लखनऊ। गांव अतरौली में 31 दिसंबर 1925 को जन्मे श्रीलाल शुक्ल
शहर के यशस्वी साहित्य परंपरा के ध्वजावाहक थे। प्रशासनिक सेवा के दौरान विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने हिंदी में 25 से अधिक रचनाएं कीं। उनकी कालजयी रचना राग दरबारी का हिंदी साहित्य जगत आजीवन ऋणी रहेगा। इसी कृति के लिए उन्हें साहित्य अकादमी और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। इसकी गौरवगाथा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसका अनुवाद अंग्रेजी के साथ-साथ 15 भारतीय भाषाओं में हो चुका है।
व्यंग्य लेखकों में खास स्थान रखने वाले श्रीलाल शुक्ल का जीवन उपलब्धियों से भरा रहा। आइए नजर डालते हैं उनकी कृतियों और उसपर मिले पुरस्कारों पर,
कृतियां:
1.)
उपन्यास
-सूनी घाटी का सूरज
-अज्ञातवास
-राग दरबारी
-आदमी का जहर
-सीमाएं टूटती हैं
-मकान
-पहला पडाव
-बिस्रामपुर का संत
-बब्बर सिंह और उसके साथी
-राग विराग
2.)
व्यंग्य
-अंगद का पांव
-यहां से वहां
-मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएं
-उमरावनगर में कुछ दिन
-कुछ जमीन में कुछ हवा में
-आओ बैठ लें कुछ देर
-अगली शताब्दी का शहर
-जहालत के पचास साल
-खबरों की जुगाली
3.)
लघु कहानी संग्रह
-यह घर मेरा नहीं
-सुरक्षा तथा अन्य कहानियां
-इस उम्र में
-दस प्रतिनिधि कहानियां
4.)
संस्मरण
-मेरे साक्षात्कार
-कुछ साहित्य चर्चा भी
5.) साहित्यिक समालोचना
-भगवती चरण वर्मा
-अमृतलाल नागर
-अज्ञेय कुछ रंग कुछ राग
6.)
संपादन
-हिंदी हास्य व्यंग्य संकलन
पुरस्कार:
- वर्ष 2009 के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार
- वर्ष 2008 में पद्मभूषण
- वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यशभारती सम्मान
- वर्ष 1999 में बिस्रामपुर का संत के लिए बिरला फाउंडेशन द्वारा व्यास सम्मान
- वर्ष 1997 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मैथिली शरण गुप्त सम्मान
- वर्ष 1996 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शरद जोशी सम्मान
- वर्ष 1994 में उप्र हिंदी संस्थान द्वारा लोहिया सम्मान
- वर्ष 1991 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा गोयल साहित्य पुरस्कार
- वर्ष 1988 में उप्र हिंदी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण सम्मान
- वर्ष 1987-90 तक भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की ओर से एमेरिट्स फेलोशिप
- वर्ष 1978 में मकान के लिए मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य परिषद द्वारा सम्मानित
- वर्ष 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार
विशेष:
- वर्ष 1981 में बेलग्रेड में अंतरराष्ट्रीय लेखकों की सभा में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
- वर्ष 1979-80 में भारतेंदु नाट्य अकादमी के निदेशक
- वर्ष 2005 में उनके 80वें जन्मदिवस पर उनके लिए एक पुस्तक श्रीलाल शुक्ल : जीवन ही जीवन प्रकाशित हुई। इसमें डॉ. नामवर सिंह, राजेंद्र यादव, अशोक वाजपेयी, दूधनाथ सिंह, निर्मला जैन, कुंवर नारायण और रघुवीर सहाय समेत अन्य लेखकों के लेख हैं।
जीवन सफर
1925- लखनऊ जिला के अतरौली गांव में जन्मे
1947- इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक
1947- सिविल सेवा में प्रवेश
1957- पहला उपन्यास सूनी घाटी का सूरज प्रकाशित
1958- पहला व्यंग्य संकलन अंगद का पांव प्रकाशित
1983- प्रशासनिक सेवाओं से सेवानिवृत्त


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