भारत में नेताओं के भरोसे कुछ नहीं छोड़ा जा सकता
उसकी सरकारें नहीं कर पाई हैं। उस वक्त ममता बैनर्जी कांगे्रस में थीं, और ऐसा लगता है कि कत्ल की साजिश की उनकी यह कल्पना या उनका यह बहाना, उन दिनों के अनुभव पर आधारित हैं। जब इंदिरा और संजय गांधी ... पढ़िए
बाजार और मीडिया के बीच भारतीय भाषाएं
भारतीय भाषाओं और बोलियों के सामने यह सबसे खतरनाक समय है। आज के मुख्यधारा के मीडिया के पास इस संदर्भों पर काम करने का अवकाश नहीं है। किंतु समाज के प्रतिबद्ध पत्रकारों, साहित्यकारों को आगे आकर इस चुनौती को स्वीकार करने ... पढ़िए
लेखक,गायक गजानन वर्मा नहीं रहे
रतनगढ़, राजस्थानी के सुप्रसिद्ध गीतकार, संगीतकार गजानन वर्मा का गुरुवार को दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शक्रवार को उनके पैतृक गांव रतनगढ़ में किया गया। 23 मई 1926 को रतनगढ में जन्में गजानन वर्मा 86 ... पढ़िए
प्रबोध
थाईलैंड में समुद्र मंथन
ललिता पवार की कुछ बातें
फिल्म ‘रामशास्त्री’(1944) में अपनी खराब हो चुकी बायीं आंख का कलात्मक प्रयोग क्रूर और परंपरागत सास की भूमिका में किया। उनकी यह भूमिका उनका सर्वाधिक मशहूर स्क्रीन इमेज बन गई। 1960 और 1970 के दशकों में ललिता बहुधा इस छवि में ... पढ़िए
जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा का 9वाँ राज्य सम्मेलन
बिहार। ‘विकल्प’ अखिल भारतीय जनवादी सांस्वृळतिक सामाजिक मोर्चा से सम्बध्द बिहार राज्य जनवादी सांस्वृळतिक मोर्चा का 9वॉं सम्मेलन छपरा के सारण-जनपद के गॉंव कोहड़ा-बाजार में भारी उत्साह एवं साहित्य-कला-संस्कृति के क्षेत्र में नई संकल्पबध्दता के साथ 24 से 26 मार्च, 2012 ... पढ़िए
ऐ पिता !
मुस्लिम समाज में तलाक का बढ़ता हुआ रुझान
लेकिन अगर हालात ऐसे पैदा हो जायें कि तलाक के बिना चारा न रहे तब बिला शक तलाक का हक़ इस्तेमाल किया जाये, बात बेबात तलाक देना गजबे इलाही को दावत देने के मोतरादिफ है, हदीस शरीफ में है कि'' निकाह ... पढ़िए
इंटर नेट और ई मेल
भारत के मुस्लिमों में लिंग अनुपात हिंदुओं से बेहतर क्यों?
एब्सर्ड नाटकों के जनक हैं भुवनेश्वर :नंद किशोर आचार्य
दिल्ली। भुवनेश्वर द्वारा लिखित नाटक ‘तांबे का कीड़ा (1946) भारतीय ही नहीं, अंग्रेज़ी तथा अन्य विदेशी भाषाओं में भी लिखा गया पहला ‘एब्सर्ड (असंगत)’ नाटक है। पश्चिम में भी इसकी शुरुआत द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद होती है। अतः भुवनेश्वर को ‘एब्सर्ड ... पढ़िए
मड़प्पा में दबी है एक सभ्यता
हिंदी टीचर
न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद
टाइम्स आफ इंडिया के मालिकों को कि अगर वेतन बोर्ड द्वारा प्रस्तावित तनख्वाह दे दी तो अखबार बंद हो जाएंगे। तब वे लखनऊ में नवभारत टाइम्स के स्थानीय संपादक थे। संपादकीय विभाग के सारे पत्रकारों ने लिखित ज्ञापन देकर उनका विरोध ... पढ़िए
मां और मेरी गांठें
नाच खत्म हुआ। सबने ताली बजाई और चले गए। मैं कहां जाता? मैं वहीं बैठा रहा। मदारी ने मुझसे बहुत कुछ पूछा, पर मैं नहीं बता सका। इसी बात से पिताजी नाराज थे। मैं किसी लायक नहीं था। पर मदारी ने ... पढ़िए
भारतीय भाषाओं को समर्थ बनाने की जरूरतः कुठियाला
सियाह-क़लम मंटो और सियाह-हाशिये
एक इंसान के तौर पर मंटो की परेशानी शायद यह रही कि विभाजन के बाद उन्होंने अपने आपको महज मुसलमान महसूस किया और पाकिस्तान को ही उन्होंने अपना मुल्क समझा। वहाँ की आबो-हवा में वह असंगत विचारों को भी सहज ही ... पढ़िए
राजधानी में गोलीबारी
