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डॉ. एम. एस. परिहार के छह गीत

प्रकाशन :शनिवार, 1 मई 2010
महाराज सिंह परिहार
जबसे तुमने किया किनारा
टूट गया मेरा इकतारा
साँस-साँस में कम्पन होती
मिटा भाग्य का आज सितारा

हमने तुमने स्वप्न बुने थे
चांद सितारे भी अपने थे
साथ रहेंगे साथ चलेंगे
एक दूजे के लिए बने थे

मधुर मिलन की बंशी बजती
ख़ुशियाँ रोज़ द्वारे झरती
सोना सा लगता था वह दिन
उपवन में जब भी तुम मिलती

सूरज भी हमसे जलता था
चंदा भी नित-नित गलता था
फूलों की मुस्कानें रोती
हाथ भँवरा भी मलता था

मैंने तुमसे प्रीत बढ़ाई
तुम भी मंद मंद मुस्काई
अम्बर धरती लगा चूमने
रजनीगंधा भी इठलाई

आज बिखर गये सपने सारे
बदल गये नदिया के धारे
अलगावों के बादल छाये
बदल गये अब मीत हमारे

तेरे रूप का रहा पुजारी
लेकिन तुम निकली पाषाणी
होम दिया अपने को तुम पर
रूप नगर की ओ महारानी

तुमने अपने पथ को मोड़ा
गैरों से अब रिश्ता जोड़ा
प्यार मिला नफ़रत पीऊँगा
यादों में तेरी जीऊँगा
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  महाराज सिंह परिहार
48विनय नगर, शाहगंज आगरा-281010
मो.- 9411404440
pariharms57@gmail.com
 
         
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