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न्यूयार्क
। अमेरिका ।।
भारतीय विद्या भवन न्यूयार्क में अमेरिका की प्रमुख हिन्दी
संस्थाओं के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए भारत के
विदेश राज्य मंत्री श्री आनंद शर्मा ने बताया कि आठवाँ
विश्व हिन्दी सम्मेलन भारतीय विद्या भवन के सहयोग से
न्यूयार्क में आयोजित किया जायेगा । इस सम्मेलन के आयोजन
में भारतीय राजदूतावास वाशिंगटन, भारतीय कौंसिलावास
न्यूयार्क तथा अमेरिका की सभी प्रमुख हिन्दी संस्थाओं का
सहयोग प्राप्त किया जायेगा।
विगत विश्व हिन्दी सम्मेलनों की भांति भारत सरकार का विदेश
मंत्रालय आठवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के आयोजन में भी हर
संभव सहयोग प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि आठवें विश्व
हिन्दी सम्मेलन का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब संयुक्त
राष्ट्र संघ में हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान
दिलाने तथा वैश्वीकरणके परिप्रेक्ष्य में हिन्दी को
ज्ञान-विज्ञान की भाषा के रूप में विकसित करने के प्रयास
चल रहे हैं। यह सम्मेलन निश्चय ही विश्व में हिन्दी के
प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण आयोजन सिद्ध
होगा। उल्लेखनीय है कि लन्दन में हुए विश्व हिन्दी सम्मेलन
में यह घोषणा की गई थी कि आगामी सम्मेलन फिजी में आयोजित
किया जायेगा जबकि वह सूरीनाम में सम्पन्न हुआ। इसी प्रकार
सूरीनाम में प्रतिनिधियों को बताया गया था कि अगला विश्व
हिन्दी सम्मेलन नीदरलैंड में सम्पन्न होगा परंतु अमेरिका
बाजी मार ले गया।
पोर्टलुईस । फिजी ।।
फिजी के प्रसिद्ध हिन्दी सेवी डॉ. विवेकानंद शर्मा का हृदयगति
रूक जाने से गत दिनों ब्रिस्वेन में निधन हो गया। वे कुछ समय
से अस्वस्थ थे। प्रो. शर्मा फिजी की यूनिवर्सिटी ऑफ साऊथ
पैसिफिक के हिन्दी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था ।
उन्होंने 1975 में प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन में फिजी का
प्रतिनिधित्व भी किया था। उस समय वे फिजी सरकार में युवा व
क्रीड़ा मंत्री थे। उनहोंने हिन्दी की कई पुस्तकें लिखी जिनमें
आत्मकथात्मक उपन्यास साहित्य में काफी चर्चित है। डॉ. शर्मा ने
उच्च शिक्षा 1965 से 70 तक दिल्ली विश्व विद्यालय के हिन्दू
कालेज से प्राप्त की थी। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से
तीन पीढ़ी पहले उन्के पूर्वज फिजी में जाकर बस गये थे। उनका
जन्म फिजी में 1939 में हुआ था।
एडीसन
। अमेरिका।।
अगले वर्ष गर्मियों में न्यूजर्सी, अमेरिका के दो जिलों,
एडीसन और वेस्ट विंडसर प्लेसबोरों के मिडिल और हाई स्कूलों
के पाठ्यक्रमों में हिन्दी को स्थान मिलने के साथ ही यहाँ पर
रहने वाले 54,880 हिन्दीभाषी परिवारों की वह मांग पूरी हो
जायेगी जो वे लम्बे समय से करते आ रहे हैं।