कहीं कुछ अफसर, कहीं कुछ नेता और बहुत से गुंडे-मवाली जमीनों के काम में अपनी अलग-अलग किस्म की ताकत का खुलकर इस्तेमाल करते हैं और कल शहर के बीच घने इलाके में हुई गोलीबारी ऐसे ही किसी झगड़े की वजह से ... पढ़िए
जिजीविषा का स्रोत
उसकी सरकारें नहीं कर पाई हैं। उस वक्त ममता बैनर्जी कांगे्रस में थीं, और ऐसा लगता है कि कत्ल की साजिश की उनकी यह कल्पना या उनका यह बहाना, उन दिनों के अनुभव पर आधारित हैं। जब इंदिरा और संजय गांधी ... पढ़िए0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (2 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 21 मई 2012,
सुनील कुमार
बाजार और मीडिया के बीच भारतीय भाषाएं
भारतीय भाषाओं और बोलियों के सामने यह सबसे खतरनाक समय है। आज के मुख्यधारा के मीडिया के पास इस संदर्भों पर काम करने का अवकाश नहीं है। किंतु समाज के प्रतिबद्ध पत्रकारों, साहित्यकारों को आगे आकर इस चुनौती को स्वीकार करने ... पढ़िए0 टिप्पणी, अतिक्रमण, (8 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : सोमवार, 21 मई 2012,
संजय द्विवेदी
लेखक,गायक गजानन वर्मा नहीं रहे
रतनगढ़, राजस्थानी के सुप्रसिद्ध गीतकार, संगीतकार गजानन वर्मा का गुरुवार को दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शक्रवार को उनके पैतृक गांव रतनगढ़ में किया गया। 23 मई 1926 को रतनगढ में जन्में गजानन वर्मा 86 ... पढ़िए0 टिप्पणी, हलचल, (12 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 20 मई 2012,
रतनगढ़ से रमेश खत्री की रपट
प्रबोध
2 टिप्पणियाँ, कविता, (52 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 20 मई 2012,
महेंद्र भटनागर
थाईलैंड में समुद्र मंथन
अमृत की कुछ बूंदे गले से नीचे उतर चुकी थी। गर्दन कटने के बाद भी वह दानव अमृत के प्रभाव से मर नहीं सका। दो टुकडॊं में बंटॆ दानव का एक हिस्सा राहू और दूसरा केतु कहलाया। हिन्दु मान्यता के अनुसार ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (14 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : रविवार, 20 मई 2012,
गोवर्धन यादव
ललिता पवार की कुछ बातें
0 टिप्पणी, सिनेमा के शिखर, (12 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 19 मई 2012,
प्रमोद कुमार पांडेय
जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा का 9वाँ राज्य सम्मेलन
बिहार। ‘विकल्प’ अखिल भारतीय जनवादी सांस्वृळतिक सामाजिक मोर्चा से सम्बध्द बिहार राज्य जनवादी सांस्वृळतिक मोर्चा का 9वॉं सम्मेलन छपरा के सारण-जनपद के गॉंव कोहड़ा-बाजार में भारी उत्साह एवं साहित्य-कला-संस्कृति के क्षेत्र में नई संकल्पबध्दता के साथ 24 से 26 मार्च, 2012 ... पढ़िए0 टिप्पणी, हलचल, (9 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 19 मई 2012,
महेंद्र नेह की रपट
ऐ पिता !
0 टिप्पणी, कविता, (16 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शनिवार, 19 मई 2012,
राजेन्द्र प्रसाद काण्डपाल
मुस्लिम समाज में तलाक का बढ़ता हुआ रुझान
लेकिन अगर हालात ऐसे पैदा हो जायें कि तलाक के बिना चारा न रहे तब बिला शक तलाक का हक़ इस्तेमाल किया जाये, बात बेबात तलाक देना गजबे इलाही को दावत देने के मोतरादिफ है, हदीस शरीफ में है कि'' निकाह ... पढ़िए0 टिप्पणी, आलेख, (19 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 18 मई 2012,
मौलाना नदीमुल वाजिदी
इंटर नेट और ई मेल
0 टिप्पणी, बचपन > बाल गीत, (30 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 18 मई 2012,
पी. दयाल श्रीवस्तव
भारत के मुस्लिमों में लिंग अनुपात हिंदुओं से बेहतर क्यों?
