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भौतिकी का नोबेल 2011-फैलता ब्रह्मांड

प्रकाशन :मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011
डॉ. बी.डी. श्रीवास्तव

रॉयल स्वीडिश एकेडेमी ऑफ साइंसेज ने भौतिकशास्त्र में इस वर्ष का नोबेल पुरूस्कार तीन वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के फैलाव को समझने की दिशा में किये गये उनके शोध के लिए घोषणा की है। ब्रह्मांड के शोधकर्ताओं ने फटते हुए तारों के जरिए ब्रह्मांड के फैलने की गति तेज होने के बारे में जानकारियाँ दी हैं। उनके मुताबिक ब्रह्मांड का विस्तार जिस तेजी से हो रहा है, उससे एक दिन यह बर्फ में तब्दील हो जाऐगा। अमेरिकी मूल के तीनों वैज्ञानिक -साउल पर्लमुट्टर, ब्रायन श्मिट और एडम रीस ब्रह्मांड के भविष्य के बारे में तारों के विखंडन का अध्ययन कर ब्रह्मांड के विस्तार में तेजी आने की बात साबित की। इसके पूर्व वैज्ञानिको की धारणा यह थी कि ब्रह्मांड के फैलाव की गति में लगातार कमी आ रही है। एक दल ने 1990 के दशक में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के पर्लमुट्टर के नेत्तृव में व दूसरे दल में श्मिट और रीस ने एक साथ मिलकर दो अलग-अलग अनुसंधान दलों में शोध कार्य किया।

अब तक खगोल वैज्ञानिकों के पास तीन प्रतिद्वंदी सिद्धांत हैं। प्रत्येक सिद्धांत की भविष्यवाणी को ब्रह्मांड के अवलोकित गुणों से मिलाकर देखने के बाद, वे निर्णय लेते हैं कि कौनसा सिद्धांत लोकप्रिय है। बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार 180000 लाख वर्ष पहले एक भयानक विस्फोट में ब्रह्मांड की उत्पति हुई। इस विस्फोट में पदार्थ बाहर निकले जो गुच्छों में संघनित हो गये जिसे आकाशगंगा कहते हैं जो अभी भी बाहर की तरफ बढ़ रही है। जैसे जैसे ब्रह्मांड पुराना होता जायेगा, इसका पदार्थ समाप्त हो जायेगा। विस्तार अनंतकाल से जारी है। दोलन ब्रह्मांड सिद्धांत जो कि बिग बैंग सिद्धांत का परिवर्तित रूप है, का मानना है कि ब्रह्मांड का विस्तार अंततः धीमा होकर रूक जायेगा और आकाशगंगा सिमटकर एक अन्य बिग बैंग करेगा इस तरह ब्रह्मांड विस्तार और संकुचन के अंतहीन चक्र से गुजर रहा है। किन्तु प्रकृति का नियम प्रत्येक चक्र में अलग हो सकता है। स्थायी अवस्था सिद्धांत बिग बैंग सिद्धांत का वैकल्पिक विचार है, इस सिद्धांत का कहना है कि ब्रह्मांड किसी एक क्षण में नहीं पैदा हुआ और न ही कभी एक क्षण में मरेगा। इसके अनुसार जैसे ही ब्रह्मांड का विस्तार होता है वैसे ही खाली स्थान को भरने के लिए नये पदार्थ की रचना हो जाती है। इसीलिये समय के साथ ब्रह्मांड एक जैसा ही दिखता है।

वर्तमान अध्ययन में तीनों नोबेल विजेता वैज्ञानिकों ने खास तरीके के फटता हुआ तारा यानि की सुपरनोवा के अध्ययन के जरिए ब्रह्मांड के फैलाव को समझने की दिशा में किये गये प्रयोगों व गणनाओं को अंजाम दिया।

रॉयल स्वीडिश एकेडेमी ऑफ साइंसेज के अनुसार, अपने अध्ययन के दौरान इन वैज्ञानिकों ने पाया कि पचास से भी अधिक सुपरनोवा से निकल रहा प्रकाश अपेक्षा से कम है। जिससे संकेत मिलता है कि ब्रह्मांड तेजी से फैल रहा है। करीब एक शताब्दी तक हम यह जानते थे कि ब्रह्मांड 14 अरब वर्ष पहले बिग बैंग के अनुसार ही फैल रहा है। लेकिन इन वैज्ञानिकों प्रयोग व गणना ने इस अवधारणा को बदल दिया है। इस नई गणना से यह पता लगता है कि ब्रह्मांड में फैलाव आश्चर्यजनक रूप से काफी तेजी से हो रहा है। शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि अगर विस्तार की गति इसी रथ्तार से बढती रही तो एक दिन हमारा ब्रह्मांड बर्फ में तब्दील हो जाएगा। 52 वर्षीय पर्लमुट्टर कैलिफोर्निया यूनीवर्सिटी में कास्मोलॉजी परियोजना के प्रमुख हैं। जबकि 44 वर्षीय ब्रायन श्मिट ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनीवर्सिटी में सुपरनोवा शोध दल के अध्यक्ष हैं, और 42 वर्षीय एडम रीस जॉन हॉफकिंस यूनीवर्सिटी और स्पेस साइंस इंस्टीट्यूट में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रोफेसर हैं। ये तीनों अनुसंधानकर्ता अपनी खोज से अचंभित हैं क्योंकि प्रयोगों के पूर्व इन्हे उम्मीद थी कि अध्ययन के दौरान ब्रह्मांड के विस्तार की रथ्तार कम होने का पता चलेगा, लेकिन उनके अनुसंधान का निष्कर्ष एक दम उल्टा निकला। नतीजे बताते हैं कि ब्रह्मांड का विस्तार धीमा नहीं तेज हुआ है और ब्रह्मांड में आकाशगंगाएँ कहीं अधिक तेज रथ्तार से एक दूसरे से दूर जा रही हैं। यह गतिवर्धन डार्क इनर्जी से संचालित है, जो ब्रह्मांड का एक बड़ा रहस्य है।

  डॉ. बी.डी. श्रीवास्तव
शासकीय पी.जी. कॉलेज, धार
bdshrivastava@gmail.com
 
         
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