एडीसन न्यूजर्सी का पहला और अमेरिका का दूसरा जिला होगा जहाँ
हिन्दी को स्कूलों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जायेगा।
इससे पहले टैक्सास के ह्मूस्टन जिले के स्कूलों में हिन्दी
पढ़ाई जाती है। एडीसन के इस विषय से जुड़े शिक्षा अधिकारी इस
संदर्भ में ह्मूस्टन के अधिकारियों के साथ मिल कर पाठ्यक्रम
तैयार करने में व्यस्त हो गए हैं ताकि अगले वर्ष गर्मियों में
बच्चों को इस भाषा की पढ़ाई करवाई जा सके। एडीसन के अधिकारियों ने इसके लिए केन्द्रीय सरकार से चार करोड़ रुपए के
अनुदान की मांग की है। ज्ञातव्य है कि एडीसन के स्कूलों में इस
समय विश्व भाषा के रूप में फ्रैंच, स्पैनिश और लैटिन भाषाओं को
पढ़ाने का प्रावधान है। इसी प्रकार से वेस्ट विंडसर में जर्मन,
फ्रैंच, सेपैनिश और लैटिन भाषाएं सिखाई जाती हैं। इन स्कूलों
के अधिकारी हिन्दी को लेकर खासे उत्साहित हैं।
अमेरिका में एक गैर सरकारी संस्था हिन्दी यू. एस. ए. बहुत लम्बे
समय से इस बात की मांग करती रही है कि अमेरिका के सभी स्कूलों
में हिन्दी पढ़ाई जानी चाहिए । इसके संयोजक श्री देवेन्द्र
सिंह का कहना है कि हिन्दी विश्व में दूसरे नम्बर पर सबसे अधिक
बोली जाने वाली भाषा है इसलिए इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता । उनका
मत है कि अमरीका में हिन्दी के प्रचार प्रसार से दुनिया के दो
सबसे बड़े लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले राष्टों के परस्पर
संबंध सुदृढ़ होंगें । दोनों राष्ट्रों के लोगों की आपसी समझ
में बढ़ोत्तरी होगी। वैसे भी इन दिनों अमेरिका भारतवर्ष में बहुत
अधिक आउटसोर्सिंग कर रहा है। इससे इन लोगों को परस्पर संवाद
करने में आसानी होगी। इन दिनों बहुत से
अमेरिका छात्र भारत में
पढ़ाई करने में आसानी होगी। इन दिनों बहुत से
अमेरिका छात्र भारत में पढ़ाई करने के लिए भी आ रहे हैं
। यदि उनको हिन्दी का ज्ञान होगा तो वे न केवल अपनी पढ़ाई ठीक
से कर पायेगें बल्कि उन्हें भारत के जन जीवन को भली-भाँति समझने का अवसर भी
प्राप्त होगा।
श्री सिंह का कहना है कि इस समय अमरीका के अनेक प्रान्तों में
जर्मन और फ्रैंच बोलने वालों से कहीं अधिक संख्या हिन्दी बोलने
वाले लोगों की है।
अमेरिका सरकार को इस बात की ओर ध्यान देना
चाहिए।
श्री सिंह ने इस बात पर चिन्ता की है कि न्यूजर्सी के एक अन्य
जिले साउथ बरूनस्विक ने अभी तक उनकी मांग को स्वीकार नहीं किया
जबकि वहां भी हिन्दी बोलने वाले लोग अच्छी खासी संख्या में हैं
। इस जिले के अधिकारियों का कहना है कि हमने अभी-अभी विश्व
भाषाओं के सबंध में
निर्णय लिया है और जो भाषाएं हमने चुनी हैं
उनके पाठ्यक्रम तैयार किए हैं । आखिर किसी नई भाषा की पढ़ाई को
प्रारम्भ करने के लिए कई प्रकार के प्रबंध करने पड़ते हैं इसके
लिए धन की व्यवस्था तो करनी ही होती है उसे पढ़ाने वाले
शिक्षकों की भी जरूरत होती है। इस नीति पर हम 2010 में फिर से
