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            सृजनगाथा रचनाधर्मिता के लिए समर्पित तथा किसी वाद, विवाद के पूर्वाग्रह से मुक्त यानी संवाद की अव्यवसायिक अंतरजाल पत्रिका है जिसकी श्रीवृद्धि आप की सदाशयता, एवं सक्रियता पर निर्भर है । यहाँ सभी विधाओं  का स्वागत हैः

मार्गदर्शी नियमः-

रचनाएं मौलिक, अप्रकाशित, अप्रसारित एवं अन्यत्र प्रकाशनार्थ अविचाराधीन हों, सृजनगाथा में प्रकाशन की स्वीकृति के पूर्व एवं प्रकाशन के पश्चात उसका अन्यत्र उपयोग नहीं किया जाना रचनाकार से अपेक्षित होगा ।

मौलिकता स्वयं रचनाकार की विश्वसनीयता है । अतः इसके अनुपालन के लिए रचनाकार स्वयं उत्तरदायी होगा ।

पूर्व प्रकाशित रचनाओं को भेजते समय प्रकाशन संदर्भ वांछित होगा ।

कृपया छांदस विधाएं जैसे कविता, गीत, ग़ज़ल, दोहे, हाइकु, सॉनेट आदि की रचनाएं एक बार में अधिकतम 5 से ज्यादा न भेजें ।

गद्य-विधाएं जैसे निंबंध, आलेख, संस्मरण, प्रेरक प्रसंग आदि 3000 शब्दों से अधिक न हों । कहानी एवं उपन्यास के लिए शब्दसीमा नहीं है । उपन्यास क्रमशः प्रकाशित किया जाएगा ।

हिन्दीतर भाषाओं का अनुवाद भेजते समय मूल भाषा के रचनाकार की सम्यक जानकारी एवं चित्र भी भेजें । इसी तरह लोक भाषाओं की रचना भेजते वक्त आवश्यक अंश का हिन्दी अनुवाद अवश्य मूल रचना के नीचे या कोष्ठक में अवश्य देंवे ।

किसी कृति या लघुपत्रिका पर केंद्रित समीक्षा मात्र सूचनात्मक न हो । उसमें सम्यक मूल्याँकन एवं भाषा, साहित्य, संस्कृति की दशा-दिशा का भी रेखांकन हो। समीक्षा के साथ कृति के कव्हर पृष्ठ का चित्र अवश्य भेजें । भारत के निवासी रचनाकारों से कृति की दो प्रतियाँ समीक्षार्थ आवश्यक होंगी ।

किसी विशेष पर्व/ तिथि/ प्रसंग/ मुद्दे पर कोई विशेष सामग्री भेजने से पूर्व संपादक से पत्राचार का स्वागतेय होगा ।  

ख़बरें नई एवं अतिमहत्वपूर्ण हों । खबरों के साथ आवश्यक चित्र भी हों । कृपया अति-स्थानीय या अत्यल्प महत्व के समाचारों को प्रकाशनार्थ न भेजें ।

कलाकार मित्र अपनी मौलिक कलाकृति या तस्वीरें भी भेज सकते हैं ।

आप पत्रिका से संबंधित किसी भी पहलु पर बेवाक टिप्पणी कर सकते हैं । इसे हम सहर्ष प्रकाशित किया  करेंगे ।

रचना स्वीकृति-अस्वीकृति बिषयक जिज्ञासा सहज है किन्तु इस परिप्रेक्ष्य में अपना समय नहीं खोने की अपेक्षा रचनाकार से की जाती है क्योंकि एक माह के भीतर अवश्य ही आपको इसकी सूचना प्रेषित कर दी जायेगी ।

वांछित संपादन व संशोधन का अधिकार संपादक मंडल का होगा ।

रचनाएं किसी भी युनिकोडित हिन्दी फोंट में भेजी जा सकती हैं । फॉन्ट संबंधी कठिनाई होने पर हमसे पत्राचार कर सकते हैं ।

रचनाएं ई-मेल-  srijangatha@gmail.comपर भेज सकते हैं । निम्नांकित पते पर भी पत्राचार कर सकते है-

                                                      

Editor

                                              Srijangatha

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       Pensionbada, Raipur, Chhattisgarh,

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       लेखक विहीन समाज मर जाता है- हरि ठाकुर

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