रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

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एक शब्द

 

दिखाना  

डॉ.गंगाप्रसाद बरसैया

 

        दिखाने का अर्थ है किसी चीज को सामने रखना, बताना आदि। अज्ञानी को मार्ग दिखाना, भूले हुए को दिशा दिखाना ज्ञानियों और वरिष्ठजनों का कार्य है। मार्ग दिखाना और रास्ता दिखाना तो वैसे एक ही है, पर कभी-कभी अशिष्ट व्यक्ति को दरवाज़े का रास्ता दिखाकर घर से बाहर भी किया जाता है। मार्ग दिखाने का अर्थ किसी कार्य को समझाना भी है। दिखाने के लिए लोग ज्योतिषियों को हाथ दिखाकर अपना भाग्य और भविष्य पूछते हैं जबकि जादूगर और कलाकार हाथ की सफाई दिखाकर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

 

        संघर्ष या युद्ध के मैदान में पौरुष या वीरता दिखाना अच्छी बात है, पर पीठ दिखाकर पलायन करना, मैदान छोड़कर भागना अन्यन्त शर्मनाक और दुखद है । कई लोग दिन में तारे देखा देते हैं - उसने ऐसा वार किया कि दिन में तारे दिखने लगे । एक पहलवान दूसरे पहलवान को अखाड़े में चित कर आसमान दिखाकर वाहवाही लूट लेता है। कुछ लोग वायदा करके, विश्वास दिलाकर ऐन मौके पर अंगूठा दिखाकर धोखा देते हैं । ऐसे लोगों से सजग रहना चाहिए। दिखाने के लिये तो संसार में बहुत सारी चीजें हैं, पर आँखें दिखाकर गुस्सा करना सदैव अच्छा नहीं नहीं होता है । गलत काम करने पर आँखे दिखाना जरूरी है लेकिन ऐसा काम कभी नहीं करना चाहिए कि मुह दिखाने लायक ही न रह जायें ।

       

        शर्म और ग्लानि में आदमी मुँह नहीं दिखाना चाहता । किसी का मुँह देखना बुरा या अशुभ माना जाता है जबकि नववधू की मुँह दिखाई रुपया देकर की जाती है । उत्सव मनाया जाता है। कई बार लोग गाली देते हैं या शपथ कराते हैं - ऐसा करो तो मरा मुँह देखो।

 

        कुछ लोग सब्जबाग दिखाकर दूसरों को आकर्षित करते हैं और कुछ लोग गुड़ दिखाकर पत्थर से भी नहीं चुकते । लालची लोग ऐसे पाखंडियों के प्रायः शिकार होते हैं । जीभ दिखाकर बच्चे चिढ़ाकर खुश होते हैं लेकिन भिखारी पेट दिखाकर भीख मांगते हैं । कुछ लोग विश्वास दिलाने के लिए बड़े उत्साह से कहते हैं - आप कहें तो छाती चीर कर दिखा दूं । भक्त हनुमान ने अपनी समर्पत भक्ति और विश्वास का प्रमाण अपनी छाती कर दिया था। मोह-ममता दिखाना, प्रेम दिखाना, गुस्सा दिखाना, उदारता दिखाना, घूंसा दिखाना, भय दिखाना, ऊपरी या झूठा प्रेम दिखाना, कागजों आदि में झूठा खर्च या बंटवारा दिखाना आदि न जाने कितने प्रयोग हैं जहाँ यह शब्द बराबर उपस्थित रहता है। वैसे समझदार वे लोग हैं जो पीछे मुड़कर देखने की बजाय बराबर आगे बढ़ते हैं और आगे की शेर देखते हैं।

 

 

 

 

एक शब्द

अगर हम जीवन के अर्थ और मूल्य पर प्रश्न करें तो हम बीमार हैं - सिग्मेंट फ्रॉयड

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