12 फरवरीः
गुलाब दिवस पर विशेष सामग्री
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गुलाब दिवस का गौरवशाली अतीत
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भारत
सरकार ने 12 फरवरी को गुलाब-दिवस घोषित किया है ।
फाल्गुन
महीना पुष्पों का नवजात काल माना जाता है । प्राचीन भारत
में पुष्प दिवस मनाया जाता था ।
‘अभिज्ञान
शाकुन्तलम’
की नायिका कण्व के आश्रम में नव विकसित पुष्पों का जन्म
दिन मनाती थी । आम्र के पल्लव से बने बन्दनवार से कुटीर
सजते थे । पुष्पों के स्तवक से यज्ञ परिसर अलंकृत किया
जाता है था । बौद्ध काल में अशोकोत्सव का आयोजन होता था ।
पुष्पोत्सव भारतीय संस्कृति की पहचान बन गई थी जिसका
प्रसार महाद्वीपों में फैला । फ्रांस के ग्राम्यांचलो में
फ्लोरा पर्व मनाया जाता था। फ्लोरा फूलों की अधिष्ठात्री
हैं । रोम का फेमिना समारोह फूलों का पर्व है । भारत की
शाकम्भरी देवी पुष्पों की देवी है । शाकम्भरी की इटली
संस्कृति फेमिना देवी है । इनकी मूर्ति रंग बिरंगे फूलो से
सजायी जाती थी । पुष्प पर्यावरण की रक्षा करता है जिससे
परिसरीय वातावरण स्वच्छ और सुरक्षित रहता है । इन्ही अतीत
श्रृंखला को ध्यान में रखकर गुलाब
दिवस मनाया जाता है क्योंकि गुलाब सभी फूंलों का राजा हैं
। वह सभी फूलों का
प्रतिनिधित्व करता है ।
‘है
गुलाब-फूलों का राजा, लिली फूलों की रानी’
। गुलाब शंकर का प्रिय पुष्प है ।
गुलाब तेरे रंग
बिरंगे नाम
गुलाब के संस्कृत पर्याय है । अपनी रंगीन पंखुड़ियों के
कारण गुलाब पाटल है, सदैव तरूण होने के कारण तरूणी, शत
पत्रों के घिरे होने पर
‘शतपत्री’,
कानों की आकृति से
‘कार्णिका’,
सुन्दर केशर से युक्त होने
‘चारुकेशर’,
लालिमा रंग के कारण
‘लाक्षा’,
और गन्ध पूर्ण होने से गन्धाढ्य कहलाता है । फारसी में
गुलाब कहा जाता है और अंगरेज़ी में रोज, बंगला में गोलाप,
तामिल में इराशा, और तेलुगु में गुलाबि है । अरबी में गुलाब
‘वर्दे’
अहमर है । सभी भाषाओं में यह लावण्य और रसात्मक है। शिव
पुराण में गुलाब को देव पुष्प
कहा गया है । ये रंग बिरंगे नाम
गुलाब के वैविध्य गुणों के कारण इंगित करते हैं ।
इतिहास के
दर्पण में गुलाब
असीरिया की शाहजादी पीले गुलाब से प्रेम करती थी और मुगल
बेगम नुरजहाँ को लाल गुलाब अधिक प्रिय था । मुगलानी
जेबुन्निसा अपनी फारसी सायरी में कहती है
‘मैं
इतनी सुन्दर हूँ कि मेरे सौन्दर्य को देखकर गुवाब के रंग
फीके पड़ जाते है ।’
रजवाडे़ गुलाब के बागीचे लगवाते थे । सीरिया के बाशाद
गुलाबों का बाग स्थापित करते थे । पं. जवाहर लाल नेहरू
गुलाब के प्रतीक माने जाते हैं । यूरोप के दो देश का
राष्ट्रीय पुष्प सफेद गुलाब और दूसरे देश का राष्ट्रीय
पुष्प लाल गुलाब थे । दोनों
देशों के बीच
'गुलाब युद्ध छिड़ गया था । इसके बावजूद
यूरोप के कुछ देशों ने गुलाब को अपना राष्ट्रीय 'घोषित
किया है । राजस्थान की राजधानी जयपुर को
