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जोश

प्रकाशन :गुरूवार, 29 दिसम्बर 2011
प्राण शर्मा
टियाला की क्रिकेट टीम 224 रन बना कर आउट हो गयी थी .
जालंधर की क्रिकेट टीम को मैच जीतने के लिए 225 रन चाहिए थे . एक
विकेट खोकर उसने 150 रन बना लिए थे . अभी 20 ओवर ही हुए थे .
क्रीज़ पर देव कुमार और जसवंत सिंह थे . उनका उत्साह देखते ही
बनता था . वे दोनो रन पर रन बनाते जा रहे थे . कभी चौका और कभी
छिक्का . दर्शकों की तालियों से मैदान तो क्या आकाश भी गूँज रहा था .
खेल का रुख बदलते देर नहीं लगी . राधे श्याम और धीरेन्द्र सिंह
ने गेंद संभाली .उनकी तेज़ गेंदों के सामने देव कुमार और जसवंत सिंह
टिक नहीं पाये . देखते ही देखते उनके बाद आये पाँच खिलाड़ी भी
आउट हो गये . जालंधर क्रिकेट टीम के फैन्स के चेहरों पर निराशा छा
गयी . 205 रन बने थे . जीत के लिए अब भी 20 रन चाहिए थे और
खिलाड़ी बचे थे केवल 3 . पविलियन में बैठा संतोख सिंह गुस्साए कुत्ते
की भाँति मन ही मन में गुर्रा रहा था - " काश , मैं क्रीज़ पर होता , हर
गेंद की धुनाई कर देता ." एक सप्ताह पहले उसने अमृतसर की क्रिकेट
टीम के गेंदबाजों की खूब धुनाई की थी और केवल 18 गेंदों पर 45 रन
बनाये थे .
क्रीज़ पर अब राधेश्याम के साथ आख़री खिलाड़ी संतोख सिंह .
था .जोश से भरा . जीत के लिए सिर्फ़ 5 रन चाहिए थे . अंतिम ओवर की
पहली तेज़ घुमावदार गेंद ओंकार सिंह ने फैंकी . जोश में संतोख सिंह ने
पूरी ताक़त के साथ बल्ला घुमाया . दर्शकों ने छिक्का की आस लगाई
लेकिन गेंद सीधे विकेट से जा टकरायी . संतोख सिंह कभी अपने बल्ले को .
देखने लगा और कभी दूर जा गिरी एक विकेट को . वो आउट हो चुका था .
" काश , मैं क्रीज़ पर होता , हर गेंद की धुनाई कर देता " का उसका जोश
इस बार रंग नहीं ला सका .

  प्राण शर्मा
3 Crackston Close,
Coventry, CV2 5EB, UK
pransharma@talktalk.net
 
         
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