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हाइकु

प्रकाशन :गुरूवार, 12 जनवरी 2012
राजेंद्र परदेसी

1.

पाती पढ़ते
पाखी बनके मन
उड़ना चाहे

2.

सिद्धार्थ होता
तथागत महान
वृक्ष के नीचे

3.

चीखते सभी
प्रदुषण के लिए
कुल्हाड़ी साथ

4.

कोई लाचारी
आस्तीन में सपोला
पाले रहती

5.

बर्तन खाली
घर में मेहमान
मन उदास

6.

प्यासी धरती
उमस भरा दिन
बादल आस

7.

व्यथा में डूबा
टिमटिमाता दिया
निहारती माँ
  राजेंद्र परदेसी
बी-1118, इंदिरा नगर,
लखनऊ-226016
rajendrapardesi@gmail.com
 
         
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