कागज के बनावटी फूलों से खुशबु आ नहीं सकती।
लेकिन प्रकृति में पाये जाने वाले हरे पत्तियों जैसे दिखने वाली बनावटी व नकली पत्तियों से पॉवर यानि की विद्युत्त उर्जा प्राप्त की जा सकती है। सुनने पढने में यह बात हमको असहज कर सकती है। लेकिन यह हो सकता है। ‘आर्टीफिशियल सोलर लीफ’ को बनाने वाले दल के प्रमुख डेनियल नोसेरा एमआईटी की मानें तो यह सच है। उनके द्वारा 241 वीं नेशनल मीटिंग ऑफ अमेरिकन सोसायटी में प्रस्तुत शोध में स्पष्ट की गई। इस आर्टीफिशियल सोलर लीफ के द्वारा ठीक वैसी ही ‘फोटो सिंथेसिस’ ;प्रकाश संश्लेषणद्ध की क्रिया दोहराई गई जैसी प्राकृतिक पौधों की हरी पत्ती में सूर्य प्रकाश की उपस्थिति में होती है, जिसके फलस्वरूप हरे पोधे सूर्य के प्रकाश व पानी को उर्जा में परिवर्तित करते हैं।
दशको से आप्राकृतिक पत्तों को विज्ञान में उर्जा प्राप्ति हेतु बड़े विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। नोसेरा ने कहा कि हमें भरोसा है कि हमने यह कर लिया है। आप्राकृतिक सोलर पत्ती विकसित देशों में गरीबों के घरों को रोशन करने का सस्ता स्त्रोत बननें का वादा करती हैं। हमारा उद्देश्य प्रत्येक घर को एक पावर स्टेशन बनाना है।
यह उपकरण एक पोकर साइज का नजर आता है -ना कि कोई वास्तविक पत्ती की तरह।
असल में यह कोई वास्तविक पत्ती की तरह नहीं दिखता। यह सिलिकान, इलेक्ट्रानिक्स और केटेलिस्ट से निर्मित है। यह तत्व रासायनिक क्रिया को बढाते हैं। तेज घूप में इसको एक गैलन पानी में रखा जाता है। इससे इतनी पावर पैदा होती है कि विकसित देशों का एक घर पूरी तरह से रोशन हो जाए। यह उपकरण पानी को उसके दोनों अवयवों हाइड्रोजन व ऑक्सीजन को तोड़ता है, तथा हाइड्रोजन व ऑक्सीजन गैसों को फ्यूल सेल में स्टोर किया जाता है। फिर इन दोनों के उपयोग से पावर उत्पन्न की जाती है। इसको घर के उपर या आसपास जहॉ पर भरपूर घूप आती है रखा जा सकता है।
नौसेरा के अनुसार इस प्रकार के आर्टीफिशियल सोलर लीफ (बनावटी पत्ती ) यू एस नेशनल रिन्यूबल इनर्जी लैब के जॉन टर्नर ने पहले बनाई थी जो कि अस्थाई व अव्यावहारिक थी। लेकिन उनके द्वारा बनाई आर्टीफिशियल सोलर लीफ विकसित देशों के लिए सस्ती बिजली का स्त्रोत बन सकता है।

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