रीत गए हैं प्रीत भरे पतीले
उलट गई है संस्कारों की थाली
मन - मटके में नही भावों का पानी
आदर्शों का डिब्बा खाली-खाली
बासी हुई सुगंध सम्बन्धों की
रिश्ते हुए हैं ज़हर की प्याली
पावन नही रही अग्नि चूल्हे की
कुंठा के धुएँ से घर-दीवारें काली
आँखें मुस्काती कुटिल मुस्काने
मुख का अभिवादन बन गाया गाली
बिखरी आदर-सत्कारों की रंगोली
टूट गई मान मनुहारों की डाली
पेड़ों पर लोभ लालच की अमराई
उगी फ़सलों पर गद्दारी की बाली
विकसी दूषित विचारों की फुलवारी
फै़ली पाप-अधम की हरियाली
दया करूणा के पक्षी न आ पाते अन्दर
छल-कपट बन गया मन का माली
वासनाओं से भरा भौंरों का गुंजन
तितलियों के मुख नहीं लाज की लाली
कच्चे पड़ गये प्रण के पत्थर
ढह गई इमारतें मिसालों वाली
उलट गई है संस्कारों की थाली
मन - मटके में नही भावों का पानी
आदर्शों का डिब्बा खाली-खाली
बासी हुई सुगंध सम्बन्धों की
रिश्ते हुए हैं ज़हर की प्याली
पावन नही रही अग्नि चूल्हे की

कुंठा के धुएँ से घर-दीवारें काली
आँखें मुस्काती कुटिल मुस्काने
मुख का अभिवादन बन गाया गाली
बिखरी आदर-सत्कारों की रंगोली
टूट गई मान मनुहारों की डाली
पेड़ों पर लोभ लालच की अमराई
उगी फ़सलों पर गद्दारी की बाली
विकसी दूषित विचारों की फुलवारी
फै़ली पाप-अधम की हरियाली
दया करूणा के पक्षी न आ पाते अन्दर
छल-कपट बन गया मन का माली
वासनाओं से भरा भौंरों का गुंजन
तितलियों के मुख नहीं लाज की लाली
कच्चे पड़ गये प्रण के पत्थर
ढह गई इमारतें मिसालों वाली

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