औंदू बोला
आओ पतझड़
गिरगिट का फ्यूचर ब्राइट
चारा से लेकर दूरसंचार के केबल और बालू से लेकर नदियों का कीचड़ तक चट कर जाते हैं। गिरगिट जी को मजबूरी न हो तो अपने असली रंग में ही रहते हैं। खूबसूरत से मटमैले रंग में। मिट्टी के रंग से ... पढ़िए
मेले की ओर घर
दु ठो बाघ और एगो भालू का साथ में सरकस भी अइबे किया है। तनिक-तनिक सा पोसाक में हूरपरी लोग का दल केतना हिम्मतवाला करतब सब दिखा रहा है। लक्ष्मी को तो बहुते आनंद आएगा। केतना सब मजा का खेला ?’ ... पढ़िए
विद्या गुप्ता की दो कविताएँ
शशांक मिश्र भारती की कविताएँ
धमकी की भाषा
सोच पर शौच, और श्रद्धांजलि
लेकिन आज उन बड़े नोटों पर गांधी की तस्वीर छापकर सत्ता पर काबिज लोग दो नंबरी कारोबार में उनका इस्तेमाल करते हैं, संसद में कोठों की तरह बिकने वाले और खरीदने वाले सांसद, संसद के अहाते में गांधी को बिठाकर अपनी ... पढ़िए
परम्परा
अंधा धुआँ
कड़क ठंड है
बृजलाल द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान समारोह 7 को
द लास्ट ग्लैमर गर्ल:बेगम पारा
बेगम पारा 1950 के दशक की प्रगतिशील लीड हीरोइनों में एक थीं। इनका जन्म एक संभ्रांत मुस्लिम परिवार में हुआ। इनके पिता एक सेशन जज थे। बेगम पारा अपने दस भाई-बहनों में एक थी। अपनी पढ़ाई इन्होंने अलीगढ़ से पूरी की। ... पढ़िए
एक कविता खुद के लिए
हीरा मंडी
लिये लुकाठा हाथ
हाइकु
महंगाई की चिता
‘महंगाई की चिता’ में ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब गरीबों को लेटना नहीं पड़ता। गरीबी की मार झेल रहे गरीब, बरसों से ऐसे ही मुश्किल में थे, उपर से महंगाई की मार से जीवन-मरण का ले-आउट तैयार हो गया है। ... पढ़िए
पैराशुट
बेहद अकेलेपन पर
0 टिप्पणी, बचपन > बाल गीत, (7 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 5 फरवरी 2012,
पी. दयाल श्रीवस्तव
आओ पतझड़
0 टिप्पणी, कविता, (9 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 5 फरवरी 2012,
राजेन्द्र प्रसाद काण्डपाल
गिरगिट का फ्यूचर ब्राइट
चारा से लेकर दूरसंचार के केबल और बालू से लेकर नदियों का कीचड़ तक चट कर जाते हैं। गिरगिट जी को मजबूरी न हो तो अपने असली रंग में ही रहते हैं। खूबसूरत से मटमैले रंग में। मिट्टी के रंग से ... पढ़िए0 टिप्पणी, व्यंग्य, (8 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 5 फरवरी 2012,
सूर्यकान्त त्रिपाठी
मेले की ओर घर
दु ठो बाघ और एगो भालू का साथ में सरकस भी अइबे किया है। तनिक-तनिक सा पोसाक में हूरपरी लोग का दल केतना हिम्मतवाला करतब सब दिखा रहा है। लक्ष्मी को तो बहुते आनंद आएगा। केतना सब मजा का खेला ?’ ... पढ़िए0 टिप्पणी, भाषांतर, (14 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 4 फरवरी 2012,
रतन चंद 'रत्नेश'
विद्या गुप्ता की दो कविताएँ
1 टिप्पणी, कविता, (16 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 4 फरवरी 2012,
विद्या गुप्ता
शशांक मिश्र भारती की कविताएँ
0 टिप्पणी, कविता, (59 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 2 फरवरी 2012,
शशांक मिश्र भारती
धमकी की भाषा
कभी-कभी मुझे लगता है कि हमारे भीतर एक तरह का बचपना न हो तो मन की आँखों में उभरनेवाली कल्पनाएँ उन अल्पनाओं को नहीं रच सकतीं, जो ‘शून्य भीति पर चित्र रंग नहीं तन बिना लिखा चितेरे’ की तरह परमेश्वर की ... पढ़िए
0 टिप्पणी, ललित निबंध, (25 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 2 फरवरी 2012,
संदीप कुमार मील
सोच पर शौच, और श्रद्धांजलि
लेकिन आज उन बड़े नोटों पर गांधी की तस्वीर छापकर सत्ता पर काबिज लोग दो नंबरी कारोबार में उनका इस्तेमाल करते हैं, संसद में कोठों की तरह बिकने वाले और खरीदने वाले सांसद, संसद के अहाते में गांधी को बिठाकर अपनी ... पढ़िए0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (13 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 2 फरवरी 2012,
