भिलाई । नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भिलाई दुर्ग के तत्वावधान तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रायोजन में आयोजित राष्ट्रीय राजभाषा संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक, श्री विश्वरंजन उपस्थित थे। समापन सत्र की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय से पधारे सुप्रसिद्ध समालोचक एवं प्रोफेसर डॉ. अजय तिवारी ने किया। इस सत्र के मुख्य अतिथि श्री विश्वरंजन ने राजभाषा की इस राष्ट्रीय संगोष्ठी को हिन्दी को दिशा देने वाली संगोष्ठी के रूप में रेखांकित किया।

वैचारिक सत्र का आयोजन “हिन्दी के भविष्य और भविष्य के हिन्दी“ विषय पर किया गया। वैचारिक सत्र के मुख्य अतिथि डॉ बुद्धिनाथ मिश्र, सुविख्यात कवि और भाषाविद्, देहरादून तथा सत्र की अध्यक्षता कर रहे डॉ. स्वदेश भारती, अध्यक्ष राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, कोलकाता ने अपने सारगर्भित विचार रखे। इस सत्र में आधार वक्तव्य डॉ. अजय तिवारी सुप्रसिद्ध समालोचक एवं प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालय ने दिया। विशिष्टि अतिथि के रूप में उपस्थित सुविख्यात कवि व महानिदेशक, दूरदर्शन नई दिल्ली, श्री लीलाधर मंडलोई ने अपने उद्बोधन से प्रतिभागियों को प्रभावित किया। वैचारिक सत्र का संचालन व आभार प्रदर्शन श्री जे एन ठाकुर (वरिष्ठ प्रबंधक सम्पर्क व प्रशासन) ने किया।
अंत में आयोजित काव्य सत्र, श्री लीलाधर मंडलोइ के मुख्य आतिथ्य व छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक श्री विश्वरंजन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। श्री विश्वरंजन ने अपनी काव्य रचनाओं से श्रोताओं को सोचने की एक नई दृष्टि प्रदान की। श्री लीलाधर मंडलोई की रचनाओं ने काव्य सत्र को एक नई ऊँचाई प्रदान की। छत्तीसगढ़ के प्रख्यात कवि व समालोचक श्री अशोक सिंघई की कविताओं में मानवीय संवेदनायें उभरकर सामने आई। डॉ. स्वदेश भारती व डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को बांधे रखा। श्री अजय पाण्डे, विशेष सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें, छत्तीसगढ़ शासन) ने अपने काव्य धारा से श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी। खैरागढ़ से पधारे गीतकार श्री जीवन यदु एवं कवियित्री श्रीमती संतोष झांझी ने अपने सुमधुर गीतों से समा बांध दी। काव्य सत्र का संचालन व आभार प्रदर्शन छत्तीसगढ़ साहित्य सम्मेलन के महासचिव श्री रवि श्रीवास्तव ने किया।
उक्त अवसर पर एच. एस. ठाकुर, राम पटवा, जयप्रकाश मानस, सहित बड़ी संख्या में भिलाई और दुर्ग के प्रबुद्ध साहित्यकार उपस्थित थे ।

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