच लग जाती है, गाँठ पड़ जाती है। रहीम ने कहा था- ‘रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय । जोरे से फिर जुरै नहीं, जुरे गाँठ परि जाय।’ इसलिये जहाँ तक संभव हो सभी को तोड़-फोड़ से बचना चाहिए।
एम.आई.जी-12, चौबे कॉलोनी, छतरपुर, मध्यप्रदेश
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