सृजनगाथा  

रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

 

E-mail:Srijangatha@gmail.com

प्रवेशांक, जून, 2006

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नीम का पेड़

 

पेड़ बड़ा अलबेला है

कड़वा और कसैला है ।

यदा देता है शुध्द हवा,

शीतल छाया और दवा।

हरी भरी है डाल घनी,

टहनी से दातौन बनी।

और पात का धुआँ जहाँ,

कीट पतंग वहाँ कहाँ ।

पेड़ किन्तु है बड़ा हकीम,

चर्म रोग का दुश्मन नीम।

 

 

मेरा रोबोट

 

लंदन वाले चाचू जी से

मिला मुझे उपहार,

एक खिलौना जन्म दिवस पर

बढ़िया सा इस बार ।

 

बटन दबाते ही झटपट वह

ऐसा करे कमाल,

हाय, हलो कह, बड़े प्यार से

पूछे सबका हाल ।

 

अपना परिचय भी देता है

पतवाकर वह नास,

नये जमान का है रोबोट

करे गजब का काम ।

 

आजादी

 

देखूँ मैं नित शाम-सबेरे,

गुजरें घर के छत से मेरे।

 

चूँ-चूँ करके नील गगन से,

मौठे स्वर में बड़ी लगन से ।

सारे पंछी करें मुनादी,

खोना नहीं कभी आजादी ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बचपन

 

इस अंक में- 

बाल गीत- शंभूलाल शर्मा वसंत  

लोककथा- प्रगति रथ

बालकहानी- डॉ. मालती शर्मा  

प्रेरक प्रसंग- उपेन्द्रनाथ अश्क

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मुनिया की गुड़िया

 

मेरी मम्मी, अच्छी मम्मी

गुड़िया को तू जंरा संभाल,

जाती हूँ पढ़ने को शाला

पलने में देती हूँ डाल।

 

अंट-संट खाने मत देना

दो दिन से है इसे जुकाम,

इसीलिए मेरी गुड़िया को

बहुत जरूरी है आराम ।

 

रोये तो गोदी में लेकर

देना इसे तनिक मुचकार,

देखो मम्मी तेरे ऊपर

सौंप रही हूँ इसका भार ।

ध्यान और इस देना मम्मी

खेले नहीं न मिट्टी-धूल,

इसी तरह मुनिया की दुनिया

जिसमें मम्मी जाती भूल ।

 

 

जाड़े का छक्का

 

आया है जब से यह जाड़ा,

वह तो अपना झंड़ा गाड़ा ।

 

सभी दिशा में भक्कम-भक्का,

मार रहा है चौका-छक्का ।

लगता अच्छी कर तैयारी,

खेल रहा है जमकर पारी ।

 

सूरज भैया तनिक संभालो,

तेज गैंद कुछ ऐसे डो़लो।

 

समझ न उसको कुछ भी आये,

जल्दी से आउट हो जाए ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

माह के बालकवि

 शंभूलाल शर्मा वसंत

 

श्री शंभूलाल शर्मा वसंत समकालीन बाल कविता के प्रमुख रचनाकार हैं । आपका जन्म ग्यारह अप्रैल  सनं उन्नीस सौ अड़तालीस को रायगढ़ के गोर्रा ग्राम में हुआ । पिता स्व, श्री शिवप्रसाद शर्मा । शिक्षा वी.ए., बी एड । श्री वसंत शिक्षा  विभाग में एक लम्बे  अरसे से अध्यापन कार्य से संबद्ध हैं । अब  तक देश की महत्वपूर्ण बाल पत्रिका नंदन, बालहंस, बालभारती, सुमन सौरभ, मधु- मुस्कान, नन्हा आकाश, चंपक, समझ झरोखा, बाल मितान बालबोध, शिखर वार्ता ,नवभारत आदि में शताधिक कवितायें प्रकाशित । 5 बाल कविता संग्रह-'चंदामामा के आंगन में', 'सतरंगी कलियाँ', 'मामा जी की अमराई', 'मेरा रोबोट' और 'है न मुझे कहानी याद' प्रकाशित एवं बहुचर्चित । 2 बाल कविता संग्रह प्रकाशन को तैयार । श्री वसंत के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रिंत कृति 'बगर गया वसंत'(संपादकः जयप्रकाश मानस) प्रकाशित । आकाशवाणी अम्बिकापुर, रायगढ़ और रायपुर से निरन्तर प्रसारित । उत्कृष्ट  लेखन हेतु नवभारत बिलासपुर द्वारा परी कथा पुरस्कार, ग्राम्यभारती शोध संस्थान रायगढ़ द्वारा ग्राम्यभारती सम्मान, बहुआयामी सांस्कृतिक संस्था सृजन-सम्मान द्वारा सृजन श्री सम्मान एवं जिला शिक्षा परिषद रायगढ़ द्वारा विशिष्ट सम्मान । श्री वसंत मूलतः प्रकृति के कवि है । पर्यावरण, वन्य जीवन के प्रति रागात्मकता इनकी बाल कविताओं के केन्द्र में विन्यस्त है । - संपादक

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मेरा प्यारा घर

 

एक छोटे से गाँव में

बादलों की छाँव में

मेरा प्यारा घर...

 

बूढे पर्वत के पीछे

घाटी में सबसे नीचे

दूर से आये नजर...

 

वनफूलों से गमकता

हरी किरनों से दमकता

स्वागत को तत्पर...

 

आँगन में तुलसी मैंया

पास बंधी श्यामा गैया

बाँचे तोता अक्षर...

 

पेड झूम, मुस्काते हैं

पंछी आपस में गाते हैं

आओ मीत इधर...

 

कभी तितलियों के फेरे

भौंरे आते शाम-सबेरे

यहाँ कहाँ मच्छर...

 

सपनों में नित आता है

अपने पास बुलाता है

परदेश रहा अगर...

 जयप्रकाश मानस

 

 

 

 

 

 

 

 

 शंभूलाल शर्मा वसंत” की कुछ कविताऐं