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योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’ के नवगीत

प्रकाशन :रविवार, 15 जनवरी 2012
योगेन्द्र कुमार वर्मा ‘व्योम’
नई ताज़गी भर जाती हैं
पुरखों की यादें

मन को दिया दिलासा, दुख के
बादल जब छाए
ख़ुशियाँ बाँटी संग, सुखद पल
जब भी घर आए
सपनों में भी बतियाती हैं
पुरखों की यादें

स्वार्थपूर्ति का पहन मुखौटा
मिलता हर नाता
अवसादों के अंधड़ में जब
नज़र न कुछ आता
बड़े प्यार से समझाती हैं
पुरखों की यादें

कभी तनावों के जंगल में
भटके जब-जब मन
और उलझनें बढ़ती जायें
दूभर हो जीवन
नई राह तब दिखलाती हैं
पुरखों की यादें

     
                

कई दिनों से सोच रहा हूँ
तुमको पत्र लिखूँ

लिखूँ कुशलता घर की, आँगन
की दीवार लिखूँ
ख़ुशफ़हमी की फ़सलें, मन के
खरपतवार लिखूँ
रिश्तों के पैबंद लगे जर्जर
से वस्त्र लिखूँ

कभी सोचता हूँ कटु अनुभव
बाँटूँ जीवन के
या फिर लिखूँ याद आते दिन
गुज़रे बचपन के
आने वाले उजले पल को
भी सर्वत्र लिखूँ

मोबाइल से बातें तो काफी
हो जाती हैं
लेकिन शब्दों की ख़ुशबुएँ
कहाँ मिल पाती हैं
थके-थके से खट्टे-मीठे
बीते सत्र लिखूँ
  योगेन्द्र कुमार वर्मा ‘व्योम’
एस-49, सचिन स्वीट्स के पीछे,
दीनदयाल नगर फ़ेज-प्रथम,
काँठ रोड, मुरादाबाद (उ0प्र0)
मो.-9412805981
vyom70@yahoo.in
 
         
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