मेरे देश तुझको ,मेरा नमन
कितनी सुहानी धरती तेरी ,
पावन तेरा गगन।
मंत्रों सी पावन धरती है,
सबका अभिनन्दन करती है,
जीवन की सांसे हैं सबमें ,
जड़ हो या चेतन .........
पवन तेरी है चंचल –चंचल ,
गीत सुनाये मंगल- मंगल ,
हर मौसम खुशियों का मौसम,
पतझड़ या सावन ........
खिलती हुई कली ना तोडें ,
अपनों को अपनों से जोड़ें ,
महकाना है उपवन अपना ,
अपना ये आँगन .........
ना हो भाषा राग-द्वेष की,
बोली मीठी प्रेम-देश की,
लोभ,निराशा,स्वार्थ,तिकड़में,
आज करें तर्पण .........
अपना देश है अपना साथी ,
जैसे एक दीया और बाती,
चलो किरण बन जाएँ हम तुम,
दुनिया हो रोशन ........

कितनी सुहानी धरती तेरी ,
पावन तेरा गगन।
मंत्रों सी पावन धरती है,
सबका अभिनन्दन करती है,
जीवन की सांसे हैं सबमें ,
जड़ हो या चेतन .........
पवन तेरी है चंचल –चंचल ,
गीत सुनाये मंगल- मंगल ,
हर मौसम खुशियों का मौसम,
पतझड़ या सावन ........
खिलती हुई कली ना तोडें ,
अपनों को अपनों से जोड़ें ,
महकाना है उपवन अपना ,
अपना ये आँगन .........
ना हो भाषा राग-द्वेष की,
बोली मीठी प्रेम-देश की,
लोभ,निराशा,स्वार्थ,तिकड़में,
आज करें तर्पण .........
अपना देश है अपना साथी ,
जैसे एक दीया और बाती,
चलो किरण बन जाएँ हम तुम,
दुनिया हो रोशन ........
रोहित रूसिया
छिन्दवाड़ा ( म.प्र .)
09329895666
rohitkalyaan@gmail.com
rohitkalyaan@gmail.com


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