रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

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व्यंग्य

धर्म-निरपेक्षता बोले तो...!

रंदी सत्यनारायण राव

मारा देश धर्मो का देश है । धर्म, रुतबा यहाँ देश से ऊपर मान लिया गया है । पर सब इसे धर्म निरपेक्षता का अनुपम उदाहरण माने चल कर, पानी पूरी हुआ जाते हैं, लेकिन सच्चाई मालुम होते ही, मुँह का पानी पूरी, विस्फोट कर बाहर आन पड़ने को हो आती है। लोग धर्म निरपेक्षता की माला गले में शोभायमान होने देने को तब तक तैयार दीखते है । जब तक, उनका स्वार्थ सधता रहे, जहाँ ऐसा होना संभव न हुआ, वहाँ हत्थे से उखड़ जाने के उदाहरण, एक ढूंढो हजार मिल जाते हैं ।

 

 इस देश में लेन-देन कर सत्ता पर काबिज होने के जुगाड़ू राजनीति का यह सुफल है । ऐसे लोग दो बैलों की कौन कहे, आज अनेक बैलों को जोड़ कर, जननता पर जोत कर, उसकी फसल पर हाथ अजमा लेने में माहिर होते है । यदि इनमें से कोई बैल जुतने से मना कर दे तो बाकि बैल उसे मनाते है, पर इसके बावजूद भी वह न माने तो, उसे गाय का सानिध्य करा देते है । जति से वह केशरिया से दूर रह सके । केशरिया रंग से इन्हें असीम प्यार होता है । वे  इन्हें आलोचक के रूप में ही देखना चाहते है । शासन का अधिकार मात्र बैलों को ही जाता है, या जाना चाहिए क्यों कि देश की धर्म निरपेक्षता ठेका इन्ही जैसों के नाम आंबटित है । यह जान कर मेरा ह्रदय बल्लियों उछलने लगा । जब जोड़ा बैल के, धर्म विरपेक्षता की गुलामी से अभी अभी आजाद हुए मंत्री ने, तमाम रंग के साथियों (इसमें, केशरिया रंग को छोड़) के साध यह गुहार लगई कि, संसद पर हमले के सूत्रधार को मिली फांसी की सजा को माफ कर दिया जाए । चूंकि, ये मंत्री बड़े हाथ वाले है, इसलिए हाथ से हाथ मिलता गया, कारवां बनता गया बाहर वालों के गुबार देखते रहने से क्या होने वाला था । इसे ही तो कहा गया है धर्म निरपेक्षता । 

 

देश तोड़कों के प्रति, किसी शासक द्वारा ऐसी उदारता का कोई उदाहरण क्या कहीं अन्य देश में मिलता है ? एक अखन्य बैल ने तो, ब्लैक मेल की हद तक जा कर यह कहने से गुरेज नहीं किया कि फांसी से मरने वाला शहीद कहला कर हीरो बन जाएगा । देश में साम्प्रदायिक आग फैल जाएगी, देश अशांत हो जाएगा । यानी कि हीरो होना मना है । बाकि अन्य को मार कर जीरो करते रहो । हम तुम्हारे साथ है । दरअसल इन्हें फांसी पाने वाले के हीरो बन जाने की उतनी चिंता नहीं, जितना अपने को जीरो कहलाने से चिंता है । वैसे वे भी भला क्या करें, वहाँ के देशभक्तों के विद्रोह की आशंका ने, ऐसा करने को विवश किया । शायद यही वह वजह होगी जिससे सुप्रीम कोर्ट को यह राय जाहिर करने को विवश होना पड़ा कि देश के राष्ट्रपति या राज्य प्रमुख, राज्यपाल को किसी सजायाप्ते की सजा को माफ करने से पहले, देश की धर्म निरपेक्षता पर ध्यान रखना आवश्यक है ।

 

