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ज्ञानपीठ से रिश्‍ता तोड़ा अशोक वाजपेयी ने

प्रकाशन :सोमवार, 6 सितम्बर 2010
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दिल्ली । कुलपति वी. एन. राय और रवीन्द्र कालिया को लेकर मचे घमासान इतना बढ़ चुका है कि अब जाने माने कवि-आलोचक और ललित कला अकादमी के अध्यक्ष अशोक वाजपेयी ने भी भारतीय ज्ञानपीठ से रिश्ता तोड़ लिया है ।  उन्होंने एक अख़बार में लिखा है कि - दिनेश मौर्य के पत्र के संदर्भ में यह कहना है कि नेक काम है या नहीं, मैं ‘कभी-कभार’ स्तंभ में दूसरे लेखकों से भारतीय ज्ञानपीठ का बहिष्कार करने की माँग करने के साथ ही, ज्ञानपीठ से अपनी दोनों पुस्तकें ‘शहर अब भी संभावना है’ और ‘कवि कह गया है’ वापस ले चुका हूँ। उसके एक आजीवन न्यासी के इस कदम पर पुनर्विचार करने के आग्रह को अस्वीकार भी कर चुका हूँ। गिरिराज किशोर और प्रियंवद पहले ही अपनी पुस्तकें वापस ले चुके हैं। अब बाक़ी लेखक आगे आएँगे, इसका इंतज़ार है।


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