श्रेणियाँ

राष्ट्रीय राजभाषा संगोष्ठी का महामहिम राज्यपाल द्वारा उद्घाटन

प्रकाशन :गुरूवार, 2 सितम्बर 2010
-

भिलाई । नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति भिलाई-दुर्ग के तत्वावधान तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रायोजन में भिलाई निवास में आयोजित राष्ट्रीय राजभाषा संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल महामहिम श्री शेखर दत्त उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रबंध निदेशक व नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष श्री वी के अरोरा ने की। इस कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशक (कार्मिक व प्रशासन) श्री पी के अग्रवाल, साहित्यकार डॉ स्वदेश भारती, अध्यक्ष राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी, कोलकाता, विशेष रूप से उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल महामहिम श्री शेखर दत्त व कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रबंध निदेशक श्री वी के अरोरा तथा उपस्थित अन्य अतिथियों ने मंगलदीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राष्ट्रगीत के साथ ही कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। सर्वप्रथम कार्यपालक निदेशक (कार्मिक व प्रशासन) श्री पी. के. अग्रवाल ने महामहिम राज्यपाल श्री शेखर दत्त व कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री वी के अरोरा जी का अभिनंदन शॉल व श्रीफल देकर किया। नराकास के सचिव, श्री दिलीप नंनौरे ने स्वागत वक्तव्य दिया। सेल रिफ्रेक्टरी यूनिट से पधारे श्री डी पी देशमुख ने नराकास का प्रगति प्रतिवेदन पेश किया।

इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल श्री शेखर दत्त जी ने नराकास की पत्रिका महानदी के वर्ष 2010 के अंक के साथ संयंत्र के राजभाषा विभाग द्वारा प्रकाशित कार्यशाला सहायिका का विमोचन किया। इसके अतिरिक्त अतिथियों ने राजभाषा क्विज़ के विजेताओं को पुरस्कृत किया।

राज्यपाल ने कहा कि यह संगोष्ठी राजभाषा को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगी साथ ही यह हमारे बौद्धिक विकास की तृप्ति करने में सक्षम होगी। भारत में भाषायी विविधता बहुत है और हमारी सभी भाषायें समृद्ध हैं। हिन्दी सभी भाषाओं को व हमारे राष्ट्र को जोड़ने का काम करती है। उन्होंने तुलसीदास, सूरदास, भारतेन्दु हरिशचन्द्र व हिन्दी के अन्य साहित्यकारों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हमें लोगों को हिन्दी में लिखने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये। विशेषकर बच्चों को प्रोत्साहित करें। हिन्दी में लिखने व पढ़ने की आदत डालें। हमें हिन्दी की चिंता नहीं चिंतन करना चाहिये। हिन्दी अब परिपक्व हो चुकी है। अंग्रेजी पत्रिकाओं में भी हिन्दी के लेखकों के कृतियों पर चर्चा होनी चाहिये। यह राजभाषा संगोष्ठी लोगों में रूचि जगाने का कार्य करेगी जिससे हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान के निर्माण को और अधिक बल मिलेगा।    

राजभाषा संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रबंध निदेशक व नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष श्री वी के अरोरा ने भिलाई इस्पात संयंत्र के राजभाषा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि भिलाई एक लघु भारत है जहाँ लोग अपने कर्म को ही धर्म मानते हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र ने सदैव ही राजभाषा के प्रगति में योगदान दिया है। कम्प्यूटर में हिन्दी प्रयोग बढ़ने से हमारे हिन्दी के काम करने में तेज़ी आई है और हिन्दी के कार्यों का प्रतिशत भी बढ़ा है। मेरा यह मानना है कि यह संगोष्ठी भाषायी विकास व एकता लाने में पूर्णरूपेण सफल होगी।

संगोष्ठी में कोलकाता से पधारे साहित्यकार डॉ स्वदेश भारती, अध्यक्ष राष्ट्रीय हिन्दी अकादमी ने आधार वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि भाषा संस्कार देती है, विचारों, संबंधों, व सामाजिकता को पोषित करती है। हिन्दी का विकास तभी संभव हो सकेगा जब हम हिन्दी को पेट की भाषा बनायेंगे व रोटी की भाषा बनायेंगे। हम सब को मिलकर हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर स्थापित करना है।           

कार्यक्रम का संचालन व आभार प्रदर्शन नराकास के सह-सचिव श्री अशोक सिंघई ने किया। इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक, प्रभारी (खदान) श्री एम के बिन्दु, कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) श्री सुदीप साहा, दूरदर्शन, नई दिल्ली के महानिदेशक व सुविख्यात कवि श्री लीलाधर मंडलोई, सुविख्यात कवि व भाषाविद् डॉ बुद्धिनाथ मिश्र, दिल्ली विश्व विद्यालय के प्रोफ़ेसर व सुप्रसिद्ध समालोचक, डॉ अजय तिवारी, नराकास के सचिव, श्री दिलीप नंनौरे तथा आयोजन समिति के अध्यक्ष, व नेशनल पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन के श्री एस एन पी सिंह मौजूद थे। यह राष्ट्रीय संगोष्ठी “हिन्दी का भविष्य और भविष्य की हिन्दी” विषय पर केन्द्रित है। इस अवसर पर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के 51 सदस्य संगठनों के प्रतिनिधियों सहित देश के मूर्धन्य साहित्यकारों ने अपनी प्रतिभागिता दी। 

भिलाई से अशोक सिंघई की रपट

  Bookmark and Share
टिप्पणी लिखें
 
वाक्यांश खोजें




Bing


Site Search Site Search
लेखागार (Archive)
लेखक की प्रविष्टियाँ