वैसे ऐसे लोगों के प्रति सहानुभूति रखने के लिए पुलिस, तथा सेना की विशेष भूमिका से आप, और हम अपरिचित नहीं । तभी तो कारगिल की ऊँची-ऊँची चोटियों तक पड़ोसी देश की सेना के साथ, ये देश भक्त भी चढ़, उछल कूद करने के साथ, सेना को, ललकारने लगे । हमारी सेना के आला अफसर, अहम् की लड़ाई से निजात पाने में मशगूल और साधारण सिपाही, पड़ोसी देश की गोरी चिट्टी,हसीनाओं के काले दुपट्टे से मंड़ित चांद को पाने की हसरत लिए, हरा होने को मचल उठे । भई, देश की आबादी घटानी जो है । अपने घर-गांव जाएंगे, तो बीवी के संग रात गुजरेगी ही परिणाम, बच्चों की फौज खड़ी होगी । अच्छा है । यही चोटियों से उतर कर, सुरम्य वादियों, और मखमली घास पर इन सुंदरियों के सौदर्य का छक कर पान कर लिया जाए । हम धर्म निरपेक्षता के झण्ड़ा बरदार है । हमारे सुकृत्य से यह देश हरा में तब्दील हो जाए, या लाल में । हमारी सेहत पर असर होने से रहा, और पुलिस की क्या कहने । नाग नाथ का भाई साँप नाथ । उसे अपनी झोली भरने से मतलब है । यदि झोली भर दिया तो आंतक के सर ताज को भी सामने से निकलते न देखें, और उसके सारे गुनाह माफ । पर यदि झोली न भय, तो उसे कब्र में भी चैन न लेने दे, ऐसे ही हम दुनिया में, अव्वल दर्जे के भ्रष्ट देश में, शुमार थोड़े ही किये जाते है । अब बात जनता पर आ कर टिकती है कि वह इसे किस रूप में ले रही है । इसके लिए खाकसार आपका कीमती समय जाया न करते हुए मात्र दो उदाहरणों से ही काम चलाएगा-

 

हरा रंग वाले देश भक्त ने कहा-वंदे मातरम हम गा नहीं सकते, यह हमारे धर्म के विरूद्ध है पहले दो रंगी सरकार ने कहा- बंदे मातरम् गाया जाना जरूरी है  । फिर इसी सरकार ने हरे का विरोध का सामना न कर, इतने अपने पूर्व की घोषणा में तब्दीली लायी और कहा वंदे मातरण को गाया जाना स्वेच्छित है, इसे, गाने की अनिवार्यता नहीं

 

अब दूसरे उदाहरण पर गौर फरमाएं- हरा रंग, और आसमानी नीले रंग वाली टीमों का अंतर्राष्ट्रीय एक दिवसीय मैच का आयोजन था मैदान पर हरे रंग की टीम बल्लेबाजी कर रही थी । बल्लेबाज थे, हमेशा रन आऊट होने वाले खिलाड़ी । उनके बल्ले से चौके के लिए गेंद मैदान के बाहर चली गई । हरे रंग की दर्शक दीर्घा उत्साह व उमंग से झूम उठी, दर्शकों में से एक की आवाज़ फिजां में गूंज उठी- अल्लाह ने क्या ताकत दिया उसके बल्ले को । क्या कहर बरपा रहा है । इस मुल्क में, यह हमारे दिली ख्वाहिश का परचम लहरा रहा है । खुदा करे हमारी फतह हो उनकी बात को शायद चौका खाने वाले देश के दिल जले ने सुन लिया था । उसने जवाब सरका दिया- बरखुरदार, हमारी बारी आने दो, आपके ख्वाहिश को मिट्टी नसीब हो जाएगी फिर, आसमानी नीले रंग की टीम बल्लेबाजी के लिए उतरी शुरु में । हरे रंग की टीम की गेंद बाजी विवादास्पद गेंद बाज ने करना आरम्भ किया ।उनकी पहली गेंद को, सामने बल्ला सम्भाले विश्व रिकॉर्ड़ धारी ने छक्के के लिए उछाल दिया । अब पता नही क्यों खुशी की जगह, हरे रंग की दर्शक दीर्घा में, मातमी सन्नाटा पसर गया था । अब मै कुछ न कह कर आप पर, निर्णय का भार आयत करना चाहता हूँ कि हमारी धर्म निरपेक्षता बोले तो ?

 

 

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