रचनात्मक संस्कारों का अनुसमर्थन

  संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com

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पुस्तकायन विचार-वीथीप्रसंगवश इनदिनोंहिंदी-विश्व लोक-आलोकव्याकरणतकनीकबचपनशेष-विशेष हलचलविशेषांक सृजनधर्मीलेखकों से संपादक बनेंचतुर्दिकपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

 

मुझ पर करो पीएचडी - काशीपुरी कुंदन

गुस्से में है भैंस - शरद तैंलंग

मीडिया पर मंहत - वीरेन्द्र जैन

मँहगाई है जहाँ, आन-बान-शान है वहाँ - अविनाश वाचस्पति

मीडिया पर महंत - वीरेन्द्र जैन

तीन व्यंग्य - आर.के.भंवर

अख़बार न निकालने वाले - वीरेन्द्र जैन

ओफ्फ ! ये फ़ाईलें... - आर.के.भंवर

ऐसे भी माँगे, वैसे भी माँगें - रामदेव धुरंधर

बेताल कथा - सुयोग्य वित्तमंत्री - गिरीश पंकज

ग्रेज़ों के खाने कमाने का दिन - अविनाश वाचस्पति

बेताल कथा - ज्ञान और शैतान की कहानी - गिरीश पंकज

अश्वथामा हतो - मुरली मनोहर श्रीवास्तव

ये सीडियाँ - आर.के.भंवर

ये पत्नियाँ - आर.के.भंवर

बेताल कथा - रहने का ठिकाना -गिरीश पंकज

 

थाने में एक बयान - सुभाष चंदर

श्मशान घाट का इंडेक्स यमराज के हवाले - अविनाश वाचस्पति

 मुर्गा और आदमी - आर.के.भोनावर

चिंता जिन करियो, हम ह न ! - आर. के. भोनावर

धृतराष्ट्र का मुक्तिबोध - मुरली मनोहर श्रीवास्तव

बेताल कथाः राजा की खुशहाली का राज - गिरीश पंकज

 मेरा घर - लक्ष्मीकांत वैष्णव

चिरकुट एम एन सी संवाद - मुरली मनोहर श्रीवास्तव

मो सम कौन कुटिल खल कामी - प्रेम जनमेजय

मोबाइल मेनिया उर्फ मोबाइल मैनर्स - रविशंकर श्रीवास्तव

  गीत का फिल्मी होना और फिल्म का - प्रेम जनमेजय

बेताल कथाः कथा एक परतंत्र देश की - गिरीश पंकज

धर्म-निरपेक्षता बोले तो...! - रंदी सत्यनारायण राव

मैया मोरी, मैं भी साहब पटायो - अशोक गौतम

कवियों के बारे में - लक्ष्मीकांत वैष्णव

जनता का समाधान- गिरीश पंकज

जीन्स में बांके बिहारी- तपन मुखर्जी

कहीं कोई आप पर हँस तो नहीं रहा?- पंकज अवधिया

बेताल कथाःसमाजवादी मच्छर- गिरीश पंकज

बेताल कथाः सीधा-सच्चा वकील- गिरीश पंकज

दुखहरण फाइल भंडारः रवि श्रीवास्तव

 मुद्दों का मुरब्बाः रविशंकर श्रीवास्तव

गैस का सिलेण्डर/ कृष्ण कुमार त्रिवेदी

 बेताल कथा-2: खास प्रजाति का अफसर/ गिरीश पंकज

नया मेघदूत / शरद जोशी

 बेताल कथा: राजधानी रिटर्न बंदर/ गिरीश पंकज

प्रेस क्लब में राव - विनोदशंकर शुक्ल 

कुछ और महाभारत - शशिकांत

 

आपकी प्रतिक्रिया

प्रजा का कोप सब कोपों से बड़ा होता है - चाणक्य

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  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, संजीव ठाकुर, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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