राजू बचपन से ही चिकनाई शब्द सुनता आ रहा था ।
चिकनाई यानि चोपड़ जिसे शुद्ध भाषा में चिक्कण या लास्य कहा जाता है वही । राजू जैसे बड़ा होने लगा उस का चोपड़ या चिकनाई से परिचय प्रगाढ़ होने लगा । माँ उस की भाभी को कहती कि इस की रोटी ठीक से चुपद दे । छोंक लगाने के लिए या तड़का लगाने के लिए भी चोपड़ यानि चिकनाई की आवश्यकता पडती है । कई सब्जियां जैस बैंगन आदि में तो अधिक चिकनाई पडती ही है । तभी वह स्वादिष्ट बनती है। कभी-कभी उस की माँ सब्जी में भी घी डाल देती जो कई बार उस की कमीज पर टपक जाता या सिर में तेल लगाते समय भी एक दो टपका कपड़ों पर टपक जाता और कमीज चिकनी हो जाती । फिर माँ डांटती कि ये चिकनाई खाने या लगाने के लिए है या कपड़ों पर गिराने के लिए है।
राजू अब धीरे-धीरे बड़ा होने लगा तो उस की समझ में अब अच्छी तरह आ गया कि चिकनाई जैसी भी कोई चीज होती है जिसे हाथ लगाने से स्वाभाविक फिसलन जैसी होती है यह बात धीरे-धीरे उस के दिमाग में क्या आ गई गहरे रक पैठ गई । बस फिर क्या था जैसे न्यूटन के सामने पेड़ से सेब क्या गिरा मास्टर जी ने बताया कि न्यूटन ने नई खोज कर ली थी गुरुत्व आकर्षण की । वाह क्या सिद्धांत खोज लिया धन्य है न्यूटन क्योंकि यूं तो अनंत काल से सेब क्या पता नही क्या गिर रहा है आसमाँ से तारे तक टूट-टूट कर गिर रहे हैं पेड़ से पत्ते फूल व फल की तो बात बहुत छोटी है और तो और आदमी भी गिर रहा है और इतना गिर रहा है कि जिस की कोई हद ही नही होती पर न्यूटन के सामने गिरे सेब की तो बात ही और थी पता नही वह न्यूटन जी के सामने किस तरह गिरा होगा जो उस का दिमाग चकरा होगा और महान खोज हो गई होगी।
पर यहाँ तो किसी ने बरगद में जब छोटे-छोटे फल लगे देखे तो उस वैज्ञानिक का भी दिमाग बहुत चकराया और उस ने तो भगवान की ही ऐसी तैसी करनी शुरू कर दी कि बताओ लोग बिना बात भगवान को बुद्धिमान बताते हैं पर लगता है वह है नही यदि वह बुद्धिमान होता तो इतने बड़े बरगद के पेड़ में भला इतने छोटे फल लगताऔर तरबूज के फल इतनी पतली बेल में लगता वह तो बड़ा वैज्ञानिक था पर अपने आप को सरस्वती के पुत्र कहलाने वाले साहित्यकार भी भला इस में कहाँ पीछे रह पाए वे भी भगवान की भूल सुधरने में भला कहाँ पीछे रहे तभी तो कह दिया " इन डारिन ये फूल "यानि कांटे वाली डंडी में इतना सुकोमल सुंदर गुलाब। पर जब उस वैज्ञानिक के सिर पर बरगद के पेड़ का फल यानि बड्कोला गिरा तो उस की समझ में आया कि भगवान ही बड़ा है उस से बड़ी कोई खोज और हो ही नही सकती ।
पर न्यूटन भी यदि कुछ और सोच लेता तो भला वैज्ञानिक बनता फिर कैसे उस का दुनिया में नाम होता परन्तु यह बात और है कि हिन्दू शास्त्रों में यह सब पहले से ही मौजूद है जैसे वैमानिकी विज्ञान या बैटरी कैसे बनती है या सोना कैसे बनाया जाता है जिसे बिरला मन्दिर में बना कर दिखया था आदि। पर इस सब को तो पोंगा पंथी कह कर ठुकराया जाना ही आज का विज्ञान है आखिर नई-नई खोज तो होनी ही चाहिए।
इसी लिए राजू भी न्यूटन की ऐसी तैसी कर के कोई नई खोज करना चाहता था न्यूटन भला राजू के सामने क्या था क्यों कि राजू ने भी चिकनाई को पकड़ लिया था । उस के भी हाथ पैर कई कई जगह फिसल चुके थे यानि जहाँ चिकनाई होती है वहाँ कोई चिपचिपा सा पदार्थ जरूर होता है उस ने एक दिन मटके यानि घड़े में देखा जिस में कई दिन से पानी पड़ा था उस के टल में भी कुछ चिकनाई सी थी तलब या पोखर के किनारों पर चिकनाई होती है जहाँ वह अपनी प्यारी भैंस को पानी पिलाते हुए कई बार फिसला तथा , कई बार वह बारिश के पानी में फिसला था।
