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माह के बालकवि |
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विष्णु
कविरत्न |
नल को खाली खुला न छोड़ो
देश
को इससे हानि होती-

नल को खाली
खुला न छोड़ो ।
पानी भी बेकार
हो जाता,
यह पानी किसी
काम न आता ।
पैसा भी बेकार
हो जाता,
नल को खाली
खुला न छोड़ो ।
मेरी प्यारी मोटर कार
मेरी प्यारी
मोटर कार,
रुकती नहीं कभी
बेकार ।
डैडी को दफ़्तर
ले जाती
यह मम्मी को
सैर कराती ।
मुझको भी यह
करती प्यार ।
छुट्टी के दिन
मैं भी जाता
मिन्टू-चिन्टू
को ले जाता।
हँसते-गाते
जैसे त्यौहार ।
मैं पाठशाला जाऊंगा
मै पाठशाला
जाऊँगा,
बस्ता मैं ले
जाऊँगा ।
ठीक समय पर
जाऊँगा,
लेट कभी नहीं
जाऊँगा ।
गुरु को पाठ
बताऊँगा,
उनको शीश
झुकाऊँगा ।
पाठ से जी न
चुराऊँगा,
बड़ों से आदर
पाऊँगा ।।
बबलू पढ़ना सीख रहा है
बबलू पढ़ना सीख
रहा है,
गुड्डू लिखना
सीख रहा है ।
पुस्तक से वह
अक्षर पढ़ता,
यह कापी पर
अक्षर लिखता ।
अँगूली पर वह
गिनता है,
मैं बोलूं वह
सुनता है ।
डम्पू दस तक
गिनती गिनता,
मिन्टू सौ तक
गिनती लिखता ।
बबलू पढ़ना सीख
रहा है
गुड्डू लिखना
सीख रहा है ।
चिड़िया चूं-चूं करती
पेड़ पर
चिड़िया चूं-चूं करती,
नन्हें-मुन्नों
का मन हरती।
जहाँ देखती
दाना-तिनका,
फुदक-फुदक कर
आगे बढ़ती ।
तिनकों से अपना
घर बुनती,
कहीं पड़ा हो
चुग्गा चुगती ।