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फेसबुक को भी रैगिंग का जरिया बना लिया

प्रकाशन :सोमवार, 5 सितम्बर 2011
प्रभाकर, कोलकाता, प.बं.

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक की बढ़ती लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। लेकिन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से सटे हावड़ा स्थित बंगाल इंजीनियरिंग एंड साइंस यूनिवर्सिटी (बेसू) में इंजीनियरिंग के सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों की रैगिंग के लिए इस साइट का अनूठा इस्तेमाल किया। लेकिन इसी फेसबुक ने उनको फंसा भी दिया। बेसू प्रबंधन ने इसके जरिए दोषी छात्रों की शिनाख्त कर पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। शायद, फेसबुक के जरिए रैगिंग और इसी के जरिए दोषी छात्रों की पहचान कर उनको सजा देने का यह देश में पहला मामला है। बेसू में इस साल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए दाखिला लेने वाले दो छात्रों ने इस सप्ताह अचानक देखा कि उनके फेसबुक खातों पर सीनियर छात्रों ने धमकी भरे संदेश भेजे हैं। इनमें उनको रैगिंग के लिए तय समय पर तयशुदा जगह पर नहीं पहुंचने पर गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी गई थी। उन छात्रों ने इसकी शिकायत पहले अपने घरवालों से की। घरवालों ने यह शिकायत तृणमूल कांग्रेस से संबद्ध छात्र संगठन तृणमूल छात्र परिषद के पदाधिकारियों से यह शिकायत की। छात्र संगठन ने सीनियर छात्रों के धमकी भरे संदेशों का प्रिंट लेकर वाइस-चांसलर अजय राय को सौंप दिया। यह मामला राज्य के उच्च-शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु तक भी पहुंचा। उनके निर्देश पर बेसू ने फौरन एक जांच समिति गठित की। समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोषी छात्रों की पहचान कर उन पर आर्थिक जुर्माना तो लगाया ही गया है, हएस्टल से भी निलंबित कर दिया गया है।

बेसू के रजिस्ट्रार विमान बनर्जी कहते हैं कि तीन छात्रों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, उनको एक महीने के लिए हॉस्टल से भी निलंबित कर दिया गया है। दो अन्य छात्रों को दो-दो महीने के लिए निलंबित किया गया है। उनको दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी भरना होगा। इन छात्रों के घरवालों को भी इस मामले की सूचना दे दी गई है। इनको आगे न तो कोई छात्रवृत्ति मिलेगी और न ही कोई मेडल। भविष्य में दोषी पाए जाने पर उनको विश्वविद्यालय से निकालने की भी चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही शिकायत करने वाले छात्रों- गौरांग विश्वास और श्यामल दास पर भी दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उनको भी हॉस्टल से निलंबित किया गया है। लेकिन आखिर शिकायत करने वाले छात्र के खिलाफ कार्रवाई क्यों की गई है ? इस सवाल पर रजिस्ट्रार कहते हैं कि उन पर सीनियरों को उकसाने का आरोप था। उन्होंने फेसबुक पर अशालीन टिप्पणियां की थीं और कई सीनियर छात्रों को दोस्त बना रखा था।

बेसू के वाइस-चांसलर अजय राय कहते हैं कि बेसू रैगिंग-मुक्त परिसर है। फेसबुक के जरिए रैगिंग का यह पहला मामला सामने आया है इसलिए हमने इस मामले में तुरंत कार्रवाई की है। वे बताते हैं कि दो छात्रों और उनके अभिवावकों ने फेसबुक के जरिए रैगिंग की शिकायत की थी। जांच के बाद यह शिकायत सही साबित हुई।

वैसे, बेसू पहले भी रैगिंग के लिए बदनाम रहा है। लेकिन रैगिंग के लिए सोशल वेबसाइट के इस्तेमाल का मामला पहली बार सामने आया है। इस साल दाखिला लेने वाले कई अन्य छात्रों को भी फेसबुक पर सीनियर छात्रों की ओर से ऐसी ही धमकियां मिली थीं। उन संदेशों में किसी को कालेज छोड़ने या जान से हाथ धोने की धमकी दी गई थी तो किसी को खास रंग के कपड़े पहन कर कालेज आने को कहा गया था।

उच्च शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु कहते हैं कि हम किसी भी कीमत पर रैगिंग बर्दाश्त नहीं करेंगे। मैंने सभी जिला शासकों और पुलिस अधीक्षकों से ऐसे मामलों में तुरंत कानूनी कार्रवाई करने को कहा है।


  प्रभाकर, कोलकाता, प.बं.

 
         
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