धूप सुनहरी
धूप सुनहरी

मांग रहा है
रामभरोसे आज,
नहीं चाहिए
यूरो-डॉलर
या सिंहासन-ताज!
नदी बड़ी है
सागर भी है
पार मुझे ही करना,
नैया छोटी
छोटे चप्पू
धार मुझे ही धरना
टूट न जाए
साहस मेरा
रखना मेरी लाज!
घड़ियालों का
अपना जीवन
उनको भी है जीना,
मछली का है
जीवन पानी
पानी उनको पीना,
सबके तार
सलामत रखना
और सभी के साज!
खून-पसीना
बोकर हमने
फ़सलें नई लगाईं,
तोता-मैना
की बातें भी
हमने पढी-पढ़ाई,
चिड़ियाँ चहकें
एक डाल पर
नेह करे नित राज!
बनकर बंजारे
मारे-मारेबनकर बंजारे
फिरते-रहते
हम गली-गली !
जलती भट्ठी
तपता लोहा,
नए रंग ने
है मन मोहा,
चाहें जैसा
मोड़ें वैसा,
धरे निहाई
हम अली-बली!
नए-नए
औज़ार बनाएँ,
नाविक के
पतवार बनाएँ,
रही कठौती
अपनी फूटी,
खा भी लेते
हम भुनी-जली!
राहगीर मिल
ताने कसते,
हम हैं फिर भी
रहते हंसते,
अभी तुम्हारा
समय सहारा,
जो सुन लेते
हम बुरी-भली!
अवनीश सिंह चौहान
ग्राम/पो.-चन्दपुरा (निहाल सिंह),
जनपद-इटावा (उ.प्र.)-206127
मो.- 09456011560.
abnishsinghchauhan@gmail.com
जनपद-इटावा (उ.प्र.)-206127
मो.- 09456011560.
abnishsinghchauhan@gmail.com


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