आखिर उस ने निष्कर्ष निकला कि जहाँ पानी होता है या जो चीज पानी के सम्पर्क में आती है वहाँ ही चिकनाई होती पैदा होती है जैसे गाय को पानी पिलाते हैं तो उस पानी के कारण ही दूध में चिकनाई यानि घी बनता है इसी तरह बिना बरसात के पानी यानि सूखे में भी भला कोई फिसल सकता है यानि पानी के धरती पर गिरने से ही चिकनाई उत्पन्न होती है राजू ने खोज कर ली कि पानी से ही चिकनाई उत्पन्न होती है भला अब न्यूटन राजू के सामने क्या बेचता राजू ने अपना सिद्धांत प्रतिपादित व स्थापित कर दिया कि पानी ही चिकनाई का जनक है। बस अब क्या था अब तो बस उसे पहचान या ख्याति मिलना ही बाक़ी था खोज तो पूरी हो ही चुकी थी। आखिर गाँव के हर थोक यानि मोहल्ले-मोहल्ले में राजू की काबलियत की चर्चा होने लगी ।लड़का तो बड़ा होनहार है साईंस दां बन गया है। एक दिन दुनिया में इस का नाम तो रोशन होगा ही साथ ही गाँव का नाम भी जरूर रोशन होगा।
इधर राजू के नाम की चर्चा हो रही थी उधर स्कूल में उस का वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित हो गया। एक ही कक्षा में वह तीसरी बार असफल यानि फेल हो चुका था क्यों कि पेपर में न्यूटन का सिद्धांत पूछा जाता परन्तु राजू "पानी में चिकनाई है" अपने इस सिद्धांत को ही प्रतिपादित करता वह न्यूटन के सिद्धांत के बजाय अपनी खोज को ढाई सौ शब्दों में निबन्ध के रूप में लिखता था कि शायद परीक्षक उसे नई खोज के लिए मुखालय बुला कर सम्मानित करवाएंगे । आखिर राजू परीक्षा ही पास नही कर पाया । वह अपने सिद्धांत को प्रतिष्ठा यानि मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष करता रहा कि हो सकता है लोग बाद में उसे उस की खोज के लिए सम्मानित करें कि एक ग्रामीण बालक ने पानी में चिकनाई की कितनी महान खोज कर दी ।
परन्तु चिकनाई को तो पकड़ने के लिए और बहुत कुछ चाहिए था जो भला वहाँ कहाँ था चिकनाई तो बड़े शहरों में होती है जहाँ क्रीमी लेयर होती है। जहाँ लगाने की ही बात नही होती वहाँ भोजन में भी क्रीम डाल कर खाने की बात होती है क्यों कि आज देहात का सारा दूध तो शहर में आ जाता है फिर चिकाने भला देहात में कहाँ से आई और जिन के पास थी भी तो वह उन की अपनी चिकनाई थी दूसरों के लिए थोड़ी थी अपितु उन्होंने तो दूसरों की भी छीन कर अपनी चिकनाई कई गुणा बढ़ा ली थी।
परन्तु राजू निराश नही हुआ वह अपनी खोज पर अडिग रहा पढाई छोट गई बड़ा हो गया काम कोई था नही किसी राजनीतिक पार्टी में सम्मलित हो गया और उसे चुनाव में टिकिट भी मिल गया। आखिर राजू था तो धुन का पक्का कि वह भी एक दिन पानी में से चिकनाई पैदा कर के ही दम लेगा । चुनाव में किस्मत और उस के रोशन हो चुके नाम ने जोर मारा और राजू चुनाव जीत गया । इलाके का नेता बन गया।
बस फिर क्या था अब तो आप समझ ही गये होंगे की अब वह क्या चीज हो गया था क्यों कि अब तो वह पानी पानी क्या रेत मिट्टी पत्थर क्या किसी भी चीज में से चिकनाई निकल लेता है और खूब चिकनाई इकट्ठी भी कर ली है क्योंकि उस ने बचपन में ही पानी के अंदर से चिकनाई खोज ली थी जो हरेक के बस की बात नही थी अब हर जगह नेता जी ही पूछे जाते हैं हर स्थान यानि शमशान से ले कर शौचालय तक के उदघाटन का फीता उन्हें ही काटना होता है क्यों कि वे बड़े वैज्ञानिक, समझदार, बुद्धिमान और चिंतक जो हो गये हैं क्यों कि इन्हें अच्छी तरह पता है कि किस चीज में से कैसे चिकनाई को निकला जा सकता है।
डॉ. वेद व्यथित
अनुकम्पा -1577 सेक्टर-3,
फरीदाबाद-121004, हरियाणा.
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dr.vedvyathit@gmail.com


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