सृजनगाथा  

रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

 

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अंक-2. जुलाई 2006

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

  

        

         व्यंग्य

   विनोद

         चिट्ठी का वज़न

 

 

        एक लड़का एक चिट्ठी डाकखाने में छोड़ने गया । वहाँ पोस्टमास्टर ने उसे तौला तो वह आधे तोले से अधिक निकली । इस पर उसने लड़के से कहा- चिट्ठी वज़न में आधे तोले से अधिक है । इस पर एक टिकट और लगाना चाहिए ।

 

        लड़का- पर, बाबू साहब ! एक टिकट लगाने से चिट्ठी का वज़न और बढ़ जायेगा ना ?”

 

 

 

 

राक्षसी का प्रश्न

 

        ग्रीस देश में थीब्स नामक एक नगर है । वहाँ सुनते हैं, किसी समय एक राक्षसी थी । वह आधी स्त्री और आधी सिंहनी थी । उसके पास से जो निकलता था उससे वह एक कूट प्रश्न पूछती थी । और उसका ठीक उत्तर न मिलने पर वह उसे खा जाती थी । ईडिपस नामक एक मनुष्य उस समय ग्रीस में बहुत ही चतुर और प्रत्युत्पन्नबुद्धि था । अंत में उसने राक्षसी के प्रश्न का ठीक उत्तर देकर उसे जीता ।

     

      उसका प्रश्न यह था- ऐसा कौन सा-प्राणी है जो प्रातःकाल चार पैरों पर, दोपहर दो पैरों पर और सायंकाल तीन पैरों पर चलता है ?” इसे सुनकर ईडिपस ने तत्काल उत्तर दिया मनुष्य

 

प.महावीर प्रसाद द्विवेदी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बचपन

इस अंक में- 

माह के बालकवि- चंपा मावले  

लोककथा- सिन्धु रथ

कविता - हेमंत कुमार चावड़ा

विनोद-प्रसंग- प.महावीर प्रसाद द्विवेदी

पठनीय किताब- हरिप्रकाश वत्स