मुस्लिमों के लिए तुलनात्मक अनुपात, जो जनसंख्या का 15 फीसदी से कम हैं, 936 रहा। ये अंतर छोटा नज़र आता है, लेकिन आंकड़ों या फिर आर्थिक तौर पर महत्वपूर्ण है। दूसरी तरफ ध्यान दें तो, ईसाई, जो जनसंख्या के 2 फीसदी ... पढ़िए
1 टिप्पणी, प्रसंगवश, (14 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 18 मई 2012,
रूपा सुब्रह्मण्या, मुंबई
एब्सर्ड नाटकों के जनक हैं भुवनेश्वर :नंद किशोर आचार्य
0 टिप्पणी, हलचल, (9 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : शुक्रवार, 18 मई 2012,
दिल्ली अजय कुमार शर्मा
मड़प्पा में दबी है एक सभ्यता
पुरातत्वविद् मड़प्पा की सभ्यता को मुर्दों की घाटी के रूप में चिन्हित करते हैं। बकौल वाजपेयी जिस तरह होड़ का अर्थ होता है आदमी और तोपा का अर्थ तोपना या गाड़ना, उसी तरह इस इलाभे के बँग्लाभाषी मड़प्पा को मोड़पा कहते ... पढ़िए
0 टिप्पणी, आलेख, (35 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 17 मई 2012,
अमरेन्द्र सुमन
हिंदी टीचर
जिसके चारों ओर अशोक और मनी प्लांट लगाये गये हैं। दो-दो मेन गेट हैं। पांचवीं से दसवीं तक की क्लास पहले और दूसरे तल पर होती है, जबकि ग्यारहवीं और बारहवीं की क्लास सबसे ऊपरी अर्थात् तीसरे तल पर होती है। ... पढ़िए
0 टिप्पणी, कहानी, (56 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 17 मई 2012,
ब्रजकिशोर झा
न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद
टाइम्स आफ इंडिया के मालिकों को कि अगर वेतन बोर्ड द्वारा प्रस्तावित तनख्वाह दे दी तो अखबार बंद हो जाएंगे। तब वे लखनऊ में नवभारत टाइम्स के स्थानीय संपादक थे। संपादकीय विभाग के सारे पत्रकारों ने लिखित ज्ञापन देकर उनका विरोध ... पढ़िए0 टिप्पणी, प्रसंगवश, (18 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 17 मई 2012,
के. विक्रम राव, दिल्ली
मां और मेरी गांठें
नाच खत्म हुआ। सबने ताली बजाई और चले गए। मैं कहां जाता? मैं वहीं बैठा रहा। मदारी ने मुझसे बहुत कुछ पूछा, पर मैं नहीं बता सका। इसी बात से पिताजी नाराज थे। मैं किसी लायक नहीं था। पर मदारी ने ... पढ़िए0 टिप्पणी, संस्मरण, (32 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : गुरूवार, 17 मई 2012,
योगिता यादव
भारतीय भाषाओं को समर्थ बनाने की जरूरतः कुठियाला
भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बृजकिशोर कुठियाला का कहना है कि मातृभाषाओं की एकता और अंर्तसंवाद के लिए प्रयास तेज करने की जरूरत है ताकि भारतीय भाषाएं मिलकर अंग्रेजी के साम्राज्यवाद का मुकाबला कर सकें। वे ... पढ़िए
0 टिप्पणी, हलचल, (13 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 16 मई 2012,
-
सियाह-क़लम मंटो और सियाह-हाशिये
एक इंसान के तौर पर मंटो की परेशानी शायद यह रही कि विभाजन के बाद उन्होंने अपने आपको महज मुसलमान महसूस किया और पाकिस्तान को ही उन्होंने अपना मुल्क समझा। वहाँ की आबो-हवा में वह असंगत विचारों को भी सहज ही ... पढ़िए1 टिप्पणी, आलेख, (30 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 16 मई 2012,
बलराम अग्रवाल
राजधानी में गोलीबारी
कहीं कुछ अफसर, कहीं कुछ नेता और बहुत से गुंडे-मवाली जमीनों के काम में अपनी अलग-अलग किस्म की ताकत का खुलकर इस्तेमाल करते हैं और कल शहर के बीच घने इलाके में हुई गोलीबारी ऐसे ही किसी झगड़े की वजह से ... पढ़िए0 टिप्पणी, स्याह सफ़ेद, (17 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 16 मई 2012,
सुनील कुमार
जिजीविषा का स्रोत
0 टिप्पणी, कविता, (29 ) बार देखा गया, प्रविष्ट तिथि : बुधवार, 16 मई 2012,
अशोक सिंघई
Everyday, New Posts, Like, News, Poet, Story, Gazal, Song, novel, blog, Article, music, lyrics, books, review,conference, training etc. On srijangatha Magazine









![Validate my Atom 1.0 feed [Valid Atom 1.0]](valid-atom.png)