गुलाबी नगर कहा जाता है
। गुलाब के इत्र का आविष्कार नूरजहाँ
ने किया था ।
विश्व काव्य
में गुलाब
गुलाब ने अपनी गन्ध और रंग से विश्व काव्य को अपना माधुर्य
और सौन्दर्य प्रदान किया है । रोम के प्राचीन कवि वर्जिल ने अपनी
कविता में वसन्त में खिलने वाले सीरिया देश के गुलाब की
चर्चा की है । अंगरेज़ी साहित्य के कवि टामस हूड ने गुलाब
को समय के प्रतिमान के रुप में प्रस्तुत किया है । कवि
मैथ्यू आरनाल्ड ने गुलाब को प्रकृति का अनोखा वरदान कहा है ।
टेनिसन ने अपनी कविता में नारी को गुलाब से उपमित किया है
। हिन्दी के श्रृंगारी कवि ने गुलाब को रसिक पुष्प के रुप
में चित्रित किया है
‘फूल्यौ
रहे गंवई गाँव में गुलाब’
।
कवि देव ने अपनी कविता में बालक बसन्त का स्वागत गुलाब
द्वारा किए जाने का चित्रण किया है । कवि श्री
निराला ने गुलाब को पूंजीवादी और शोषक के रुप में अंकित
किया है । रामवृक्ष बेनीपुरी ने इसे संस्कृति का प्रतीक
कहा है ।
गुलाब का वासन्ती संदेश
गुलाब शान्ति और सौम्यता का प्रतीक है। वह सूर्य की ऊर्जा
से खिलता है। उसका श्वेतरंग शान्ति और विश्व मैत्री का
सन्देश देता है, पीला रंग प्रेम को आमन्त्रण देता है,
गुलाब काँटो में खिलता है जिसका संन्देश युवकों को जाता है
- ‘दुःख
और अवसाद की संकट-कण्टकमयी बेला में
मेरी तरह मुस्काते
रहो ।
गुलाब फूलों की
खेतीः आर्थिक स्रोत
ग्रामीण किसान गुलाब की खेती कर अपनी आर्थिक व्यवस्था को
सुदृढ़ करते है। फूल के हाट में गुलाब के गजरे खूब बिकते
हैं। गुलाब की पंखुडियों और शक्कर से गलकन्द बनाया जाता है।
गुलाब जल और गुलाब इत्र के कुटीर उद्योग चलते है। उत्तर
प्रदेश में कन्नौज, जौनपुर आदि
में गुलाब के उत्पाद की उद्योगशाला चलती है। दक्षिण भारत में
भी गुलाब के उत्पाद के उद्योग
चलते हैं । दक्षिण भारत में गुलाब
फूलों का खूब व्यापार होता है । मन्दिरों, मण्डपों, समारोहों,
पूजा-स्थलों आदि स्थानों में गुलाब फूलों की भारी खपत होती
है। यह अर्थिक लाभ का साधन है।
वहाँ हजारों ग्रामीण युवा फूलो को अपनी
आय का माध्यम बना लेते हैं।
प्रदूषण का
संहार
गुलाब का जन्म प्रदूषण के लिए हुआ है । आज देश में
अराजकता, आतंक, देश द्रोह, हिंसा और देश विभाजन की
गतिविधियाँ चल रहा है । गुलाब इन कांटो के बीच हंस रहा है
। कही वह विप्लव का पान्जन्य ही न फूँक दे
?
आज गुलाब दिवस है । हमें घर-आंगन में गुलाब उगाना चाहिए ।
गुलाब प्रदूषण की रोकथाम कर पर्यावरण को सुवासित करता है ।
इसकी छटा नयनाभिराम दृश्यों को जन्म देती है । गुलाब फागुन का
सौन्दर्य है । इसके मूक सन्देश में विश्व शान्ति का मंत्र
है । गुलाब वैश्विक माधुर्य समर्थन करता है -
‘मधुवाता
ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः’।
‘मधु
मन्मे निष्क्रमणाम्, मधुमन्मे परायम्’
।
‘मधुवाचा
वदामि, मधुमद् भूसायः संदृशः ।’
O
बनवारी लाल ऊमर वैश्य
डंकीनगंज, मीरजापुर
उत्तरप्रदेश,
231001