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बुंदेली गीत - ख़ुद अँगरेज़ी पे मर रये हैं

प्रकाशन :गुरूवार, 28 अक्टूबर 2010
पी. दयाल श्रीवस्तव
हिंदी खों लाख बचावे की, वे पूरी कोशिश कर रये हैं।
पता नहीं का कारन सें ,ख़ुद अँगरेज़ी पे मर रये हैं।

बातें कर रये सब हिंदी की, ख़ुद अँगरेज़ी में बोलत हैं।
हिंदी के अमृत मंथन में ,विष अँगरेज़ी को घोलत हैं।
हिंदी को करबे खों प्रचार, इंगलिश के संगे डोलत हैं।
अँगरेज़ी बांटों खों धरकें ,हिंदी पलवा पे तोलत हैं।


हिंदी के बाग बगीचों में, वे अँगरेज़ी खों चर रये हैं।

हिंदी हिंदी जो चिल्ला रये, सबके बच्चा इंग्लिश पढ़ रये।
हिंदी की गारीं भूल गये,अँगरेज़ी गारी में लड़ रये।
डेम फूल इडीयट कहकें, ख़ुद अँगरेज़ी में हैं सड़ रये।
भारत खों इंडिया बना बना,बस इंग्लिश में आगे बढ़ रये।
अँगरेज़ी इत्ती पढ़ लई है,पढ़ पढ़ कें ख़ूब डकर रये हैं।

सबरे के रये अँगरेज़ी बिन, बिल्कुल ने काम चले भैया।
हिंदी वारों की हिंदुस्तां में दाल ने गल पेहे भैया।
लाख पढ़ो हिंदी,इंग्लिश बिन,काम ने चल पेहे भैया।
हिंदी के पढ़वेवारों खों वो दाम ने मिल पेहे भैया।
अपने घर के घरवारे तक ऐसो प्रचार ख़ुद कर रये हैं।

संसद में बोलत अँगरेज़ी,सचिवालय में इंग्लिश इंग्लिश।
जज लिखें फ़ैसला इंग्लिश में, मदिरालय में इंग्लिश इंग्लिश।
राष्ट्रसंघ जावे वारों खों बस दिखात इंग्लिश इंग्लिश्।
मुफ़्त माल खाबे वारों खों बस दिखात इंग्लिश इंग्लिश।
अँगरेज़ी डंडा मार मार ,हिंदी खों बस में कर रये हैं।

यदि सही मायने में तुमखों, हिंदी खों आज बचाने है।
अपने पूरे हिंदुस्तां खों हिंदी को देश बनाने है।
तो हिदी वारों सें हिंदी में हर हिदुस्तानी बात करे।
अन्य दूसरी भाषाओं को हिंदी में अनुवाद करे।
खाओ क़सम अब सें आगे,हिंदी सिर माथे धर रये हैं

भारत की सब भाषाओं को, मान करो मिलकें भैया।
हिंदी खों सबके ऊपर धर, सम्मान करो मिलकें भैया।
तामिल, बंगला, उर्दू,कन्नड़,सब भाषाओं के रंग एक।
भारत में रेवे वारों के, सब संस्कार सब ढंग एक।
अपनी भाषायें छोड़ काये, फिर अँगरेज़ी पे गिर रये हो।

हिंदी इतनी मज़बूत करो,सब ग्यांत करो अब हिंदी में।
गणित साइंस इंजीनियरिंग की, हर बात करो अब हिंदी में।
ऊंची शिक्षाओं तक के हर, संवाद करो अब हिंदी मे।
दुनियाँ भर के सब मान ध्यान, सब याद करो अब हिंदी में।
अब सोचो अँगरेज़ी खों तज, सब हिंदी खों वर रये हैं।
हिदी खों लाख बचावे की, वे पूरी कोशिश कर रये हैं।
पता नहीं का कारण सें, ख़ुद अँगरेज़ी पे मर रये हैं।
  पी. दयाल श्रीवस्तव
12 शिव‌म‌ सुंद‌र‌म न‌ग‌र‌, छिंद‌वाड़ा,
(म‌.प्र.) 480001
मो.- 9713355846
pdayalshrivastava@rediffmail.com
 
         
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