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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की पुख्ता पहचान स्थापित करने की मुहीम

प्रकाशन :बुधवार, 8 फरवरी 2012
विपिन चौधरी

हा जाता है कि सच्चा लोकतंत्र वही है जहाँ इंसान अपने अधिकारों को साथ ले लेकर पैदा होता है पर हमारा अपना भारत देश इस कथन पर कितना खरा उतरता है इस सच को हम अछ्छी तरह से जानते हैं। आज भी हमारे देश में करोड़ों लोगो को ये भी नहीं पता है की हमारे अधिकार क्या और कौन-कौन से हैं। खेद की बात तो यह है कि देश की आधी आबादी जिस में महिलाएं शामिल हैं वे तो लगता है की बिना किसी अधिकारों के ही काम चला रही है। महिलाओं को अधिकारों से लैस करने में हमारा समाज आज भी आना कानी करता रहा है।

भारत जैसे देश में महिला सशक्तिकरण का काम दुरूह इसलिए भी है क्योंकि सशक्तिकरण की इस प्रक्रिया में एक तो पुरुषों, महिलाओं और युवाओं के दिलो-दिमाग में से लैंगिक पूर्वाग्रह को निकालना है और इसके बदले में सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रत्यारोपण करना है। इस काम को अंजाम देने के लिए परिवार और समाज का समर्थन जरूरी है बिना उनके समर्थन के महिलाओं की उन्नति की दिशा में कोई काम नहीं हो सकता।

अभी कुछ समय पहले तक समाज के व्यवहार में परिवर्तन लाने के साधन सीमित हुआ करते थे।पिछले दशक में हुई संचार क्रांति में हुए परिवर्तनो ने विश्व भर के लोगों को मानों एक छोटे से दायरे में ला दिया जिससे लोगों में आपसी सामंजस्यता का इजाफा हुआ और संसार भर की महिलाओं में जागरूकता बढ़ी।

इन सब आधुनिक समय की चेतनाओं के बावजूद आज की वास्तविकता यह है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने महिलाओ की भूमिका को पारंपरिक स्टीरियो टाइप बना रखा है जो महिलाओं की नकारात्मक छवि ही पेश करती है।

और दूसरी तरफ यह भी सच है कि पूरे संसार में महिलाओं को पुरुषों के बराबर हक नहीं है। तभी विश्व स्तर पर महिलाओं की अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक स्तर पर कानून बनाये गए है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्मित योजनाये

ज्यादा नहीं महज पचास साल पहले अक्टूबर 1945 में सयुंक्त राष्ट्र का चार्टर अस्तित्व में आया तबसे ही महिलाओं के अधिकारों को लेकर विश्वव्यापी मुहीम चल पडी थी।पूरे संसार में महिलाओं के अधिकारों को नए सिरे से परिभाषित किया जा जाने लगा था। जिसके फलस्वरूप महिलाओं की विकास को नया आवरण देने की नई-नई परिभाषाएं अस्तित्व में आती रही। सयुंक्त राष्ट्र ने जो महिलाओं के लिए अंतररास्ट्रीय स्तर पर मानक निर्धारित किये उनके अनुसार महिलाओं के अधिकारों को मजबूती देने के लिए मुख्यतः पाँच संधियां हैं,
महिलाओं के राजनैतिक अधिकार के लिए संधि १९५२
विवाहित महिलाओं के लिए राष्ट्रीयता संधि १९५७
महिलाओं के जीविकोपार्जन के लिए संधि १९५६
शादी की सहमति पर संधि १९७९
महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर संधि १९७९

संयुक्त राष्ट्र ने अंतर राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक मुहीम चलाई जिससे संसार भर के लोगो का ध्यान महिलाओ की समस्याओं की ओर आकर्षित हुआ। वर्ष 1975में मेक्सिको शहर में अंतरराष्ट्रीय महिला वर्ष मनाया गया जिसमे संसार भर की जागरूक महिलाओं और महिलाओं के सरोकारों को लेकर चिंतित लोगो ने हिस्सा लिया। उसके बाद 1980 में कोपेंन्हेगन और 1985 में नैरोबी में अंतरराष्ट्रीय वर्ष का आयोजन हुआ। चौथी बार महिला केंद्रित आयोजन इस वर्ष का आयोजन बीजिंग,चीन में वर्ष 1995 में हुआ। इन सभी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के फलस्वरूप समूचे संसार की में महिलाओं की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। महिलाओं की वर्तमान दशा पर चिंता जताते हुए समाज की सभी इकाईयों में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए विचार विमर्श जारी किया गया।

महिलाओं को लेकर कई महतवपूर्ण कार्यवाहीयों की लंबी श्रंखला में एक नई कड़ी उस वक्त जुडी जब 1979 में संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक बिल पेश किया गया जिसका उद्देश्य महिलाओं के प्रति किये जाने वाले भेदभावों को खतम करने के लिए कोई ढोस योजना का निर्माण करना था। इसी बिल में महिलाओं के प्रति बरती जाने वाली असमानताओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्यवाही को अंजाम देने के लिए एक एजेंडा बनाया गया। इस बिल में प्रस्तावना के अलावा 30 लेख भी हैं इसके तहत राष्ट्रीय कार्रवाई के लिए एक व्यापक एजेंडा तैयार किया जिसका प्रमुख कार्य महिलाओं के प्रति दोयम दर्जे के भेदभावो को समाप्त करना था।

संयुक्त राष्ट्र अपने इन अंतरराष्ट्रीय संधियों और सम्मेलनों के जरिये अनेक राष्ट्रों के बीच महिलाओं को क़ानूनी और सामाजिक पहचान स्थापित करने के लिये अनेकों उपक्रम कर रहा हैं जो आज भी जारी हैं।

इसके अलावा 1946 महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक आयोग का गठन संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद ने किया जिसका काम महिलाओं की दशा पर निगरानी रखना और संसार के सभी वर्गों में महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देना है।

महिलाओं के अधिकारों को मानव अधिकार में शामिल किया जाना

ये वर्ष 1993 ही था जब विएनना, ऑस्ट्रिया में आयोजित विश्व सम्मेलन में इस बात कि पुष्टि कि की महिलाओं के अधिकार भी मानव आधिकारों की श्रेणी में आते हैं। महिलाओं के अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिल के जरिये एक क्रांति की कोशिश की गयी। इस बिल में महिलाओं पर होने वाले भेदभावों की जानकारी दी गयी और उन्हें खत्म करने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यसूची पेश की।

1993 का यह सम्मेलन वस्तुतः एक मानव अधिकार संधि है जिसमे महिलाओं के लिंग संबंधी अधिकारों की पुष्टि की और उसने लिंग संबंधी भूमिकाओं में संस्कृति और परंपरा की भूमिका इंगित किया क्योंकि यही सब चीज़े मिलकर परिवार के संबंधों को आकार और महिलाओं के लिंग संबंधी अधिकारों को पुख्ता करते हैं।

1975 में महिलाओं को विकास की प्रक्रिया के लिए एकीकृत करने की जरुरत को ध्यान रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर 1975 में रखा गया था।

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1976 में स्थापित संयुक्त राष्ट्र विकास निधि का काम 1976 में महिलाओं के विकास के लिए परियोजनाओं के लिए प्रत्यक्ष समर्थन प्रदान करना था।

महिला सशक्ति कारण के कई कारक

समानता, स्वतंत्रता और न्याय इन तीनों पर महिलाओ पर जितना अधिकार होना चाहिए था उतना नहीं हो सका है। आज भी सामाजिक प्रथाओं का बोझ महिलाओं को अपने कंधे पर ढोना पड़ता है।

महिलाओं को राजनीति, सामाजिक, आर्थिक, सांकृतिक एवं नागरिक सभी तरह के अधिकारों पर पूरा अधिकार पर अपने आस पास की महिलाओं को प्रदान करना आज सबसे बड़ी आवश्यकता है।

इस आधुनिक समय में जहाँ आज़ादी का डंका पीटा जाता है वही एक महिला को संवैधानिक और प्राकृतिक अधिकारों से वंचित रखा जाता है और दूसरे उस पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार भी होते हैं। यही समय है जब महिलाओं को सशक्त करने के लिए सांस्कृतिक कारकों पर ज्यादा ज़ोर देना होगा और इस बात की पड़ताल करनी होगी कि महिलाओं की मुक्ति की प्रक्रिया में इन सांस्कृतिक बाधाओं कैसे हटाया जा सकता है और इस कार्य में स्थानीय से लेकर राष्ट्र और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परस्पर सहयोग की जरुरत है।

अभी भी महिलाओं को घरेलू, सामुदायिक, सामाजिक और राजनैतिक स्तर पर एक सामान स्वतन्त्र इंसान के तौर पर पहचान होनी बाकि है और यदि इन में से एक भी स्तर पर कोई कमी पेशी रहती है तो स्त्री सशक्तिकरण आधी अधूरी ही मानी जायेगी।

  विपिन चौधरी
मकान न. 1008
हाउसिंग बोड कलोनी, सेक्टर 15-ए,
हिसार, हरियाणा-125001
vipin_c_2002@yahoo.com
 
         
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