दिल्ली । सूचना है कि कुलपति-ज्ञानोदय विवाद में शामिल होते हुए हिंदी के वरिष्ठतम पीढ़ी के रचनाकार कृष्ण बलदेव वैद ने भी अन्य लेखकों की तरह भारतीय ज्ञानपीठ से अपनी किताबें वापिस ले ली हैं। वे इस समय अमेरिका प्रवास पर हैं । उन्होंने वहाँ से ज्ञानपीठ के न्यासी आलोक जैन को एक पत्र लिखा है । उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि “जब तक भारतीय ज्ञानपीठ लेखकों के प्रतिरोध का संतोषप्रद जवाब नहीं देती, मेरा उससे पूर्ण असहयोग रहेगा। इस असहयोग में यह भी शामिल है कि मैं ज्ञानोदय के लिए कुछ नहीं लिखूंगा और ज्ञानपीठ से प्रकाशित अपनी दो पुस्तकें – संशय के साये और डुबोया मुझको होने ने – मैं वापिस ले रहा हूँ। कृपया आप और कालियाजी इसे अन्यथा न लें – यह क़दम एक उसूल के लिए उठाया गया है। व्यक्तिगत कारणों से नहीं। रोमन में हिंदी लिखने के लिए क्षमा करें”।

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