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गंभीर जुआरी – युधिष्ठिर के अवतार

प्रकाशन :सोमवार, 5 दिसम्बर 2011
हरिहर झा

कोई पूछ बैठे कि जुआ अधिक से अधिक किस देश में खेला जाता है? तो ’देश’ सुनते ही लास वेगास को भूलना पड़ता है। आश्चर्यजनक उत्तर इस बात में मौजूद है कि आस्ट्रेलियावासी उत्तरी अमेरिका के देशों से प्रति व्यक्ति दुगुना खेलते हैं। तभी तो यहाँ के केवल 2.1 करोड़ लोगों के बीच दुनिया की 20% पोकर मशीने लगी हुई हैं। कुल आबादी के हिसाब से आस्ट्रेलिया का विश्व में 52 वा स्थान हो तो क्या हुआ? कुल पोकर मशीनो के हिसाब से उसे 7 वा स्थान होने का गौरव प्राप्त है। यहाँ 10 ऐसी मशीने पाई गई जहाँ आ कर लोग एक वर्ष में 1 से 2 करोड़ डालर (प्रत्येक मशीन पर) तक स्वाहा करते हैं। फिर क्यों न आस्ट्रेलिया को दुनिया का सबसे बड़ा जुआरी देश समझा जाय! 

माना कि पश्चिमी देशों में जुये के मामले में मूल्य कुछ अलग हैं। मनोरंजन के लिये यहाँ थोड़ा बहुत जुआ खेल लेना बुरा नहीं समझा जाता पर इसे अजूबा नहीं तो और क्या कहा जाय कि मेलबर्न कप की घुड़दौड़ के दिन (जो कि नवम्बर माह के पहले मंगलवार को ’मनाया’ जाता है! ) जैसे पूरे देश की साँस रूक जाती है और एक उत्सव जैसा वातावरण हो जाता है। पिछली 1 नवंबर को मैंने भारत में अपने मित्र को फोन पर बताया कि “आज मेलबर्न कप की घुड़दौड़ होने से यहाँ मेलबर्न में सरकारी और गैर सरकारी सभी जगहों पर अवकाश है” तो उसने बार-बार “घुड़दौड़ की छुट्टी!” कह कर हँसते हँसते अपना बुरा हाल कर लिया। 

मनोरंजन का उद्देश्य अलग किन्तु जिन लोगों को जुये में भारी वित्तिय हानी सहनी पड़ती है और साथ ही परिवार का टूटना, घर बेचा जाना, जघन्य अपराध , मानसिक तनाव और आत्महत्या आदी से गुजरना पड़ता है उन्हे ’गंभीर जुआरी’ की संज्ञा दी जाती है। शोध-कर्ता बताते हैं कि जुआ खेलना और गंभीर जुआरी होना ये दोनो अलग अलग चीजें हैं। दोनो को विभाजित करने वाली रेखा व्यक्ति की आकांक्षा में है। यदि आप पैसा कमाने के लिये या धनवान बन जाने के लिये जुआ खेलते हैं तो यह नैतिक रूप से गलत है क्योंकि तब आप धनोपार्जन के लिये बुद्धि या परिश्रम को महत्व नहीं देते – भाग्य के भरोसे रहना चाहते हैं। लेकिन मान लीजिये वास्तव में आप पैसा बनाने के इरादे से नहीं खेलते तो उसे आप अपनी आर्थिक समस्याओं का समाधान समझ कर नहीं खेलेंगे फिर आप हद से ज्यादा पैसा और समय गवाँना भी मंजूर नहीं करेंगे। इन हालात में जुआ केवल दिल बहलाव का साधन समझा जा सकता है। अपने इस विधायक रूप में यह मनोरंजन के अलावा सामाजिक मिलाप का एवं मीठी आशा और मीठे सपनों का अवसर समझा जाता है। हालाँकि धर्म भी यही सब कुछ दे देता है - मीठी आशा और मीठे सपने। पर जब धर्म की पकड़ ढीली होने लगती है तो कुछ लोग इसके लिये जुये की तरफ भागते हैं।

अब प्रश्न उठता है गंभीर जुआरी कौन है? सर्वमान्य परिभाषा के अनुसार गंभीर जुआरी वह है जिसमें इन दस में से ५ संकेत मौजूद हों : बार बार जुये का विचार आना, लम्बा समय जुये में बिताना, जुये का अवसर न मिलने पर चिड़चिड़ापन, समस्या से भागने के लिये जुआ खेलना और जुये में नुकसान पूरा करने के लिये ज्यादा खेलना। केवल इन पाँच संकेतों से यह तो तय हो जाता है कि खेलने के लिये केसिनो में प्रवेश करते समय यदि आपको थोड़ा डर नहीं लगता तो या तो आप बहुत धनवान हैं या फिर आपने जुये के खेल को अच्छी तरह समझा नहीं है क्योंकि अब आगे के ५ संकेत गंभीरता की सीढ़ियों पर चढ़ते हैं : जुआ खेलने की सीमा छुपाने के लिये झूठ बोलना, जुआ न खेलने के इरादे में असफल प्रयास, परिवार या मित्रों के सामने नुकसान का पैसा अदा करने के लिये अपील ,परिवार का प्रेम या नौकरी पर आँच आने पर भी जुआ न छोड़ पाना और अंत में पैसा पाने के लिये अपराध। इन संकेतों से इतना तय है कि जुये के लिये स्त्री को दाव पर लगाने का काम केवल युधिष्ठिर ने नहीं किया था, इसमें कंगाल होने वाला प्रत्येक व्यक्ति परोक्ष रूप से स्वयं को तथा अपने परिवार को दाव पर लगा देता है। यह एक ऐसी समस्या है जो अमेरिका या विश्व के वित्तिय ढांचे के लुढ़कने के साथ भी नहीं लुढ़कती बल्कि ज्यादा बढ़ती है। जब बेरोजगारी भी गंभीर जुआरी का रास्ता नहीं बदल सकती तो फिर और क्या समाधान हो सकता है? आस्ट्रेलिया में २.३% जनता गंभीर जुये की लत में बुरी फँसी हुई है और इस प्रकार उनके परिवार सहित ३३ लाख लोग प्रभावित हैं। इसमें अंतिम परिणति आत्महत्या तक भी पहुँच जाती है। आत्महत्या के अन्य कारणों के साथ गंभीर जुआ भी अपने आप में एक मुख्य मुद्दा बनता है।

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  हरिहर झा
मेलबोर्न, आस्ट्रेलिया
hariharjha2007@gmail.com
 
         
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