दिल्ली । राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, भारत सरकार द्वारा मानव अधिकारों से संबंधित विविध विषयों पर हिंदी में मौलिक लेखन को बढ़ावा देने, देश के अंतर्गत मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं भावनात्मक स्तर पर एकता स्थापित करने में पर्याप्त सहायता पहुँचाने के लिए पुस्तकों/पाडुंलिपियाँ आमंत्रित की गयी हैं ।
इस प्रयोजन के लिए मानव अधिकारों से संबंधित अभिज्ञात विषयों यथा - मानव अधिकार तथा बाल सुधारात्मक संस्थाएँ, मानव अधिकार एवं पुलिस, भारतीय संस्कृति में मानव अधिकार की अवधारणाएँ, मानव अधिकार एवं कारागार, मानव अधिकार एवं विकलांगता, न्यायपालिका, कार्यपालिका तथा मानव अधिकार, मानव अधिकार एवं महिलाएँ, मानव अधिकार एवं बाल विवाह, आतंकग्रस्त क्षेत्रों में मानव अधिकार, मानव अधिकार एवं जनकल्याण, मानव अधिकार एवं युवा वर्ग, मानव अधिकार एवं बाल श्रम, मानव अधिकार एवं सांप्रदायिक दंगे, मानव अधिकार एवं बँधुआ श्रमिक, मानव अधिकार एवं पर्यावरण संतुलन, मानव अधिकार एवं मनोरोग चिकित्सालय, मानव अधिकार एवं उपभोक्ता संस्कृति, मानव अधिकार एवं खाद्य सुरक्षा, मानव अधिकार, मीडिया तथा गैर-सरकारी संगठन, मानव अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय अभिसमय, मानव अधिकार एवं संचार माध्यम, सामाजिक न्याय, प्रशासन तथा मानव अधिकार, मानव अधिकार एवं बाल-वेश्यावृत्ति, मानव अधिकार एवं विकास, मानव अधिकार एवं बाल शोषण, मानव अधिकार एवं स्वास्थ्य सेवाएँ , मानव अधिकार एवं वृद्धजन, मानव अधिकार एवं दांडिक न्याय प्रणाली, मानव अधिकार एवं शिक्षा, मानव अधिकार एवं सुशासन, मानव अधिकार एवं लोकतंत्र, मानव अधिकार और पंचायती राज, मानव अधिकार और आदिवासी समाज, साहित्य, समाज तथा मानव अधिकार, सूचना का अधिकार तथा मानव अधिकार, पंचायती राज तथा मानव अधिकार, मानव अधिकार और स्वास्थ्य सेवाएँ आदि विषय पर लिखा जा सकता है ।
मानव अधिकारों से संबंधित उपर्युक्त विषयों को साहित्य की विविध विधाओं, यथा-निबंध, कविता, कहानी, नाटक अथवा उपन्यास के माध्यम से व्यक्त किया जा सकता है। इनके अतिरिक्त मानव अधिकारों से संबंधित अन्य विषयों में लिखी गई पुस्तकों/पांडुलिपियों पर भी विचार किया जा सकता है।
पुरस्कारों का विवरण- आयोग द्वारा गठित मूल्याँकन समिति तथा उच्चस्तरीय चयन समिति द्वारा की गई अनुशंसा/गुणवत्ता के आधार पर नीचे दिए गए विवरण के अनुसार पुरस्कार प्रदान किये जाएँगे:-
मौलिक श्रेणी
द्वितीय पुरस्कार - 40,000/- रूपये
तृतीय पुरस्कार - 30,000/- रूपये
अनूदित श्रेणी
द्वितीय पुरस्कार - 25,000/- रूपये
तृतीय पुरस्कार - 20,000/- रूपये
पात्रता - योजना के अंतर्गत केवल भारत के नागरिक ही अपनी प्रविष्टियाँ भेज सकते हैं। योजना में केवल ऐसी पुस्तकों पर विचार किया जाएगा, जो पिछले तीन वर्षों में प्रकाशित हुई हों । राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में कार्य कर रहे अधिकारी/कर्मचारी तथा उनके आश्रित भी इस योजना में भाग लेने के पात्र होंगे, लेकिन उनके द्वारा हिंदी में लिखी पुस्तकों/पांडुलिपियों/अनुवाद को उन्हें उपलब्ध विशेष सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आंका जाएगा। योजना के अंतर्गत प्राप्त सभी पुस्तकें/पांडुलिपियाँ (मूल अथवा अनूदित) में कम से कम 30,000 शब्द होने चाहिए। प्राप्त किसी उत्कृष्ट कृति में निहित शब्दों की संख्या 30,000 से किंचित न्यून होने पर उच्चस्तरीय चयन समिति उसका चयन करने के लिए प्राधिकृत होगी। ऐसी कोई पुस्तकें/पांडुलिपियाँ /अनूदित कृतियाँ जिसको भारत सरकार, किसी राज्य सरकार अथवा स्वायत्तशासी संगठन द्वारा चलाई जा रही किसी अन्य योजना के अंतर्गत पुरस्कार अथवा वित्तीय सहायता मिली हो, वह इस योजना के अंतर्गत विचारणीय नहीं होगी। मूल्याँकन समिति तथा उच्चस्तरीय चयन समिति के सदस्यों द्वारा लिखी पुस्तक, उनकी सदस्यता अवधि के दौरान विचारणीय नहीं होगी। योजना के अंतर्गत किसी लेखक/अनुवादक को केवल एक बार पुरस्कृत किया जाएगा। योजना के अंतर्गत किसी लेखक/अनुवादक को केवल एक बार पुरस्कृत किया जाएगा। योजना के अंतर्गत पुस्तकों/पांडुलिपियों/अनुवाद की पांच प्रतियाँ भेजनी होंगी। योजना का विस्तृत विज्ञापन डी.ए.वी.पी. के माध्यम से हिंदी और अंग्रेज़ी के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रीय समाचार पत्रों में विज्ञापित किया जाएगा। अंतिम तिथि के बाद प्राप्त होने वाली प्रविष्टियाँ विचारणीय नहीं होंगी। आयोग को प्रविष्टियों के रूप में दी गई पुस्तकों को वापस नहीं लौटाया जाएगा तथापि पांडुलिपियाँ लौटा दी जाएँगी। यदि पुरस्कार के लिए प्रस्तुत पांडुलिपि/अनुवाद के लेखक एक से अधिक होंगे तो पुरस्कार की राशि सभी लेखकों में समान रूप से बाँट दी जाएगी। पुरस्कार हेतु आयोग को भेजी गई पुस्तकों/पांडुलिपियों पर सर्वाधिकार (कॉपीराइट) उनके लेखक/लेखकों का होगा। अन्य भारतीय भाषाओं अथवा अँगरेज़ी से हिन्दी में पुस्तकों के अनुवाद के मामले में आवेदन पत्र के साथ पुस्तक के मूल लेखक का अनुमति पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। शोध प्रबंध/लघुशोध प्रबंध इस योजना के अंतर्गत स्वीकार्य नहीं होंगे। ऐसी पुस्तक/पांडुलिपि पुरस्कार के अयोग्य होगी जिसके संबंध में उच्चस्तरीय चयन समिति को विश्वास हो जाए कि उसे पुरस्कार दिलाने के लिए समर्थन जुटाया गया है। आयोग को यह निर्णय लेने का अधिकार है कि मूल्याँकन समिति और उच्चस्तरीय चयन समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर किसी पुस्तक /पांडुलिपि को पुरस्कार दे या ना दे। आयोग को इस नियमावली के किसी भी प्रावधान में छूट देने का अधिकार होगा।
प्रविष्टियाँ भेजने का तरीक़ा - प्रविष्टियाँ निर्धारित आवदेन पत्र (निःशुल्क), दो प्रतियों में भरकर प्रविष्टियों की पाँच प्रतियों के साथ सहायक निदेशक (राजभाषा), राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, फरीदकोट हाउस कॉपरनिकस मार्ग, नई दिल्ली-110001 को 30 सितम्बर, 2010 तक भेजनी होंगी। आवेदन पत्र का नमूना www.nhrc.nic.in/ से डाउनलोड किया जा सकता है ।
परिणामों की घोषणा - राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा किसी कृति के संबंध में लिया गया निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा। निर्णय की सूचना संबंधित लेखक को दे दी जाएगी और इसे प्रेस नोट द्वारा प्रचारित भी किया जाएगा। इस संबंध में अन्य किसी भी प्रकार का पत्र-व्यवहार नहीं किया जाएगा।

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