विचार करेगें ।
इस सन्दर्भ में श्री देवेन्द्र सिंह का मानना है कि हम लोग एक
लोकतंत्र में रह रहे हैं यदि जनता की मांग होगी तो अधिकारियों
को उनकी मांग को स्वीकार करना ही होगा। उन्होंने कहा कि हिन्दी
भाषी लोगों को अपनी मांग और अधिक प्रभावी ढंग से उठानी चाहिए।(मनोहर
पुरी की न्यूजर्सी से रिपोर्ट)
लंदन । यू.के ।।
भारत की साहित्यिक संस्था एवं वेबजीन
www.srijangatha.com
द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी को
बढ़ावा देने के लिए प्रकाशित ब्रिंटेन के प्रवासी कवियों की हिंदी कविता संकलन
"यहाँ
से वहाँ तक"
का विमोचन 4 नवंबर को नेहरू सेंटर, लंदन में संपन्न हुआ ।
अवसर था - समकालीन साहित्य सम्मेलन के 29 वां अधिवेशन की
शुभारंभ बेला । विमोचन किया - महामहिम श्री कमलेश शर्मा,
भारतीय उच्चायुक्त, ब्रिटेन ने । अध्यक्ष के रूप में अपना
आशीष दिया - डॉ. रत्नाकर पाण्डे, प्रख्यात हिंदी सेवी एवं
पूर्व सांसद, भारत ने । श्री राजनारायण गति, मॉरीशस, अतुल
खरे, निर्देशक नेहरू सेंटर लंदन, प्रो दशरथ सिंह
मुम्बई, नारायण कुमार, नई दिल्ली ने विशिष्ट अतिथि की
भूमिका का निर्वहन किया । अतिथियों का स्वागत डॉ रत्नाकर
पाण्डे एवं वैभव कार्तिकेय ने किया।
मुख्य अतिथि श्री कमलेश शर्मा ने ब्रिटेन में हिंदी के
विकास के लिए किये जा रहे शासकीय, संस्थागत कार्यों की
विस्तृत जानकारी देते हुए शंका समाधान करते हुए कहा कि
ब्रिटेन के केम्ब्रिज विश्व विद्यालय में हिन्दी की पढ़ाई
बंद नहीं हुई है। कुलपति से मैने चर्चा की है। विश्व
विद्यालय में विद्यार्थी की संख्या कम होने के कारण
चिंतनीय है। पढ़ाई कभी भी बंद नहीं होगा बल्कि हिन्दी का
प्रचार प्रसार लंदन में किया जावेगा।
ज्ञातव्य हो कि इस संकलन में
ब्रिटेन के
24 चर्चित कवियों की100
से अधिक कविताएँ समादृत हैं ये कवि हैं -
सत्येन्द्र श्रीवास्तव,
प्राण शर्मा,
सोहन
राही,
गौतम सचदेव,
डॉ.
कृष्णकुमार,
उषा
राजे सक्सेना,
दिव्या
माथुर,
मोहन
राणा,
पद्मेश
गुप्त,
उषा
वर्मा,
शैल
अग्रवाल,
जय
वर्मा,
ज़किया
ज़ुबैरी,
पुष्पा भार्गव,
तोषा त्रेहन, श्रीमती राज मौडगिल,
सरोज सूद,
डा. इंदिरा आनन्द,
रमा जोशी,
डा.वंदना मुकेश शर्मा, डा. कृष्ण कन्हैया,
सर्वेश सैनी,
चंचल जैन
।
रचनाओं के संकलन में
तेजेन्द्र
शर्मा
ने सहयोग किया है ।
विमोचन अवसर पर सृजनगाथा परिवार के डॉ. बल्देव, गिरीश
पंकज, डॉ. सुधीर शर्मा, डॉ. जे.आर. सोनी, संजीव ठाकुर डॉ.
उर्मिला शुक्ल, त्र्यम्बक शर्मा (सभी रायपुर) और कनक
तिवारी, पुष्पा तिवारी
(बिलासपुर), आलोचक डॉ. रोहिणी
अग्रवाल, दिल्ली, कहानीकार डॉ. मुक्ता, वाराणासी, हिंदी
अधिकारी, उच्चायोग श्री राकेश दुबे आदि ब्रिटेन, मारीशस
तथा भारत के अनेक साहित्यकार मौजूद थे । विमोचनोपरांत सभी
प्रवासी कवियों को कृति की एक-एक प्रति भेंट की गई ।
(लंदन से डॉ.जे.आर.सोनी की रिपोर्ट)

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