एक

मेरे लिखे में
अगर दुक्ख है
और सबका नहीं

मेरे लिखे को आग लगे

दो

अगर कविता में
न आये मेरी मातृभूमि

मैं कवि नहीं

तीन

जैसे संदूक में
रखती है माँ
अपनी प्यारी चीजें
कविता में इतना ही तो करता हूँ मैं

चार

यह कविता है
तो इसमें
मेरी आत्मा होनी चाहिए

पाँच

बार-बार गाता हूँ
तुलसी बाबा का दोहा
वह सुन्दर हो उठता है
बार-बार लिखता हूँ वही पंक्तियाँ
एक दिन वह कविता हो जाती है

छह

अच्छी कविता का महत्व सिर्फ़ अच्छी कविता में है
उस पर हुई अच्छी बातों में नहीं

  लीलाधर मंडलोई
ए-2492, नेताजी नगर,
नई दिल्ली
फोन- 011-26888277
leeladharmandloi@gmail.com
 
         
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