सुनील कुमार
परम्परा
चार-चार बैठीं हैं घर में, पैसा पास-पल्ले है नहीं। कहां से लाओगे चारों के ब्याह के लिए इतना पैसा। यूं ही कुंवारी बैठाए रखोगे क्या? बड़की कहती थी कि लड़का ऊंचे खानदान का है। कई-कई फैक्ट्रियां हैं उसके पिता की..और, उसने ... पढ़िए
0 टिप्पणी, लघुकथा, (22 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 2 फरवरी 2012,
सुबोध श्रीवास्तव
अंधा धुआँ
0 टिप्पणी, भाषांतर, (19 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 1 फरवरी 2012,
देवी नागरानी
कड़क ठंड है
0 टिप्पणी, बचपन > बाल गीत, (13 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 1 फरवरी 2012,
पी. दयाल श्रीवस्तव
बृजलाल द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान समारोह 7 को
भोपाल । हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित किए जाने के लिए दिया जाने वाला पं. बृजलाल द्विवेदी अखिलभारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान 7 फरवरी को भारत भवन, भोपाल में अपराह्न 3 बजे आयोजित किया गया है। इस अवसर पर प्रख्यात लोकगायक ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (18 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 1 फरवरी 2012,
भोपाल से संजय द्विवेदी
द लास्ट ग्लैमर गर्ल:बेगम पारा
बेगम पारा 1950 के दशक की प्रगतिशील लीड हीरोइनों में एक थीं। इनका जन्म एक संभ्रांत मुस्लिम परिवार में हुआ। इनके पिता एक सेशन जज थे। बेगम पारा अपने दस भाई-बहनों में एक थी। अपनी पढ़ाई इन्होंने अलीगढ़ से पूरी की। ... पढ़िए0 टिप्पणी, सिनेमा के शिखर, (61 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 1 फरवरी 2012,
एक कविता खुद के लिए
1 टिप्पणी, कविता, (22 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 1 फरवरी 2012,
चण्डीदत्त शुक्ल
हीरा मंडी
मुजरा खत्म होने को है पर ऐसा कोई ग्राहक नहीं आया जो उसकी नथ उतराई की कीमत लगा सके, पर वो बुत अभी तक बैठा है। एक-एक करके सब चले गए। उसने नोटों की 4-5 गड्डियां निकालीं और उठकर चला गया। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, कहानी, (35 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 31 जनवरी 2012,
राजकुमार सोनी
लिये लुकाठा हाथ
सूरज डूबता है तो भी उजाले की संभावना नहीं डूबती। दुख कितना भी गहरा हो, यंत्रणाकारी हो, दर्द भरा हो, वह भी सुख की संभावना को मिटा नहीं सकता। विषाद कितना भी गहन हो, प्रसन्नता की परिधि को अतिक्रमित नहीं कर ... पढ़िए
0 टिप्पणी, मीडिया, (18 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : मंगलवार, 31 जनवरी 2012,
डॉ. सुभाष राय
हाइकु
0 टिप्पणी, छंद > हाइकु, (34 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 30 जनवरी 2012,
महंगाई की चिता
‘महंगाई की चिता’ में ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब गरीबों को लेटना नहीं पड़ता। गरीबी की मार झेल रहे गरीब, बरसों से ऐसे ही मुश्किल में थे, उपर से महंगाई की मार से जीवन-मरण का ले-आउट तैयार हो गया है। ... पढ़िए0 टिप्पणी, व्यंग्य, (20 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 30 जनवरी 2012,
राजकुमार साहू
पैराशुट
2 टिप्पणियाँ, कविता, (62 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 29 जनवरी 2012,
जयप्रकाश मिश्र
बेहद अकेलेपन पर
2 टिप्पणियाँ, कविता, (43 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 29 जनवरी 2012,
जयप्रकाश मिश्र
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