रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001  ई-मेलः srijangatha@gmail.com

अपनी बातकविताछंदललित निबंधकहानीलघुकथाव्यंग्यसंस्मरण कथोपकथन भाषांतरसंस्कारपुस्तकायन

बचपनहलचलसृजनधर्मीलेखकों सेसंपादक बनेंचतुर्दिकशेष-विशेषपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

हलचल

 
अमेरिका के कवि देवेंद्र नारायण शुक्ल को अप्रवासी भारतीय सम्मान

रायपुर । भारत ।। छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष दिये जाने वाला छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान अमेरिका निवासी श्री देवेन्द्रनारायण शुक्ल को दिया गया । पश्चिम में रहते हुए भारतीय अस्मिता एवं छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बनाए रखने के लिए यह पुरस्कार 7 नवंबर को राजधानी रायपुर में आयोजित राज्य स्थापना दिवस समारोह में महामहिम राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम द्वारा प्रदान किया गया । पुरस्कार में हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी के कवि श्री शुक्ल को 2 लाख रुपए, प्रशस्ति पत्र तथा प्रतीक चिन्ह प्रदान किये गए । उक्त अवसर पर राज्य के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं आम नागरिक उपस्थित थे ।

 

      उक्त अवसर पर 2006 के लिए इसी तरह 18 अन्य पुरस्कारों से भी विभिन्न व्यक्तित्वों को नवाजा गया जिसमें पं.सुन्दर लाल शर्मा सम्मान (साहित्य एवं आंचलिक साहित्य) छत्तीसगढ़ी के साहित्यकार श्री दानेश्वर शर्मा को, चक्रधर सम्मान (कला एवं संगीत) रायगढ़ घराने के कत्थक गुरु श्री रामलाल को, दाऊ मंदराजी सम्मान (लोककला एवं शिल्प) लोकनाट्य शैली नाचा के बहुचर्चित कलाकार श्री गोविन्द राम निर्मलकर, चंदूलाल चंद्राकर राष्ट्रीय फैलोशिप (पत्रकारिता) संयुक्त रुप से वार्ता के उप संपादक श्री शिरीष चंद्र मिश्रा व डेमोक्रेटिक वर्ल्ड के छत्तीसगढ़ ब्यूरो प्रमुख श्री संजय दीक्षित को, हाजी हसन अली सम्मान (उर्दू भाषा की सेवा) संयुक्त रुप से शायर श्री काविश हैदरी व भाषा सेवी मौलाना मोहम्मद अली फारूकी को प्रदान किया गया ।

 

      ज्ञातव्य हो कि श्री शुक्ल 1982 से अमेरिका में बसे हुए हैं । वे इस समय फेडरेशन आफ नार्दन कैलीफोर्निया यू.एस.ए. के वाइस प्रेसिडेंट है साथ ही सेन फ्रांसिस्को में इंटरनेशनल हिंदी एसोसिएशन के सचिव के रूप में कार्यरत हैं । यू.एस.के अनेक शहरों में कवि सम्मेलन करवाने का श्रेय आपको जाता है । श्री शुक्ल की 2 कृतियाँ प्रवासी एवं दुरिहा छूटगे गाँव प्रकाशित एवं चर्चित हो चुकी है । आज अमेरिका के रियल स्टेट कारोबार में उनकी अलग पहचान है । छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित गनियारी गाँव में एक हाईस्कूल भी उनके प्रयासों से संचालित है जहाँ 400 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं ।

 

 नई दिल्ली । भारत ।। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हिंदी अकादमी ने दो चरणों में आयोजित चार दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया । पहले चरण में त्रिवेणी सभागार में चार संगोष्ठियाँ आयोजित की गई, जिनमें द्विवेदी जी की सांस्कृतिक दृष्टि, उनके निबंधकार व उपन्यासकार पक्ष तथा उनके साहित्येतिहास लेखन पर विचार-विमर्श किया गया । इन सत्रों में डॉ. नामवर सिंह, प्रभाष जोशी, नित्यानंद तिवारी, नंदकिशोर आचार्य, केदारनाथ सिंह, विजयमोहन सिंह, अरुण प्रकाश, डॉ. रोहिणी अग्रवाल, डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी, जवरीमल्ल पारख आदि विद्वानों ने अपने-अपने मंतव्य प्रकट किए ।

 

       आयोजन के दूसरे चरण में आचार्य जी के सर्वाधिक चर्चित उपन्यास बाणभट्ट की आत्मकथा का श्रीराम सेंटर के प्रेक्षागार में सुरेन्द्र शर्मा के निर्देशन में रंग सप्तक के कलाकारों ने मंचन किया । नाट्य प्रस्तुति के अंत में प्रमुख कलाकारों यथा संजय सहाय (सूत्रधार), निपुणिका आदि का अभिनंदन करते समय सांसद जनार्दन द्विवेदी ने उपन्यास पर अपने विचार में कहा कि यह उपन्यास एक सांस्कृतिक उपन्यास है जो इतिहास होते हुए भी समकालीन है । इसमें कुत्सित राजनीति, जातिगत विद्वेष, कर्मकांड, पाखंड और निरंकुश राजसत्ता के अन्याय के विरोध को दर्शाया गया है । समारोह के समूचे आयोजनों में अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. मुकुंद द्विवेदी की उपस्थिति रही । संचालन सचिव नानकचंद ने करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया ।

 

दिल्ली । भारत ।। 'शब्द लिखने के लिए ही यह काग़ज बना है' और 'गंगातट' जैसे कविता-संग्रहों के सुप्रसिद्ध कवि ज्ञानेन्द्रपति को वर्ष 2006 का पहल सम्मान दिये जाने की घोषणा की गई है । पहल सम्मान साहित्यकार सहकारी आधार पर संचालित करते हैं । इसमें 11 हजार रुपयों की राशि और एक कलात्मक प्रतीक समर्पित किया जाता है । यह अठारहवाँ सम्मान आगामी 24-25 फरवरी 2007 को वाराणासी में आयोजन एक कार्यक्रम में उन्हें प्रदान किया जायेगा । इस वर्ष का निर्णायक मत प्रसिद्ध कवि केदारनाथ सिंह के हाथों सुरक्षित था ।

 

 दिल्ली । भारत ।। जानेमाने रचनाकार सुरजीत को कमलेश्वर के उपन्यास 'कितने पाकिस्तान' के पंजाबी में अनुवाद के लिए पंजाबी अकादमी, दिल्ली ने 2005-06 का पंजाबी अनुवाद सम्मान दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित द्वारा प्रदान कर विगत दिनों सम्मानित किया गया । इसमें रचनाकार को 51,000 रुपये, प्रशंसा-पत्र और शील्ड सहित एक शाल भेंट की जाती है । अब तक श्री सुरजीत के हिंदी में 120 किताबें प्रकाशित तथा 25 किताबें प्रकाशनाधीन हैं ।

 

 

 

हलचल

विद्या स्वयं ही एक संपत्ति है- बेकन

आपकी प्रतिक्रिया

अपनी बातकविताछंदललित निबंधकहानीलघुकथाव्यंग्यसंस्मरण कथोपकथन भाषांतरसंस्कारपुस्तकायन

बचपनहलचलसृजनधर्मीलेखकों सेसंपादक बनेंचतुर्दिकशेष-विशेषपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः गिरीश पंकज,संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, संजीव ठाकुर

तकनीकः प्रशांत रथ

Google
WWW http://www.srijangatha.com