चारो तरफ फैला यह हरा - पीला वसंत
और यह ललाई
लिपस्टिक लगे शाम के होठ
बेचैन हो रहा मेरे भीतर का पंछी
सपनों - सपनों में
मैं जहां बैठा, वह किनारा किसी सरोवर का
मेरी पीठ से सटा
बौराया एक पेड़
झड़ रहा है झरने सा
बेसंभाल बिखरे हुए बालों में
गिरता पड़ता चूड़ियों से किरकिरे सा बौर
और ठीक मेरे सामने
किनारे को प्रतिपल चूमती यह लहर
मुझे ईर्ष्यालु बना रही है।

और यह ललाई
लिपस्टिक लगे शाम के होठ
बेचैन हो रहा मेरे भीतर का पंछी
सपनों - सपनों में
मैं जहां बैठा, वह किनारा किसी सरोवर का
मेरी पीठ से सटा
बौराया एक पेड़
झड़ रहा है झरने सा
बेसंभाल बिखरे हुए बालों में
गिरता पड़ता चूड़ियों से किरकिरे सा बौर
और ठीक मेरे सामने
किनारे को प्रतिपल चूमती यह लहर
मुझे ईर्ष्यालु बना रही है।
जयप्रकाश मिश्र
ग्राम-बिजौरी, पोस्ट-गुठीना,
जिला-फर्रुखाबाद,
205302 (उत्तर प्रदेश),
मो.-9369772012
mishrajayprakash262@gmail.com
जिला-फर्रुखाबाद,
205302 (उत्तर प्रदेश),
मो.-9369772012
mishrajayprakash262@gmail.com


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