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शशांक मिश्र भारती की कविताएँ

प्रकाशन :गुरूवार, 2 फरवरी 2012
शशांक मिश्र भारती

नेताजी का सम्मान

आज के नेता का सम्मान करो
उसकी नीतियों को ही
नाश्ता समझकर
हर सुबह पान करो,
वह जो करता है
देश की समस्याओं को हरने के लिए
उसका भी परिष्कार करो
देकर उसको अपना मत
जीवन भर आश्वासनों का
इन्तजार करो,
जो कुछ भी पास हो
ले जाकर के उसकों नेताजी को
चन्दे में देकर
उनकी तिजोरियां भरो,
मुसीबत आजाये
तब-
अपना सभी कुछ
उनको समर्पित करो
भले ही वह तुमको
भेड़ की खाल सा समझकर
अपने स्वार्थ की ऊन के लिए
उतारते रहें
लेकिन-
तुम उनका सम्मान करो
हां-
उनका स्मरण आते ही
सम्मान करो।

निताइन सेवा

आज तक
तुमने जैसी सेवा की है
नेता जी की
वैसी ही सेवा
करते रहना है देश की निताइन की,
एक बार चाहें
भूल जइयो नेता को
पर-
न भूल करना निताइन की
कैसे भी सेवा-सत्कार में,
आगे होती हैं
यह सभी नेता से
जनता के परोपकार में
होती हैं द्रोपदी आज की
परन्तु-
बिन चीर के शोभा हैं ताज की
इनका चीर हरण नहीं कर सकते हैं
आज के दुःशासन
बल्कि-
यही डगमगा देती हैं
उनका आसन।
  शशांक मिश्र भारती
हिन्दी सदन बड़ागांव, शाहजहांपुर-242401 उप्र, 9410985048
 
         
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