सृजनगाथा  

रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

 

 

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अंक-2. जुलाई 2006

 

 

 

 

 

 

 

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  भारत

 

 

 

  हिरण्यगर्भ के इंटरनेट संस्करण का लोकार्पण

 

  पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान हेतु प्रविष्टियां आमंत्रित

 

  हिमाचल का पहला शिखर कमलेश्वर को

 

  कहानीकार के संस्थापक संपादक कमल गुप्त नहीं रहे

 

 

हिरण्यगर्भ के इंटरनेट संस्करण का लोकार्पण

 

भारत । सृजन सम्मान के द्वारा वैभव प्रकाशन में आयोजित समारोह में आज गौतम पटेल लिखित हिरण्यगर्भ के इंटरनेट संस्करण का लोकार्पण कर छत्तीसगढ़ से इंटरनेट-ग्रंथों के प्रकाशन की शुरुआत मुख्य अतिथि श्री बबन प्रसाद मिश्र ने की ।

  

        समारोह के मुख्य अतिथि बख्शी सृजनपीठ के अध्यक्ष श्री बबन प्रसाद मिश्र ने कहा कि हिरण्य अर्थात् स्वर्ण की रामायण के संदर्भों में सुंदर व्याख्या की । उड़ीसा भारत की स्वर्ण भूमि है । ऋंगी ऋषि ने वहाँ स्वर्ण  भूमि है । ऋंगी ऋंषि ने वहाँ स्वर्ण भूमि की रचना की थी । हिरण्य गर्भ में जाएगा तो ऋषि की उत्पत्ति होती है । उन्होंने नई सदी के इस नए अभिमान के सार्थक उपयोग की आवश्यकता प्रतिपादित की । डॉ. सुधी शर्मा ने ग्रंथों एवं पत्रिकाओं के इंटरनेट संस्करण की पृष्ठभूमि पर पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए सृजन-सम्मान के प्रमुख जयप्रकाश मानस को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए श्रेय दिया । डॉ. मन्नूलाल यदु ने कहा कि नई सूचना क्रांति का रास्ता छत्तीसगढ़ में खुला है । जनकवि बसंत दीवान ने कहा क् पिछले कुछ वर्षों से छत्तीसगढ़ बनने के बाद बेहतर अनुभव मुल रहा है ।छत्तीसगढ़ के गाँव-गाँव के रचनाकार इंटरनेट पर दस्तक दे रहे हैं । राम पटवा महासचिव ने साहित्यिक क्रांति की शुरुआत बनाया । छत्तीसगढ़  के अप्रवासी लोगों में भी उत्साह जगा है ।

  

        इंटरनेट में छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ के रचनाकारों को पहुँचाने वाले जयप्रकाश मानस ने कहा कि आज पूरी दुनिया में छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी ने अपनी पहचान बना ली है । हमें इंटरनेट की अच्छायों को आत्मसात करते हुए इसे केवल मनोरंजन भाग का साथन नहीं है । समारोह के अध्यक्ष युवा लेखक-पत्रकार श्री संजय द्विवेदी ने सृजन ने सृजन-सम्मान के राष्ट्रीय मह्त्व को रेखांकित किया । ये जो परंपरा इंटरनेट के माध्यम से शुरु हुई उसमें गुणवत्ता का काम भी हमें करना होगा । हमें स्थानीय समीक्षक की आवश्यकता है । हमें छत्तीसगढ़ में आलोचना के क्षेत्र को मजबूत करना होगा । रचनाओं के लिए एक मानक तय करना होगा इससे लेखक को आत्म-मूल्यांकन का भी अवसर मिलेगा ।

         

       समारोह में सर्वश्री लक्ष्मण मसतूरिया, एच, एस, ठाकुर, काविश हैदरी, गिरीश पंकज, डॉ. सालक राम अग्रवाल, युक्ता राजश्री, डॉ. सुखदेव राम साहू ,रसिक बिहारी अवधिया, गौतम पटेल आदि उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन रसिक बिहारी अवधिया ने किया । (डॉ.सुधीर शर्मा)

 

                                  

                                      

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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