श्रेणियाँ

भारत स्तुति

प्रकाशन :सोमवार, 6 फरवरी 2012
रोहित रूसिया
मेरे देश तुझको ,मेरा नमन
कितनी सुहानी धरती तेरी ,
पावन तेरा गगन।

मंत्रों सी पावन धरती है,
सबका अभिनन्दन करती है,
जीवन की सांसे हैं सबमें ,
जड़ हो या चेतन .........

पवन तेरी है चंचल –चंचल ,
गीत सुनाये मंगल- मंगल ,
हर मौसम खुशियों का मौसम,
पतझड़ या सावन ........

खिलती हुई कली ना तोडें ,
अपनों को अपनों से जोड़ें ,
महकाना है उपवन अपना ,
अपना ये आँगन .........

ना हो भाषा राग-द्वेष की,
बोली मीठी प्रेम-देश की,
लोभ,निराशा,स्वार्थ,तिकड़में,
आज करें तर्पण .........

अपना देश है अपना साथी ,
जैसे एक दीया और बाती,
चलो किरण बन जाएँ हम तुम,
दुनिया हो रोशन ........

  रोहित रूसिया
छिन्दवाड़ा ( म.प्र .) 09329895666
rohitkalyaan@gmail.com
 
         
Bookmark and Share
टिप्पणी लिखें
 
वाक्यांश खोजें




Bing


Site Search Site Search
लेखागार (Archive)
लेखक की प्रविष्टियाँ

RoboForm: Learn more...